ब्रिटेन में प्रोस्टेट कैंसर तेजी से बढ़ रहा है और यह पुरुषों में सबसे आम कैंसर बन चुका है। हर साल 12 हजार से अधिक जानें ले रहा यह रोग शुरुआती स्टेज में लगभग बिना लक्षण के बढ़ता है, जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीकें जैसे PSA टेस्ट और MRI स्कैन शुरुआती चरण में कैंसर पकड़ने में मददगार हैं। वहीं, जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार, विटामिन D का स्तर बनाए रखना और धूम्रपान-शराब से दूरी जोखिम को कम कर सकते हैं। यह लेख आठ बिंदुओं में प्रोस्टेट कैंसर की स्थिति, चुनौतियों और बचाव के उपायों को स्पष्ट करता है।
ब्रिटेन में प्रोस्टेट कैंसर का बढ़ता खतरा
ब्रिटेन में प्रोस्टेट कैंसर अब पुरुषों में सबसे आम कैंसर बन चुका है। हर साल 12 हजार से अधिक मौतें इस बीमारी से होती हैं। इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती स्टेज में यह लगभग बिना किसी लक्षण के बढ़ता है। ज्यादातर पुरुष तब तक नहीं जानते कि उन्हें कैंसर है, जब तक यह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल नहीं जाता। देर से पकड़ में आने वाले मामलों ने डॉक्टरों और कैंसर संस्थाओं को चिंतित कर दिया है। यही कारण है कि विशेषज्ञ लगातार शुरुआती पहचान और स्क्रीनिंग पर जोर दे रहे हैं।
नेशनल स्क्रीनिंग कमेटी का विवादित फैसला
ब्रिटेन की नेशनल स्क्रीनिंग कमेटी ने बड़े पैमाने पर प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग शुरू करने के प्रस्ताव को फिर ठुकरा दिया। इस फैसले ने कई कैंसर संगठनों और नेताओं को नाराज कर दिया। रिषि सुनक ने इसे “जीवन बचाने का खोया हुआ मौका” बताया और कहा कि कमेटी ने आधुनिक MRI आधारित डायग्नॉस्टिक तकनीकों को नजरअंदाज किया। पियर्स मॉर्गन और ओलंपिक चैंपियन सर क्रिस होय ने भी इसे खतरनाक चूक बताया। क्रिस होय के पिता की मौत प्रोस्टेट कैंसर से हुई थी, इसलिए उनका विरोध और भी मुखर रहा।
MRI फर्स्ट मॉडल से बढ़ती उम्मीदें
कई विशेषज्ञों का कहना है कि NSC की दलीलें पुराने डाटा पर आधारित हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन और UCL के प्रोफेसरों ने दिखाया है कि PSA टेस्ट और MRI स्कैन शुरुआती स्टेज में कैंसर पकड़ने में सबसे प्रभावी हैं। MRI फर्स्ट मॉडल ने अनावश्यक बायोप्सी को 25 से 40 प्रतिशत तक कम किया है और ओवरडायग्नोसिस का खतरा घटाया है। PROMIS ट्रायल और यूरो 42 मिलियन का ट्रांसफॉर्म ट्रायल इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
जोखिम प्रोफाइल और पारिवारिक इतिहास
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा हर पुरुष में समान नहीं होता। ब्लैक पुरुषों में जोखिम औसतन दोगुना पाया गया है। अगर पिता या भाई को 60 वर्ष से पहले प्रोस्टेट कैंसर हुआ हो, तो जोखिम 3 से 4 गुना बढ़ जाता है। ऐसे पुरुषों को 45 से 50 वर्ष की उम्र से PSA मॉनिटरिंग शुरू करने की सलाह दी जाती है। पारिवारिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए जीन टेस्टिंग भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
जीवनशैली और आहार का प्रभाव
दुनियाभर के शोध बताते हैं कि अधिक फैट वाला आहार प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ाता है। नियमित व्यायाम सूजन को कम करता है और हार्मोन संतुलित रखता है। प्रोसेस्ड और जली हुई मीट का सेवन घातक प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ाता है। विशेषज्ञ टमाटर, हरी सब्जियां, नट्स, ऑलिव ऑयल और फैटी फिश जैसे हेल्दी फैट्स लेने की सलाह देते हैं।
विटामिन D का महत्व
कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड की रिसर्च बताती है कि बहुत कम विटामिन D वाले पुरुषों में तेजी से फैलने वाले प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अधिक पाया गया। विटामिन D का स्तर सही रखना हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए भी जरूरी है। धूप में समय बिताना और विटामिन D युक्त आहार लेना इस दिशा में मददगार हो सकता है।
धूम्रपान और शराब से दूरी
यूरोपीय शोध के अनुसार, धूम्रपान से प्रोस्टेट कैंसर से मौत का जोखिम बढ़ जाता है। ज्यादा शराब पीना ट्यूमर बनने की संभावना को बढ़ाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर पुरुष अपने कैंसर जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की अंतिम राय
विशेषज्ञ एक बात पर एकमत हैं: “जब तक प्रोस्टेट कैंसर लक्षण दिखाता है, अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।” इसलिए बचाव का रास्ता है कि अपनी जोखिम प्रोफाइल जानें, 45 से 50 के बाद नियमित PSA चेक कराएं, जरूरत पड़ने पर MRI कराएं, वजन और डाइट पर ध्यान दें, विटामिन D का स्तर बनाए रखें, धूम्रपान और शराब से दूरी रखें और पारिवारिक इतिहास हो तो जीन टेस्टिंग कराएं।
यह भी पढ़ें-Late Night Work Tips: देर रात कंप्यूटर पर काम करने वालों के लिए स्वास्थ्य सुझाव

One thought on “प्रोस्टेट कैंसर से बचाव: आहार, व्यायाम और जीवनशैली”