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Summer Fever: क्यों तप रहा है आपके बच्चे का शरीर? जानें गर्मियों में बुखार के पीछे का सच

Summer Fever

Summer Fever: तपती गर्मी और चढ़ता पारा न केवल बड़ों को बेहाल करता है, बल्कि बच्चों की सेहत के लिए भी बड़ी चुनौती पेश करता है। अक्सर देखा जाता है कि गर्मियों के मौसम में बच्चों को बार-बार बुखार आने की समस्या सताने लगती है। इस दौरान शरीर का तापमान बढ़ना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती, पसीना आना, चिड़चिड़ापन और भूख में कमी जैसे लक्षण आम हो जाते हैं। कुछ मामलों में बच्चों को उल्टी या हल्का डायरिया भी परेशान कर सकता है। विशेषकर उन बच्चों में यह जोखिम अधिक होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर होती है या जो स्कूल जाने वाले और बाहर धूप में ज्यादा खेलने वाले बच्चे हैं।

Summer Fever: बच्चों में बुखार के लक्षण और शुरुआती संकेत

जब गर्मी का प्रभाव शरीर पर पड़ता है, तो बच्चा सुस्त दिखाई देने लगता है। शरीर में पानी की कमी और बाहरी संक्रमण के कारण सिरदर्द और बदन दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। माता-पिता अक्सर इसे सामान्य मौसमी बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार आने वाला बुखार इस बात का संकेत है कि बच्चे का शरीर किसी आंतरिक परेशानी या संक्रमण से जूझ रहा है। साफ-सफाई की कमी और दूषित खान-पान इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में लक्षणों को पहचान कर तुरंत सावधानी बरतना अनिवार्य है।

Summer Fever: आखिर क्यों आता है गर्मियों में बार-बार बुखार?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एचओडी डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, बढ़ता तापमान बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। गर्मी में संक्रमण का खतरा बढ़ने का मुख्य कारण बच्चों का बाहर धूप, धूल और प्रदूषित हवा के संपर्क में आना है। पसीने के माध्यम से शरीर से तरल पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे ‘डिहाइड्रेशन’ की स्थिति पैदा होती है। पानी की भारी कमी शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप बुखार आने लगता है।

खान-पान और लाइफस्टाइल का बढ़ता प्रभाव

आजकल बच्चों में जंक फूड का बढ़ता चलन और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने की आदत उनकी सेहत बिगाड़ रही है। असंतुलित आहार सीधे तौर पर इम्यूनिटी को कमजोर करता है, जिससे छोटे संक्रमण भी बार-बार बुखार का रूप ले लेते हैं। जब शरीर अंदर से मजबूत नहीं होता, तो वह बाहरी गर्मी और कीटाणुओं का सामना नहीं कर पाता। यही वजह है कि गर्मियों के तीन-चार महीनों में बच्चों के बीमार पड़ने की दर काफी बढ़ जाती है।

संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

बच्चों को इस मौसम में सुरक्षित रखने का सबसे पहला मंत्र है— ‘हाइड्रेशन’। उन्हें दिन भर थोड़ा-थोड़ा करके पर्याप्त पानी, नींबू पानी या नारियल पानी पिलाते रहें। खेलने का समय बदलें; उन्हें दोपहर की तेज धूप के बजाय सुबह जल्दी या शाम को सूरज ढलने के बाद ही बाहर भेजें। इसके अलावा, बच्चों को हल्का, सुपाच्य और घर का बना पौष्टिक खाना दें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे— हाथ धोना और पसीने से भीगे कपड़े तुरंत बदलना, इंफेक्शन को रोकने में कारगर साबित होते हैं।

कब लें डॉक्टर की सलाह और कैसे करें देखभाल?

अगर बुखार के साथ बच्चा बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस कर रहा है, उसे लगातार उल्टियां हो रही हैं या तेज सिरदर्द है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। ये लक्षण किसी गंभीर संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं। घर का वातावरण ठंडा और हवादार रखें, लेकिन ध्यान रहे कि एसी या कूलर की एकदम सीधी और बर्फीली हवा से भी बच्चे को बचाएं। उनकी डाइट में मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा शामिल करें। सही समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित आराम बच्चे को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है।

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