Petrol-Diesel Price : देश की जनता जिस महंगाई के डर से सहमी हुई थी, आखिरकार वही हुआ। लंबे समय के इंतजार के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। इस वृद्धि के बाद अब आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।
राजधानी दिल्ली में तेल के नए रेट: अब कितनी खाली होगी आपकी जेब?
देश की राजधानी दिल्ली में इस बढ़ोतरी के बाद ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। अब दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल खरीदने के लिए आपको 97.91 रुपये चुकाने होंगे, जबकि डीजल की कीमत अब 90.78 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पिछले लगभग 4 वर्षों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं, लेकिन वैश्विक दबाव के कारण सरकारी कंपनियों को यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: $70 से सीधे $126 के पार पहुँचा भाव
ईंधन की कीमतों में इस अचानक उछाल का सबसे बड़ा कारण ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध है। इस वैश्विक उथल-पुथल ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। कुछ महीने पहले तक जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था, वह अब उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है।
तेल कंपनियों को हो रहा था भारी घाटा: हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, भारत में तेल कंपनियां काफी समय से पुराने रेट पर ही ईंधन बेच रही थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण भारतीय सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। मासिक आधार पर यह घाटा 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुँच चुका था, जिसे देखते हुए कीमतों में संशोधन करना अनिवार्य हो गया था।
पश्चिम एशिया में युद्ध और आपूर्ति का संकट: कब तक रहेगी यह स्थिति?
28 फरवरी को ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से ही पश्चिमी एशिया में ईंधन आपूर्ति में भारी किल्लत देखी जा रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। युद्ध की अनिश्चितता और सप्लाई लाइन कटने की वजह से न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में ईंधन की कमी हो गई है, जिसका सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की थाली और आवाजाही पर पड़ रहा है।
पीएम मोदी की अपील: ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने का समय
देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और रुपये की गिरती कीमत को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से विशेष अपील की है। पीएम ने ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया है ताकि देश की विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके। इसके साथ ही, सरकार ने नागरिकों से सोने की खरीद कम करने और विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए स्थगित करने का सुझाव दिया है।
डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर: अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव
युद्ध और तेल की कीमतों का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। वर्तमान में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर से नीचे गिर गया है। रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट ने आयात को और महंगा कर दिया है। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती मुद्रास्फीति को रोकने और मध्यम वर्ग को राहत देने की है, जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है।
