उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) एक “साइलेंट किलर” है जिसे अगर समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी से हार्ट फेल्योर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और क्रोनिक किडनी रोग जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 30 से 79 वर्ष की आयु के लगभग 1.28 बिलियन (1 अरब 28 करोड़) व्यस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। इनमें से दो-तिहाई लोग निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों में रहते हैं, जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 46 प्रतिशत व्यस्कों को यह तक नहीं पता कि उन्हें हाई बीपी है। और केवल 42 प्रतिशत लोगों का ही उचित निदान व इलाज हो पाता है। शेष लोग अस्पताल या डॉक्टर तक पहुंच ही नहीं पाते, जिससे उनकी हालत गंभीर हो सकती है।
WHO ने 2010 से 2030 तक उच्च रक्तचाप की दर को 33 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है, ताकि इससे होने वाली अकाल मृत्यु दर को घटाया जा सके।
हाई बीपी तब होता है जब रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव 140/90 mmHg या उससे अधिक होता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। चूंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए इसका पता लगाना मुश्किल होता है। समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच ही इसका एकमात्र भरोसेमंद तरीका है।
इसलिए जरूरी है कि हम हाई बीपी को गंभीरता से लें, नियमित जांच कराएं और जीवनशैली में सुधार लाएं।
