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Kakoli Ghosh Dastidar : काकोली घोष दस्तीदार बनीं NCPI अध्यक्ष, TMC के 20 बागी सांसदों के विलय की जानकारी EC को

Kakoli Ghosh Dastidar

Kakoli Ghosh Dastidar : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 20 बागी सांसदों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में अपने गुट के पूर्ण विलय का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस संबंध में सभी बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से विशेष मुलाकात की और उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपकर संसद में टीएमसी से अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की। इस घोषणा के तुरंत बाद, सोमवार को एनसीपीआई ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर टीएमसी के बागी धड़े के विलय और काकोली घोष को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की विधिवत जानकारी साझा कर दी है।

पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी ने काकोली को सौंपी पार्टी की कमान

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस पूरे विलय को लेकर एनसीपीआई के भीतर किसी भी प्रकार के भ्रम या मतभेद की स्थिति नहीं है। पार्टी की निवर्तमान अध्यक्ष शिउली कुंडू ने बीते 28 मई 2026 को ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, काकोली घोष दस्तीदार ने 18 मई 2026 को ही लोकसभा स्पीकर को टीएमसी से अलग गुट बनाने का पत्र भेज दिया था। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद, एनसीपीआई की राजनीतिक मामलों की समिति (पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी) ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई और 31 मई को सर्वसम्मति से काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी का नया निर्वाचित अध्यक्ष घोषित कर दिया।

वकील शिउली कुंडू ने साल 2022 में रखी थी एनसीपीआई की नींव

इस नई और क्षेत्रीय पार्टी के इतिहास पर नजर डालें तो हावड़ा की रहने वाली और पेशे से वकील शिउली कुंडू समेत तीन प्रमुख लोगों ने मिलकर ‘NCPI’ नाम से इस राजनीतिक दल की शुरुआत की थी। मीडिया के तीखे सवालों का जवाब देते हुए शिउली कुंडू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने साल 2022 में इस पार्टी की स्थापना हावड़ा के संकराइल क्षेत्र में की थी। इस छोटी सी पार्टी ने साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसी वर्ष पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों में भी अपने प्रत्याशी खड़े किए थे। शिउली कुंडू इस दल की संस्थापक अध्यक्ष थीं, जबकि सैकत दास को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

निजी कारणों से दिया इस्तीफा, हावड़ा में केंद्रीय बल तैनात

शिउली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू भी इस राजनीतिक दल के एक सक्रिय सदस्य थे। शिउली ने बताया कि उन्होंने पूरी तरह से अपने व्यक्तिगत कारणों और सामाजिक कार्यों में व्यस्तता की वजह से लगभग एक महीने पहले ही अध्यक्ष पद से दूरी बना ली थी। उन्होंने कहा कि वह एक वकील हैं और मुख्य रूप से महिलाओं के अधिकारों के लिए सामाजिक कार्य करना चाहती हैं। जब उन्हें पता चला कि टीएमसी के 20 दिग्गज सांसद उनकी बनाई पार्टी में शामिल हो रहे हैं, तो उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी पार्टी एक बड़े मुकाम पर पहुंच रही है। इस बीच, सुरक्षा के मद्देनजर सोमवार को हावड़ा स्थित पार्टी के पंजीकृत कार्यालय पर भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती देखी गई।

टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने विलय की कानूनी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने इस पूरे विलय की वैधानिकता और प्रक्रिया पर गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ये सांसद एक पार्टी के टिकट पर जीतकर आए, फिर दूसरी पार्टी के बड़े नेताओं के आवास पर जाकर गुप्त बैठकें कीं, और अचानक एक तीसरी ही पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर दी। कुणाल घोष ने तंज कसते हुए कहा कि भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐसा अजीबोगरीब काम पहले कभी नहीं देखा गया है, जहां पूरी प्रक्रिया ही संदेहास्पद नजर आ रही है।

पर्दे के पीछे की बैठकों और मध्यस्थता को लेकर दागे कई तीखे सवाल

कुणाल घोष ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस तीसरी पार्टी (NCPI) में शामिल होने का ऐलान इन बागी सांसदों ने किसी दूसरी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करने के बाद स्वयं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पहली पार्टी के बागी गुट और दूसरी पार्टी के बीच हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में तीसरी पार्टी का कोई भी आधिकारिक पदाधिकारी मौजूद था? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस विलय के लिए दूसरी पार्टी ने खुद इन सांसदों के लिए सीटें बुक की थीं? कुणाल घोष के मुताबिक, पहली पार्टी के किसी धड़े को तीसरी पार्टी में शामिल करने के लिए न तो कोई हाथ मिलाया गया, न कोई झंडा दिखाया गया और न ही कोई संयुक्त तस्वीर सामने आई, जो कि बेहद अजीब और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है।

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