Brain Attack Signs: ब्रेन स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘मस्तिष्क का दौरा’ कहा जाता है, अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में इसके मामलों में खतरनाक वृद्धि देखी गई है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह अचानक बाधित हो जाता है या रक्त वाहिका (blood vessel) फट जाती है। इस स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं को आवश्यक ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे वे मिनटों में मरने लगती हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
Brain Attack Signs: शुरुआती संकेतों को पहचानना है जीवन रक्षक
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण अचानक प्रकट होते हैं और इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि आपको या आपके आसपास किसी को अचानक बोलने में लड़खड़ाहट महसूस हो, चेहरे का एक हिस्सा झुक जाए, या हाथ-पैर में सुन्नपन और कमजोरी आए, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, बिना किसी कारण के तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, संतुलन खोना और चक्कर आना भी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गोल्डन ऑवर’ (स्ट्रोक के बाद का शुरुआती एक घंटा) में इलाज मिलने से मरीज के बचने और पूरी तरह ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
Brain Attack Signs: कम उम्र में स्ट्रोक के पीछे छिपे मुख्य कारण
दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के पूर्व डायरेक्टर डॉ. दलजीत सिंह के अनुसार, युवाओं में स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बिगड़ती जीवनशैली है। धूम्रपान (स्मोकिंग) और नशीले पदार्थों का सेवन रक्त वाहिकाओं को कड़ा कर देता है, जिससे थक्के बनने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, अत्यधिक मानसिक तनाव (Stress), शारीरिक सक्रियता की कमी और जंक फूड का बढ़ता चलन कम उम्र में ही हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे को जन्म दे रहा है। ये सभी कारक मिलकर मस्तिष्क की धमनियों पर दबाव डालते हैं, जो अंततः स्ट्रोक का कारण बनते हैं।
ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार: इस्केमिक से लेकर मिनी स्ट्रोक तक
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सलील उप्पल बताते हैं कि स्ट्रोक मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बंटा होता है। पहला ‘इस्केमिक स्ट्रोक’ है, जो सबसे आम है; इसमें खून का थक्का जमने से रक्त प्रवाह रुक जाता है। दूसरा ‘हेमोरेजिक स्ट्रोक’ है, जिसमें हाई बीपी या अन्य कारणों से नस फट जाती है और दिमाग के अंदर खून बहने लगता है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण है ‘ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक’ (TIA), जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहते हैं। इसमें लक्षण कुछ ही मिनटों के लिए आते हैं और फिर ठीक हो जाते हैं, लेकिन इसे भविष्य में आने वाले बड़े स्ट्रोक की चेतावनी मानकर तुरंत जांच करानी चाहिए।
किन लोगों को है स्ट्रोक का सबसे अधिक जोखिम?
स्ट्रोक का खतरा हर किसी को समान रूप से नहीं होता। मधुमेह (Diabetes), उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों से जूझ रहे व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही, जिन लोगों का पारिवारिक इतिहास (Genetics) स्ट्रोक का रहा है, उनमें इसकी संभावना अधिक होती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद की कमी और लगातार स्क्रीन टाइम भी अप्रत्यक्ष रूप से स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा रहा है। मोटापे से ग्रस्त लोग, जिनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) असंतुलित है, वे भी इस गंभीर बीमारी के निशाने पर रहते हैं।
बचाव के मंत्र: स्वस्थ जीवनशैली ही है असली सुरक्षा
ब्रेन स्ट्रोक से बचने का सबसे प्रभावी तरीका ‘निवारण’ ही है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सबसे पहले धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बना लें। प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट का व्यायाम या पैदल चलना रक्त संचार को बेहतर रखता है। अपने आहार में फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें और नमक व चीनी का सेवन कम करें। समय-समय पर अपने ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की जांच कराते रहें। याद रखें, मानसिक शांति के लिए योग और पर्याप्त नींद उतनी ही जरूरी है जितनी कि शारीरिक कसरत। सजगता ही स्ट्रोक के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है।
