LPG Price Hike : ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चूलें हिला दी हैं। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा और सबसे घातक असर भारत में एलपीजी (LPG) की कीमतों पर पड़ा है। पिछले दो महीनों से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है, जिससे व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा हुआ है।
LPG Price Hike : 1 मई से कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी
मई महीने की पहली तारीख को ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने उपभोक्ताओं को महंगाई का बड़ा झटका दिया है। इंडियन ऑयल (IOCL) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ₹993 की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। यह बढ़ोत्तरी होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए किसी आपदा से कम नहीं है। अब राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर ₹3,071.50 का हो गया है, जबकि मुंबई में यह ₹3,024 की दर पर बिक रहा है। कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी कीमतें ₹3,200 के पार जा चुकी हैं।
LPG Price Hike : घरेलू रसोई के लिए फिलहाल राहत की खबर
एक ओर जहां व्यापारिक सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी आई है, वहीं 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं के लिए खबर थोड़ी सुकून देने वाली है। सरकार ने फिलहाल घरेलू सिलेंडर की कीमतों को स्थिर रखा है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर आज भी ₹913 की पुरानी दर पर मिल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही यह आंशिक राहत भी छिन सकती है।
युद्ध शुरू होने के बाद से कीमतों का सफर
28 फरवरी से शुरू हुए ईरान-अमेरिका तनाव के बाद से एलपीजी की कीमतों में सिलसिलेवार इजाफा हुआ है। मार्च 2026 से अब तक का विश्लेषण करें तो कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कुल ₹1,330 से ₹1,340 तक की वृद्धि हो चुकी है। 1 मार्च को मामूली बढ़ोत्तरी के बाद 7 मार्च को ₹114.50 और 1 अप्रैल को ₹200 तक की वृद्धि हुई थी। इसके विपरीत, घरेलू सिलेंडर के दामों में इस पूरी अवधि के दौरान केवल एक बार (7 मार्च को) ₹60 की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके बाद कीमतें अपरिवर्तित हैं।
जमाखोरी पर लगाम और भविष्य की आशंकाएं
बाजार में बढ़ती अस्थिरता और युद्ध की आहट के बीच मार्च के महीने में कई शहरों से एलपीजी की कालाबाजारी और जमाखोरी की खबरें सामने आईं। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए सरकार ने गैस बुकिंग के नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। ऊर्जा विशेषज्ञों की मानें तो होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कि कच्चे तेल के परिवहन का मुख्य रास्ता है, अगर वहां आवाजाही और बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारत में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव और बढ़ना तय है। फिलहाल, कमर्शियल गैस की महंगाई ने खाद्य पदार्थों की कीमतों को बढ़ाने का आधार तैयार कर दिया है।
