Sleep Deprivation : अच्छी और पर्याप्त नींद शरीर और दिमाग दोनों के स्वस्थ कामकाज के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। नींद के दौरान शरीर को आराम मिलने के साथ कई जरूरी प्रक्रियाएं भी चलती रहती हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार अपनी जरूरत से कम सोता है, तो इसका असर केवल सुबह उठने के बाद होने वाली थकान तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से ध्यान, याददाश्त, मूड, भूख और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
6 घंटे से कम नींद लेने पर दिमाग पर असर
डॉक्टर आलोक चोपड़ा के मुताबिक, लंबे समय तक छह घंटे से कम सोने की आदत दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। नींद की कमी के कारण व्यक्ति को किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने और सतर्क रहने में परेशानी हो सकती है। लगातार कम नींद लेने पर मानसिक थकान महसूस होने के साथ रोजमर्रा के कामों को पूरा करने में भी मुश्किल आ सकती है।
याददाश्त और जानकारी समझने की क्षमता हो सकती है प्रभावित
नींद दिमाग की उन प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिनके दौरान दिनभर मिली जानकारी को व्यवस्थित और याद रखने में मदद मिलती है। नींद कम होने पर जानकारी को प्रोसेस करने और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा प्रतिक्रिया देने का समय भी धीमा पड़ सकता है, जिससे ड्राइविंग या अन्य ऐसे कामों में सावधानी की जरूरत बढ़ जाती है, जिनमें तुरंत निर्णय लेना पड़ता है।
मूड और भावनाओं पर भी पड़ सकता है असर
नींद की कमी का संबंध मूड में बदलाव से भी जोड़ा जाता है। पर्याप्त नींद न मिलने पर कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव और भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। नींद शरीर और मस्तिष्क की रिकवरी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसलिए लगातार कम सोने से व्यक्ति दिनभर मानसिक और शारीरिक रूप से कम ऊर्जावान महसूस कर सकता है।
हार्मोन और भूख के संतुलन में बदलाव
लगातार नींद पूरी न होने का असर शरीर के हार्मोनल संतुलन पर भी पड़ सकता है। तनाव से जुड़े हार्मोन कोर्टिसोल में बदलाव हो सकता है और भूख से संबंधित संकेत भी प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण व्यक्ति को बार-बार खाने की इच्छा या ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग महसूस हो सकती है। नींद की कमी के कारण खाने के बाद पेट भरा होने का एहसास भी प्रभावित हो सकता है।
ब्लड शुगर और शरीर की रिकवरी पर असर
नींद शरीर की रिकवरी के लिए भी जरूरी है। लगातार कम सोने से शरीर को मांसपेशियों और अन्य ऊतकों की मरम्मत के लिए मिलने वाला समय कम हो सकता है। इसके साथ ही नींद की कमी और शरीर की ग्लूकोज को संभालने की क्षमता के बीच संबंध को लेकर भी वैज्ञानिक शोध हुए हैं। हालांकि, इसका प्रभाव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।
बदलने लगती हैं खाने-पीने की आदतें
कम नींद लेने वाले लोगों में अक्सर तुरंत ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों और अधिक कैलोरी वाले भोजन की इच्छा बढ़ सकती है। थकान से निपटने के लिए कुछ लोग चाय, कॉफी या अन्य कैफीनयुक्त पेय का सेवन बढ़ा देते हैं। अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो नींद का सामान्य पैटर्न और प्रभावित हो सकता है।
कम नींद से बन सकता है थकान का चक्र
नींद की कमी के कारण शरीर में ऊर्जा कम महसूस हो सकती है, जिससे व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करना मुश्किल लग सकता है। इसके बाद थकान, ज्यादा खाने की इच्छा, सुस्ती और खराब नींद एक-दूसरे को प्रभावित करने वाला चक्र बना सकते हैं। इसलिए देर रात तक जागने की आदत को लगातार नजरअंदाज करना उचित नहीं है। नियमित नींद का समय बनाए रखना और पर्याप्त आराम लेना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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