Lung Health Tips : देश का एक बड़ा हिस्सा इस समय रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की चपेट में है। कई जिलों में तापमान का पारा 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिसके कारण लोग दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज कर रहे हैं। ऐसे दमनकारी मौसम में बढ़ती गर्मी सिर्फ शारीरिक असहजता ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि यह इंसानी फेफड़ों (Lungs) की सेहत के लिए भी एक बहुत बड़ा खतरा बनती जा रही है।
चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों के मुताबिक, जो लोग पहले से ही अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), गंभीर एलर्जी और अन्य सांस संबंधी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए तेज गर्मी और अत्यधिक उमस गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है। आसमान से बरसती आग, हवा में बढ़ती नमी, प्रदूषण का स्तर, धूल के गुबार, सूक्ष्म कण और जहरीला स्मॉग मिलकर फेफड़ों के श्वसन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे मरीजों में सांस लेने की दिक्कत अचानक बढ़ जाती है और रेस्पिरेटरी अटैक का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
बढ़ते तापमान से श्वसन प्रणाली और फेफड़ों की कार्यक्षमता पर असर
अत्यधिक गर्मी केवल मानव शरीर का बाहरी तापमान ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह सीधे तौर पर फेफड़ों के काम करने की आंतरिक क्षमता, रक्त में ऑक्सीजन के स्तर और एयरवे इंफ्लेमेशन (सांस की नली में सूजन) को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति में हमारा शरीर खुद के आंतरिक तापमान को सामान्य और ठंडा बनाए रखने के लिए सामान्य से बहुत ज्यादा मेहनत करता है।
इस अतिरिक्त शारीरिक मेहनत के कारण व्यक्ति की हार्ट रेट (दिल की धड़कन) और सांस लेने की गति काफी तेज हो जाती है। हालांकि, पूरी तरह स्वस्थ लोगों को यह स्थिति केवल हल्की बेचैनी या थकान जैसी महसूस हो सकती है, लेकिन अस्थमा और सीओपीडी (COPD) के गंभीर मरीजों में यह नाजुक स्थिति सांस फूलने की समस्या को अचानक बेहद खतरनाक और थका देने वाला बना सकती है।
हवा में अत्यधिक नमी और उमस के कारण सांस की नलियों में जलन
डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों के मौसम में बढ़ने वाली उमस यानी ह्यूमिडिटी इस पूरी समस्या को और ज्यादा बदतर बना देती है। अत्यधिक नमी वाली भारी हवा में सामान्य रूप से सांस लेना भी बहुत मुश्किल महसूस होता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर को खुद को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने में भारी परेशानी होती है। यही नहीं, वायुमंडल में मौजूद ज्यादा नमी अपने साथ हानिकारक प्रदूषण, गाड़ियों के धुएं और एलर्जी पैदा करने वाले पराग कणों को जमीन के करीब ही रोककर रखती है। इसके कारण जब कोई व्यक्ति सांस लेता है, तो ये प्रदूषक तत्व फेफड़ों के अंदर चले जाते हैं और सांस की नलियों में तेज जलन व सूजन को बढ़ा देते हैं।
ग्राउंड लेवल ओजोन और स्मॉग से बढ़ता है खतरनाक अस्थमा अटैक का खतरा
स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गर्मियों के दिनों में, खासतौर पर भारी भीड़भाड़ और ट्रैफिक वाले आधुनिक शहरों में, सूरज की तेज रोशनी के कारण ग्राउंड लेवल ओजोन और हानिकारक स्मॉग बहुत तेजी से बनता है। हवा में मौजूद यह अदृश्य जहर फेफड़ों में पहुंचकर लगातार खांसी, छाती से घरघराहट की आवाज आना, सीने में भारी जकड़न और अचानक अस्थमा अटैक आने का मुख्य कारण बन सकता है। अस्थमा के मरीजों में यह गर्म और उमस भरा मौसम उनके एयरवे को सामान्य से कहीं ज्यादा संवेदनशील बना देता है। वहीं दूसरी ओर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से पीड़ित मरीजों में इसके कारण सांस फूलना, लगातार अनियंत्रित खांसी आना, अत्यधिक शारीरिक थकान और फेफड़ों में गाढ़ा बलगम बनने जैसी गंभीर समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं।
गर्मी के इस मौसम में किन लोगों को रहता है स्वास्थ्य का सबसे ज्यादा जोखिम
वरिष्ठ डॉक्टरों के मुताबिक, इस जानलेवा मौसम में घर के बुजुर्ग, छोटे बच्चे, नियमित धूम्रपान (Smoking) करने वाले लोग, क्रॉनिक हार्ट डिजीज (दिल की बीमारी) से पीड़ित मरीज, बाहर धूप में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर और अत्यधिक प्रदूषित शहरों में रहने वाले आम नागरिक सबसे ज्यादा स्वास्थ्य जोखिम की जद में हैं। जिन लोगों के फेफड़ों की काम करने की क्षमता पहले से ही किसी बीमारी के कारण कमजोर होती है, उन्हें थोड़ी देर की तेज गर्मी भी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में डाल सकती है।
एक्सपर्ट्स ने गंभीर चेतावनी दी है कि अगर किसी व्यक्ति को तेज सांस फूलना, लगातार छाती में घरघराहट, सीने में अत्यधिक जकड़न, सांस की कमी के कारण बात करने में भारी दिक्कत, ऑक्सीजन कम होने से होंठ नीले पड़ना, चक्कर आकर बेहोशी छाना या लगातार सूखी खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें बिना एक पल गंवाए तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय रहते सही इलाज मिलने से मरीज को किसी भी गंभीर व जानलेवा स्थिति से आसानी से बचाया जा सकता है।
भीषण गर्मी में फेफड़ों को सुरक्षित रखने के प्रभावी और जरूरी उपाय
इस जानलेवा गर्मी में अपने फेफड़ों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सलाह दी हैं। सबसे जरूरी यह है कि दोपहर 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक जब धूप सबसे तेज होती है, तब बहुत जरूरी न होने पर घर के अंदर ही रहें। रोजाना सुबह बाहर निकलने से पहले अपने इलाके के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर नजर रखें और ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में आउटडोर गतिविधियों से पूरी तरह बचें।
अपने घर के अंदर की हवा को शुद्ध, साफ और ठंडा रखने के लिए दोपहर के समय खिड़कियां बंद रखें, मोटे पर्दों का इस्तेमाल करें और घर के भीतर धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। डॉक्टरों का कहना है कि लाइफस्टाइल में की गई ये छोटी-छोटी सावधानियां गर्मियों के इस क्रूर मौसम में आपके फेफड़ों को पूरी तरह सुरक्षित और सेहतमंद रखने में सबसे बड़ी और कारगर भूमिका निभा सकती हैं।
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