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TB treatment: टीबी का इलाज बीच में छोड़ना पड़ सकता है भारी, जानें क्यों जरूरी है पूरा कोर्स

TB treatment

TB treatment: क्षय रोग यानी टीबी (Tuberculosis) एक ऐसी बीमारी है जो सदियों से मानव सभ्यता के लिए चुनौती बनी हुई है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद, आज भी हर साल टीबी के लाखों नए मामले सामने आते हैं। भारत सरकार इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए ‘निक्षय पोषण योजना’ जैसी कई मुफ्त दवा योजनाएं और एडवांस ट्रीटमेंट की सुविधा प्रदान कर रही है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि टीबी लाइलाज नहीं है, लेकिन मरीजों की एक छोटी सी लापरवाही इसे जानलेवा बना देती है।

TB treatment : क्या टीबी को पूरी तरह जड़ से खत्म करना संभव है?

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजीत कुमार के अनुसार, टीबी का पूर्ण उपचार शत-प्रतिशत संभव है। यदि कोई मरीज डॉक्टर द्वारा निर्धारित 6 से 9 महीने का नियमित कोर्स पूरा करता है, तो शरीर से टीबी के बैक्टीरिया पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं। कुछ गंभीर मामलों में यह कोर्स एक साल या उससे अधिक भी चल सकता है। दवाइयों का यह चक्र बैक्टीरिया की प्रकृति को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है, ताकि फेफड़ों या शरीर के अन्य हिस्सों में मौजूद संक्रमण का नामोनिशान मिट जाए।

TB treatment : मरीज क्यों छोड़ देते हैं इलाज? सबसे बड़ी गलतफहमी

अक्सर देखा गया है कि इलाज शुरू होने के 2 से 4 सप्ताह के भीतर मरीज को काफी राहत महसूस होने लगती है। उसकी खांसी कम हो जाती है, भूख लगने लगती है और शरीर की कमजोरी दूर होने लगती है। यहीं से समस्या की शुरुआत होती है। मरीज को लगने लगता है कि वह अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और उसे भारी-भरकम दवाइयां खाने की जरूरत नहीं है। अपनी इसी गलतफहमी के कारण वे दवा का कोर्स बीच में ही रोक देते हैं। डॉ. कुमार बताते हैं कि दवा छोड़ते ही बैक्टीरिया फिर से सक्रिय होने लगते हैं, जो पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली और ‘ड्रग रेजिस्टेंट’ (दवाओं के प्रति प्रतिरोधी) हो जाते हैं।

कोर्स अधूरा छोड़ने के गंभीर परिणाम और संक्रमण का खतरा

जब कोई मरीज बीच में दवा छोड़ देता है, तो उसके शरीर में बचे हुए बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते। ये सुप्त अवस्था में चले जाते हैं और कुछ समय बाद दोबारा हमला करते हैं। ऐसी स्थिति में साधारण टीबी, ‘एमडीआर टीबी’ (Multi-Drug Resistant TB) में बदल सकती है, जिसका इलाज बहुत कठिन और लंबा होता है। इसके अलावा, ऐसा व्यक्ति समाज के लिए भी खतरा बन जाता है क्योंकि वह अनजाने में अपने आसपास के लोगों, परिवार और बच्चों में टीबी का संक्रमण फैलाता रहता है।

विशेषज्ञों की सलाह: नियम, संयम और सही खान-पान

टीबी को मात देने के लिए केवल दवा ही काफी नहीं है, बल्कि अनुशासन भी जरूरी है। डॉ. अजीत कुमार सलाह देते हैं कि मरीजों को बिना एक भी दिन छोड़े, निश्चित समय पर अपनी दवाएं लेनी चाहिए। इसके साथ ही, टीबी की दवाएं शरीर पर काफी प्रभाव डालती हैं, इसलिए डॉक्टर द्वारा बताए गए उच्च प्रोटीन युक्त आहार (डाइट) का पालन करना अनिवार्य है। पौष्टिक भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है, जिससे दवाएं बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं।

इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज: तुरंत कराएं जांच

टीबी का समय पर पता चलना इसके सफल इलाज की पहली सीढ़ी है। यदि आपको या आपके आसपास किसी को निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच करानी चाहिए:

  • लगातार खांसी: यदि खांसी 2 हफ्ते से अधिक समय तक बनी रहे।

  • बलगम की समस्या: खांसी के साथ बलगम आना या थूक में खून की धारियां दिखना।

  • बुखार और पसीना: शाम के समय हल्का बुखार रहना और रात में सोते समय पसीना आना।

  • वजन का गिरना: बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से शरीर का वजन कम होना और भूख न लगना।

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