Cervical Pain and Brain : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और घंटों स्क्रीन के सामने बैठने की मजबूरी ने ‘सर्वाइकल पेन’ यानी गर्दन के दर्द को एक घरेलू समस्या बना दिया है। चाहे दफ्तर में कंप्यूटर पर काम करना हो या गर्दन झुकाकर मोबाइल का इस्तेमाल, ये आदतें हमारी रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से पर बुरा दबाव डालती हैं। अक्सर सर्वाइकल से पीड़ित लोग यह शिकायत करते हैं कि दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे सिर के पीछे के हिस्से में भी फैलने लगता है। ऐसे में लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि क्या गर्दन का यह विकार उनके दिमाग या नर्वस सिस्टम को कोई स्थाई नुकसान पहुँचा सकता है।
Cervical Pain and Brain : विशेषज्ञ की राय: क्या वास्तव में दिमाग पर पड़ता है असर?
दिल्ली के प्रतिष्ठित जीबी पंत अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी, डॉ. दलजीत सिंह इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की स्थिति में गर्दन की हड्डियों (Vertebrae) और डिस्क में घिसाव या बदलाव आने लगते हैं। चूँकि गर्दन की नसें सीधे तौर पर मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों को जोड़ने वाले तंत्र का हिस्सा हैं, इसलिए जब इन नसों पर दबाव पड़ता है, तो वह खिंचाव सिर तक महसूस होता है। हालांकि, वे आश्वस्त करते हैं कि सर्वाइकल के कारण दिमाग को कोई सीधा ‘डैमेज’ या स्थाई न्यूरोलॉजिकल बीमारी नहीं होती, लेकिन इसके लक्षण मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं जैसे ही महसूस होते हैं।
Cervical Pain and Brain : खतरनाक लक्षणों की पहचान: जब दर्द सिर की ओर बढ़ने लगे
डॉक्टर बताते हैं कि कुछ विशिष्ट लक्षण संकेत देते हैं कि सर्वाइकल का दबाव बढ़ रहा है। यदि आपको बार-बार सिरदर्द होता है, सिर में भारीपन महसूस होता है—विशेषकर गर्दन और खोपड़ी के मिलन स्थल पर—तो यह सर्वाइकल की गंभीरता का संकेत है। इसके अलावा, अचानक बहुत हल्के चक्कर आना (Dizziness) भी इसी का एक हिस्सा है। कई मरीज इसे सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक नसों पर बना यह दबाव माइग्रेन जैसे गंभीर सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है, जो व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
जोखिम वाले समूह: किन लोगों को है अधिक सावधानी की जरूरत?
सर्वाइकल की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ विशेष समूह इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
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डेस्क जॉब वाले: जो लोग लगातार 8-9 घंटे बिना ब्रेक लिए कुर्सी पर बैठते हैं।
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वाहन चालक: रोजाना लंबी दूरी तक बाइक या भारी वाहन चलाने वाले लोग।
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पोषण की कमी: शरीर में विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी होने से हड्डियाँ और नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे दर्द बढ़ जाता है।
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स्मार्टफोन यूजर: गर्दन झुकाकर लंबे समय तक मोबाइल देखने वाले लोग (Text Neck Syndrome)।
बचाव के आसान उपाय: छोटे बदलाव लाएंगे बड़ा सुधार
सर्वाइकल और उससे होने वाले सिरदर्द से बचने के लिए डॉ. दलजीत सिंह कुछ सरल लेकिन प्रभावी सुझाव देते हैं। सबसे पहले, अपने आहार में सुधार करें और चेकअप करवाएं कि कहीं विटामिन डी और बी12 की कमी तो नहीं है। यदि आप डेस्क जॉब में हैं, तो हर 30-40 मिनट में अपनी सीट से उठें और थोड़ा टहलें। अपने कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन को हमेशा आँखों के लेवल (Eye Level) पर रखें ताकि गर्दन को झुकना न पड़े। इसके अलावा, नियमित रूप से गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज करें। याद रखें, प्रारंभिक अवस्था में बरती गई सावधानी आपको भविष्य की जटिलताओं और भारी दवाओं से बचा सकती है।
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