Kiren Rijiju Reaction : पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की हालिया टिप्पणी के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए अंसारी ने एक ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख किया और भारत के लिए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को खतरे के रूप में पेश किए गए एक पुराने कथन का हवाला दिया। उनके बयान के बाद सत्तापक्ष और हिंदू संगठनों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
किरेन रिजिजू ने एक्स पोस्ट के जरिए दी प्रतिक्रिया
अंसारी की टिप्पणी पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने कहा कि यही सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग कट्टरपंथियों, धार्मिक उन्मादियों और अलगाववादियों के मुद्दे पर बात नहीं करते। उनकी यह प्रतिक्रिया अंसारी के भाषण के बाद सामने आई, जिसके बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
वीएचपी प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने भी जताई आपत्ति
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने भी पूर्व उपराष्ट्रपति के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। जैन ने आरोप लगाया कि अंसारी ने एक बार फिर भारत और उसकी परंपराओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को देश के लिए बड़ा खतरा बताने वाला नजरिया उचित नहीं है। यह बयान जैन की ओर से अंसारी की टिप्पणी के जवाब में दिया गया।
जैन ने अंसारी के पुराने बयानों का किया जिक्र
सुरेंद्र जैन ने अपने बयान में हामिद अंसारी की पूर्व टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अंसारी पहले भारत में मुसलमानों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। जैन ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अंसारी के पूर्व रुख का भी हवाला दिया और मौजूदा टिप्पणी की आलोचना की।
एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में क्या बोले अंसारी
हामिद अंसारी ने यह टिप्पणी एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान की। अपने संबोधन में उन्होंने दिवंगत संवैधानिक विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का उल्लेख किया। यह पुस्तक वर्ष 2019 में प्रकाशित हुई थी। अंसारी ने कहा कि किताब के परिचय में नूरानी ने जवाहरलाल नेहरू के एक कथित बयान का संदर्भ दिया था।
नेहरू के कथित कथन का अंसारी ने किया हवाला
अंसारी ने नूरानी की पुस्तक के संदर्भ से बताते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में जवाहरलाल नेहरू ने भारत के लिए खतरे को लेकर अपनी राय रखी थी। अंसारी के अनुसार, नूरानी ने इस कथन को भविष्य के संदर्भ के लिए दर्ज किया था। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि नेहरू के अनुसार भारत के लिए खतरा कम्युनिज्म नहीं बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता था।
बयान के संदर्भ को लेकर शुरू हुई नई बहस
अंसारी के भाषण के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस टिप्पणी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अंसारी ने उक्त विचार को अपने व्यक्तिगत निष्कर्ष के तौर पर रखने के बजाय नूरानी की किताब में दर्ज नेहरू से जुड़े कथन के संदर्भ में प्रस्तुत किया था। इसलिए उनके बयान को समझने में उस ऐतिहासिक संदर्भ और भाषण के पूरे संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
2019 में भी आरएसएस पर विचार रख चुके हैं अंसारी
हामिद अंसारी इससे पहले भी एजी नूरानी की पुस्तक से जुड़े कार्यक्रम के दौरान आरएसएस और भारतीय राष्ट्रवाद से संबंधित अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं। हालिया भाषण में भी उन्होंने नूरानी के लेखन, संवैधानिक मूल्यों, नागरिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों जैसे विषयों का उल्लेख किया। नूरानी की पुस्तक में आरएसएस के गठन, इतिहास, विचारधारा और भारतीय राजनीति में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई है।
बयान पर सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी
पूर्व उपराष्ट्रपति की टिप्पणी के बाद अब विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ अंसारी के बयान को ऐतिहासिक संदर्भ में कही गई बात के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि दूसरी ओर उनके आलोचक इसे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे ने देश में सांप्रदायिकता, राष्ट्रवाद और संवैधानिक मूल्यों को लेकर बहस को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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