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BJP Foundation Day 2026: 46 साल पहले ऐसे खिली थी ‘भाजपा’, जानें जनसंघ से अब तक का ऐतिहासिक सफर

BJP Foundation Day 2026

BJP Foundation Day 2026:आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपना स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को अस्तित्व में आई यह पार्टी आज न केवल भारत की सत्ता के केंद्र में है, बल्कि सांगठनिक रूप से विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन चुकी है। शून्य से शिखर तक पहुंचने की यह यात्रा वैचारिक दृढ़ता, कड़े संघर्ष और कुशल नेतृत्व की एक अनूठी कहानी है।

BJP Foundation Day 2026: भारतीय जनसंघ: राष्ट्रवाद की नींव और वैचारिक जड़ें

भाजपा का इतिहास वास्तव में 1951 से शुरू होता है, जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ‘भारतीय जनसंघ’ की स्थापना की थी। जनसंघ का उदय मुख्य रूप से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की रक्षा और ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ जैसी व्यवस्थाओं के कड़े विरोध के लिए हुआ था। आपातकाल (1975-77) के दौरान लोकतंत्र को बचाने के लिए जनसंघ का विलय ‘जनता पार्टी’ में कर दिया गया ताकि कांग्रेस के राजनीतिक एकाधिकार को चुनौती दी जा सके।

BJP Foundation Day 2026: 6 अप्रैल 1980: दोहरी सदस्यता विवाद और भाजपा का जन्म

जनता पार्टी के भीतर जल्द ही वैचारिक मतभेद उभरने लगे। मुख्य विवाद ‘दोहरी सदस्यता’ को लेकर था, जिसमें जनसंघ पृष्ठभूमि के नेताओं के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव पर आपत्ति जताई गई। इसी सैद्धांतिक टकराव के परिणामस्वरूप 6 अप्रैल 1980 को नई दिल्ली के कोटला मैदान में भारतीय जनता पार्टी का औपचारिक गठन हुआ। पार्टी ने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई और राष्ट्रवाद के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

अटल जी का वह ऐतिहासिक भाषण: “अंधेरा छंटेगा, कमल खिलेगा”

पार्टी के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन में अटल बिहारी वाजपेयी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। उसी मंच से अटल जी ने वे कालजयी शब्द कहे थे, “अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।” शुरुआती दौर में पार्टी को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सिमटकर मात्र 2 सीटों पर रह गई थी, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी ने अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया।

एकात्म मानववाद और राम रथ यात्रा का दौर

भाजपा की मूल विचारधारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अंत्योदय’ (समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान) पर टिकी है। 1990 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी की ‘राम रथ यात्रा’ ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी और भाजपा को राष्ट्रीय राजनीति के मुख्य केंद्र में ला खड़ा किया। 1996 में भाजपा पहली बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और फिर 1998 से 2004 के बीच अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पोखरण परमाणु परीक्षण और स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओं से देश को नई शक्ति दी।

2014 का चुनाव: भाजपा के इतिहास का टर्निंग पॉइंट

2014 के आम चुनाव भाजपा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुए। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने पहली बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सत्ता संभाली। इसके बाद 2019 और 2024 के चुनावों में भी भाजपा ने अपनी सफलता को और बड़े जनादेश के साथ दोहराया। इस कालखंड में अनुच्छेद 370 की समाप्ति, भव्य राम मंदिर का निर्माण और डिजिटल इंडिया जैसे क्रांतिकारी फैसलों ने भाजपा के वैचारिक एजेंडे को धरातल पर उतारा।

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी और ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 18 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ भाजपा आज दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन है। इसका मजबूत ढांचा बूथ स्तर तक फैला हुआ है, जो इसकी सबसे बड़ी संगठनात्मक शक्ति है। आज भाजपा न केवल केंद्र में, बल्कि देश के एक बड़े भू-भाग पर शासन कर रही है। पार्टी अब अपने अगले बड़े लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’ की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसमें भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प निहित है।

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