Empty stomach exercise: खाली पेट जिम (Workout) को “फास्टेड कार्डियो” कहा जाता है। यह तब किया जाता है जब शरीर में भोजन से प्राप्त तात्कालिक ऊर्जा (ग्लूकोज) नहीं होती। इस स्थिति में शरीर ऊर्जा के लिए फैट को जलाना शुरू करता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिल सकती है। यह विधि विशेष रूप से सुबह जल्दी की जाती है जब रातभर उपवास के कारण पेट खाली होता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह तकनीक सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती, और इसके लिए शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
शरीर में एनर्जी की कमी से हो सकती है थकावट
खाली पेट जिम करने से कई बार शरीर में तत्काल ऊर्जा की कमी हो जाती है, जिससे थकावट, चक्कर आना या कमजोरी महसूस हो सकती है। खासकर तब जब वर्कआउट बहुत तीव्र हो। हमारे शरीर को मांसपेशियों को कार्य में लाने के लिए ग्लाइकोजन की आवश्यकता होती है, जो भोजन से प्राप्त होता है। बिना पर्याप्त ईंधन के शरीर थका हुआ महसूस करता है और लंबे समय तक व्यायाम करना कठिन हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि व्यक्ति ऊर्जा से भरपूर नाश्ता करके जिम करें तो प्रदर्शन बेहतर होता है।
मसल लॉस का खतरा बढ़ सकता है
यदि आप लगातार खाली पेट जिम करते हैं, तो शरीर ऊर्जा के लिए फैट के साथ-साथ मांसपेशियों को भी तोड़ सकता है। यह मसल लॉस (muscle loss) की स्थिति होती है, जो वजन घटाने की प्रक्रिया में अवांछनीय है। खासतौर पर वे लोग जो टोनिंग या बॉडी बिल्डिंग करना चाहते हैं, उनके लिए यह नुकसानदेह हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि वर्कआउट से पहले थोड़ी मात्रा में प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट का सेवन मांसपेशियों को बचाता है और शरीर को ऊर्जा देता है।
इंसुलिन और ब्लड शुगर पर प्रभाव
खाली पेट वर्कआउट करने से शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ सकती है, जो कुछ मामलों में फायदेमंद होता है। लेकिन यह ब्लड शुगर लेवल को भी गिरा सकता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया (low sugar) की समस्या हो सकती है। जिन लोगों को डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए खाली पेट जिम करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हेल्थ कंडीशन के अनुसार ही इस प्रकार की ट्रेनिंग को अपनाएं।
फैट लॉस बनाम वजन घटाना-फर्क को समझें
वजन घटाना और फैट लॉस दोनों एक ही बात नहीं हैं। जब आप खाली पेट वर्कआउट करते हैं, तो कुछ मामलों में फैट बर्न अधिक होता है लेकिन वजन में गिरावट नहीं दिखती। वजन पानी की कमी या मसल लॉस से भी घट सकता है, जो नुकसानदेह है। हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि लक्ष्य केवल फैट लॉस होना चाहिए, न कि मांसपेशियों या आवश्यक ऊर्जा का नाश। इसके लिए संतुलित आहार और वर्कआउट का संतुलन जरूरी है।
सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता यह तरीका
हर व्यक्ति की बॉडी टाइप, मेटाबोलिज्म और स्वास्थ्य की स्थिति अलग होती है। कोई व्यक्ति खाली पेट आसानी से 1 घंटे वर्कआउट कर सकता है, तो कोई 15 मिनट में ही थक सकता है। इसलिए खाली पेट जिम करना सभी के लिए सुरक्षित या लाभकारी नहीं होता। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि किसी भी फिटनेस रणनीति को अपनाने से पहले डॉक्टर या फिटनेस ट्रेनर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
हल्का नाश्ता कर जिम जाना बेहतर विकल्प
यदि आप खाली पेट जिम नहीं करना चाहते या आपको कमजोरी लगती है, तो हल्का नाश्ता जैसे केला, मुट्ठीभर ड्रायफ्रूट्स, या ओट्स खाकर वर्कआउट करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है। इससे शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है और मांसपेशियों को भी सुरक्षा मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका वजन घटाने के साथ-साथ परफॉर्मेंस को बेहतर करता है और चोट लगने की संभावना को भी कम करता है।
हार्मोनल बैलेंस पर असर पड़ सकता है
खाली पेट जिम करने से शरीर के कुछ हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं, खासकर कोर्टिसोल और इंसुलिन। कोर्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है, जो फास्टिंग या ऊर्जा की कमी के दौरान अधिक मात्रा में बनता है। इसका अत्यधिक स्तर मांसपेशियों के ब्रेकडाउन, नींद की समस्या और वजन कम होने के बजाय बढ़ने का कारण बन सकता है। महिलाओं में यह हार्मोनल असंतुलन मासिक धर्म अनियमितता या थायराइड समस्याओं को भी जन्म दे सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि आप लंबे समय तक बिना खाए एक्सरसाइज करते हैं, तो शरीर के प्राकृतिक हार्मोन चक्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए नियमित व संतुलित भोजन और सही वर्कआउट शेड्यूल जरूरी है।
बायोलॉजिकल क्लॉक के अनुसार जिम करना ज्यादा फायदेमंद
हमारे शरीर की एक जैविक घड़ी (biological clock) होती है, जिसे सर्केडियन रिद्म कहा जाता है। यह तय करता है कि दिन के किस समय शरीर कौन सा कार्य बेहतर करता है। हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि सुबह का समय मेटाबॉलिज्म के लिए अच्छा होता है, लेकिन खाली पेट जिम करना हर किसी के सर्केडियन रिद्म के अनुसार उपयुक्त नहीं होता। कुछ लोग दोपहर या शाम को बेहतर प्रदर्शन करते हैं। अगर आप जबरन खाली पेट सुबह जिम करते हैं और शरीर उसका समर्थन नहीं करता, तो इसका असर आपकी प्रगति पर पड़ सकता है। इसलिए व्यक्तिगत रिद्म को समझकर जिम का समय और भोजन का समय निर्धारित करना चाहिए।
मानसिक एकाग्रता और मूड पर भी होता है प्रभाव
जब आप खाली पेट जिम करते हैं, तो कई बार मानसिक एकाग्रता और मूड पर भी असर पड़ता है। ग्लूकोज की कमी के कारण दिमाग को पूरा ईंधन नहीं मिल पाता, जिससे थकावट, चिड़चिड़ापन, ध्यान में कमी और जल्द थक जाने की समस्या हो सकती है। विशेषकर यदि आपकी वर्कआउट में फोकस, बैलेंस या तेज प्रतिक्रिया की जरूरत होती है, तो खाली पेट ट्रेनिंग नुकसानदायक हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि मानसिक प्रदर्शन और मूड स्थिर रखने के लिए शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलना जरूरी है, ताकि वर्कआउट के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी बना रहे।
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