Ice Cream Side Effects : भीषण और चिलचिलाती गर्मियों के मौसम में शरीर को राहत और जीभ को स्वाद देने के लिए अधिकांश लोग आइसक्रीम खाना बेहद पसंद करते हैं। ठंडी-ठंडी आइसक्रीम न केवल तात्कालिक रूप से शरीर को शीतलता प्रदान करती है, बल्कि मूड को भी तरोताजा कर देती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए इसका अंधाधुंध सेवन करना सही नहीं माना जाता है। आइसक्रीम के निर्माण में भारी मात्रा में रिफाइंड चीनी, अनहेल्दी फैट और अत्यधिक कैलोरी का उपयोग किया जाता है। यह संयोजन कुछ खास तरह की शारीरिक समस्याओं या बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
केवल डायबिटीज ही नहीं, अन्य कई पुरानी बीमारियों में भी है यह हानिकारक
आमतौर पर यह माना जाता है कि केवल डायबिटीज यानी मधुमेह के मरीजों को ही मीठे और आइसक्रीम से परहेज करना चाहिए या इसे बेहद सीमित मात्रा में खाना चाहिए। परंतु, चिकित्सा विज्ञान के अनुसार केवल शुगर ही ऐसी स्थिति नहीं है जिसमें आइसक्रीम नुकसानदेह हो। कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों में आइसक्रीम का सेवन पाचन तंत्र की खराबी, तेजी से वजन बढ़ना और पुरानी बीमारियों के लक्षणों को अचानक से भड़का सकता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी पुरानी या क्रोनिक बीमारी से ग्रसित है, तो उसके शरीर पर आइसक्रीम में मौजूद तत्वों का नकारात्मक असर बहुत जल्दी और स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है।
जानिए आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार किन मरीजों को रहना चाहिए दूर
नई दिल्ली स्थित प्रसिद्ध आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने इस विषय पर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि केवल डायबिटीज ही नहीं, बल्कि फैटी लिवर, अत्यधिक मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, लैक्टोज इनटॉलरेंस और क्रोनिक एसिडिटी जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों को आइसक्रीम खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। फैटी लिवर की स्थिति में आइसक्रीम की अत्यधिक चीनी और वसा लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे सूजन बढ़ सकती है। वहीं, मोटापे से परेशान लोगों में इसमें मौजूद भारी कैलोरी वजन को अनियंत्रित कर देती है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल और लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले मरीजों की बढ़ सकती है आंतों की समस्या
डॉक्टरों के मुताबिक, हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए आइसक्रीम में पाई जाने वाली सैचुरेटेड फैट की उच्च मात्रा रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज का कारण बन सकती है। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस (दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी) की शिकायत होती है, उन्हें आइसक्रीम खाते ही पेट फूलना, गैस बनना, मरोड़ उठना और दस्त जैसी तीव्र समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गंभीर एसिडिटी और कमजोर पाचन क्रिया वाले लोगों के लिए भी ऐसी अत्यधिक ठंडी और भारी चीजें आंतों की कार्यप्रणाली को धीमा कर देती हैं, जिससे पेट में भारीपन और असहजता काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
ब्लड शुगर में अचानक उछाल और पाचन तंत्र पर पड़ता है विपरीत प्रभाव
अगर सामान्य तौर पर भी आइसक्रीम का जरूरत से ज्यादा सेवन किया जाए, तो यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसके लगातार सेवन से रक्त में ग्लूकोज का स्तर अचानक से बढ़ जाता है, जो इंसुलिन के संतुलन को बिगाड़ता है। यह शरीर में चर्बी को जमा कर वजन बढ़ाता है और पाचन रस के स्राव को बाधित करता है। कुछ लोगों में इसके तुरंत बाद गैस, गंभीर पेट दर्द और सीने में जलन की समस्या देखी गई है। इसलिए, किसी भी व्यक्ति को अपनी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी के इतिहास को ध्यान में रखकर ही इसके सेवन का फैसला करना चाहिए।
गर्मियों में आइसक्रीम के स्थान पर अपनाएं ये स्वास्थ्यवर्धक और ठंडे विकल्प
यदि आप गर्मियों में अपनी सेहत से समझौता किए बिना ठंडक और स्वाद दोनों चाहते हैं, तो आइसक्रीम की जगह कई बेहतरीन और प्राकृतिक विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ आइसक्रीम के स्थान पर घर का बना हुआ फ्रेश दही, बिना अतिरिक्त चीनी के तैयार की गई ताजे फलों की स्मूदी या फ्रोजन योगर्ट खाने की सलाह देते हैं। ये विकल्प न केवल आपकी मीठे की तलब को शांत करते हैं, बल्कि शरीर को आवश्यक प्रोबायोटिक्स और पोषण भी देते हैं। इसके अलावा, नारियल पानी, पुदीने वाली छाछ और फलों से बने प्राकृतिक शर्बत गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड और अंदर से ठंडा रखने में सबसे मददगार साबित होते हैं।
