Headline
CM Yogi on Congress
CM Yogi on Congress: योगी ने कांग्रेस से मांगा आपातकाल पर माफी का जवाब, विपक्ष पर साधा निशाना
Critical Minerals Scheme
Critical Minerals Scheme: लिथियम-निकेल के लिए मोदी सरकार का बड़ा दांव, 2814 करोड़ की योजना मंजूर
Strait of Hormuz
Strait of Hormuz: ईरान ने भारतीय जहाजों को दी बड़ी राहत, होर्मुज में मिली छूट
Modi Cabinet Decisions
Modi Cabinet Decisions: मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाने के लिए 850 अदालतें होंगी मजबूत
RSS Reservation Stand : दत्तात्रेय होसबाले का आरक्षण, हिंदुत्व और RSS पंजीकरण पर बड़ा बयान, जानिए संघ का रुख
Himanta Biswa Sarma
Himanta Biswa Sarma : हिमंता सरमा का राहुल पर हमला, राम मंदिर-वोट चोरी पर तीखे बयान
Supreme Court on Reserved Seats
Supreme Court on Reserved Seats: विधानसभा की आरक्षित सीटों पर क्यों नहीं होता रोटेशन, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
Agniveer Scheme Update
Agniveer Scheme Update: अग्निवीरों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, सेवा अवधि और नियमित सैनिक बनने का मौका बढ़ा
BJP Congress Clash
BJP Congress Clash : राहुल गांधी की बहस चुनौती पर भड़के किरेन रिजिजू, इस्लामी कट्टरपंथ से की तुलना

Shravan Amavasya 2026: सावन अमावस्या कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा के नियम

Shravan Amavasya 2026

Shravan Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कुल 12 अमावस्या तिथियां आती हैं, जिनमें हर एक का अपना अलग और विशेष धार्मिक महत्व होता है। वर्तमान समय में देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र सावन का महीना चल रहा है। इस दौरान पड़ने वाली अमावस्या तिथि को श्रावण अमावस्या या हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण अमावस्या के पावन दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु, भगवान शिव, माता पार्वती, पीपल के पेड़ और पवित्र तुलसी के पौधे की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।

इसके अलावा, इस विशेष दिन पर अपने दिवंगत पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-पाठ, तर्पण और पिंडदान कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने, किसी पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लगाने और जरूरतमंद गरीबों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इससे घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कुंडली का अशुभ पितृ दोष भी समाप्त हो जाता है।

सावन अमावस्या 2026 की सही तिथि और भ्रम की स्थिति

इस बार सावन अमावस्या की सटीक तिथि को लेकर लोगों के मन में थोड़ा संशय और भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, क्योंकि कुछ लोग 12 अगस्त तो कुछ लोग 13 अगस्त को पर्व मनाने की चर्चा कर रहे थे। लेकिन द्रिक पंचांग की सटीक गणना के अनुसार, साल 2026 में सावन महीने का आरंभ 30 जुलाई को हुआ था और इसका समापन 28 अगस्त को होना तय है।

इसी बीच, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 12 अगस्त 2026 की सुबह 1 बजकर 52 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि इसी दिन यानी 12 अगस्त 2026 को रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त भी हो जाएगी। उदयातिथि और पूरे दिन की उपलब्धता के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि इस बार 12 अगस्त 2026, दिन बुधवार को ही सावन अमावस्या मनाना पूरी तरह से शास्त्रसम्मत और शुभ रहेगा। यह पावन पर्व इस बार चातुर्मास के 19वें दिन मनाया जाएगा।

हरियाली अमावस्या और पूर्ण सूर्य ग्रहण का विशेष संयोग

तारीख 12 अगस्त 2026 कई मायनों में बेहद खास और अद्भुत संयोग लेकर आ रही है। इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या होने के कारण इसे श्रावण अमावस्या के रूप में मनाया जा रहा है, जिसे देश के कई हिस्सों में हरियाली अमावस्या, आदि अमावस्या और दर्श अमावस्या जैसे विभिन्न नामों से भी पुकारा जाता है। इस दिन पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने का भी विशेष विधान है। सबसे खास बात यह है कि श्रावण अमावस्या के इस पावन और पवित्र दिन एक पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लग रहा है, हालांकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल या धार्मिक प्रभाव यहां मान्य नहीं होगा, फिर भी इस दिन का खगोलीय और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक बना हुआ है।

श्रावण अमावस्या 2026 के प्रमुख शुभ मुहूर्त और पूजा समय

द्रिक पंचांग की विधिवत गणना के अनुसार, सावन अमावस्या के दिन यानी 12 अगस्त को सूर्योदय प्रातः 05 बजकर 49 मिनट पर होगा। दिनभर के अन्य शुभ और महत्वपूर्ण मुहूर्तों की बात करें तो, इसका अत्यंत पवित्र ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर सुबह 05 बजकर 06 मिनट तक रहने वाला है, जो साधना और पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसके साथ ही, सायाह्न सन्ध्या का समय शाम 07 बजकर 03 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, इस विशेष दिन पर कोई अभिजित मुहूर्त नहीं है, इसलिए श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार सुबह से लेकर रात तक कभी भी स्नान, दान, भगवान शिव की आराधना और पितृ पूजन के कार्य संपन्न कर सकते हैं।

Read More :BJP Mangal Milan Meeting: मांडविया ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, UPA पर साधा निशाना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
मिट्टी के दीयों से क्यों रोशन करते हैं घर? जानें इसका महत्व गुलमर्ग से औली तक, न्यू ईयर पर इन जगहों का करें दीदार कभी दाल में पानी मिलाकर खाते थे शाहरुख खान विंटर में स्टाइलिश दिखना है तो लेयरिंग के ये नियम जान लें क्या रोज चिया सीड्स खाना फायदेमंद है?