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मिर्गी पर कंट्रोल कैसे करें? जानें जीवनशैली और भोजन के असरदार टिप्स

मिर्गी पर कंट्रोल कैसे करें? जानें जीवनशैली और भोजन के असरदार टिप्स

मिर्गी (Epilepsy) एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों में गड़बड़ी आ जाती है। यह गड़बड़ी दौरे (Seizures) के रूप में प्रकट होती है, जो व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। इस लेख में हम मिर्गी के कारण, लक्षण, और डाइट से इसके संबंध की चर्चा कर रहे हैं।

मिर्गी के दौरे क्यों आते हैं?

मिर्गी के दौरे तब आते हैं जब मस्तिष्क की कोशिकाएं अचानक और अत्यधिक विद्युत संकेत भेजने लगती हैं। इसका कारण मस्तिष्क में जन्म से हुई गड़बड़ी, सिर पर चोट, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर या संक्रमण हो सकता है। कुछ मामलों में जेनेटिक फैक्टर भी इसका कारण बनते हैं। दौरे किसी भी उम्र में हो सकते हैं और इनकी अवधि कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक हो सकती है। दौरे के समय व्यक्ति को झटके आना, होश खो देना, आँखें पलटना, मुँह से झाग आना या बेहोशी जैसे लक्षण नजर आते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर हो सकती है।

क्या डाइट मिर्गी को प्रभावित करती है?

हां, कई रिसर्च यह सिद्ध कर चुकी हैं कि मिर्गी के रोगियों के लिए डाइट का बहुत बड़ा प्रभाव होता है। खासकर कीटो डाइट (Ketogenic Diet) को मिर्गी नियंत्रित करने में प्रभावी माना गया है। यह हाई फैट, लो कार्ब डाइट होती है, जो शरीर में कीटोन बॉडीज बनाती है। ये कीटोन शरीर को ऊर्जा देती हैं और मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को स्थिर करती हैं। इसके अलावा, विटामिन B6, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार भी मस्तिष्क की सेहत के लिए जरूरी हैं। अधिक शुगर, कैफीन, प्रोसेस्ड फूड और एल्कोहल से बचाव की सलाह दी जाती है।

क्या कहते हैं न्यूरोलॉजिस्ट?

न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, मिर्गी एक गंभीर लेकिन कंट्रोल में रहने वाली स्थिति है। डॉ. के अनुसार, मिर्गी के दौरे नियमित दवाओं और सही जीवनशैली से रोके जा सकते हैं। वह कहते हैं कि मिर्गी के हर मरीज का दौरा अलग तरह का होता है, इसलिए इलाज भी व्यक्ति विशेष के अनुसार तय होना चाहिए। एक्सपर्ट यह भी बताते हैं कि तनाव, नींद की कमी, असंतुलित डाइट और अनियमित दिनचर्या मिर्गी के दौरे को बढ़ा सकती है। नियमित मेडिकल चेकअप, दवाओं का सही समय पर सेवन और डाइट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

मिर्गी में दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?

मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति के लिए एक संतुलित और अनुशासित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक होती है। सबसे पहले, रोजाना पूरी नींद (7-8 घंटे) लेना जरूरी है क्योंकि नींद की कमी से दौरे की आशंका बढ़ जाती है। भोजन समय पर लेना, हल्की योग क्रिया और ध्यान करने की आदत डालनी चाहिए। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन का अधिक उपयोग करने से भी बचना चाहिए क्योंकि ये ब्रेन की एक्टिविटी को उत्तेजित कर सकते हैं। दौरे की स्थिति में पहले से फैमिली को जानकारी होनी चाहिए कि क्या करना है। यात्रा या अकेले रहने से पहले हमेशा दवाइयां साथ रखें।

किन चीजों से बचना चाहिए?

मिर्गी के मरीजों को कुछ विशेष चीजों से बचने की सख्त सलाह दी जाती है। सबसे पहले, एल्कोहल और कैफीन मस्तिष्क को उत्तेजित करते हैं, इसलिए इनका सेवन बिल्कुल न करें। प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक और शक्कर वाले पदार्थ दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। ज्यादा तेज रोशनी, तेज आवाज या स्ट्रेस वाली परिस्थितियाँ भी दौरे को बढ़ा सकती हैं। तेज गंध वाले परफ्यूम या अगरबत्ती जैसे पदार्थों से भी परहेज करना चाहिए। इसके अलावा, दवाओं को कभी भी अपने मन से बंद न करें और डॉक्टर की सलाह से ही किसी तरह का बदलाव करें।

मानसिक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान

मिर्गी केवल शारीरिक नहीं, मानसिक रूप से भी प्रभावित करती है। कई मरीजों में डर, शर्म, सामाजिक दूरी और डिप्रेशन देखने को मिलते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सजग रहना जरूरी है। नियमित ध्यान (Meditation), सकारात्मक सोच और परिवार का सहयोग मानसिक स्थिति को बेहतर बनाता है। मानसिक दबाव से दूर रहने के लिए मनपसंद शौक अपनाएं और नियमित रूप से किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने और आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए सपोर्ट ग्रुप्स का हिस्सा भी बन सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Ashwagandha with Milk: आयुर्वेदिक टॉनिक से बढ़ाएं इम्युनिटी और ताकत

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