भिंडी में ऑक्जालेट नामक तत्व पाया जाता है, जो किडनी में स्टोन (पथरी) बनाने में सहायक हो सकता है। विशेषकर वे लोग जो पहले से किडनी स्टोन या क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित हैं, उन्हें भिंडी के अत्यधिक सेवन से परहेज करना चाहिए। ऑक्जालेट शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर कैल्शियम ऑक्जालेट स्टोन बना सकता है। अगर डॉक्टर ने ऑक्जालेट सीमित करने की सलाह दी है, तो भिंडी आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है।
मधुमेह (डायबिटीज) रोगी रखें सावधानी
हालांकि भिंडी को मधुमेह में उपयोगी माना जाता है, लेकिन कुछ शोधों में यह पाया गया है कि भिंडी का अत्यधिक सेवन मेटफॉर्मिन दवा के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। मेटफॉर्मिन डायबिटीज कंट्रोल के लिए आमतौर पर दी जाने वाली दवा है। यदि आप यह दवा लेते हैं और साथ में नियमित रूप से बड़ी मात्रा में भिंडी खाते हैं, तो शुगर कंट्रोल पर असर पड़ सकता है। इसलिए डायबिटीज रोगियों को डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए।
पेट की गैस और अपच की समस्या वाले रहें सावधान
भिंडी में मौजूद घुलनशील फाइबर (soluble fiber) पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह अत्यधिक गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। अगर किसी को IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) या एसिडिटी जैसी पाचन संबंधी समस्याएं हैं, तो उन्हें भिंडी का सेवन सीमित मात्रा में और अच्छी तरह पकी हुई अवस्था में करना चाहिए। कच्ची या अधपकी भिंडी से समस्या बढ़ सकती है।
गठिया (Arthritis) के मरीजों के लिए अलर्ट
भिंडी में ऑक्जालेट की मात्रा गठिया रोगियों के लिए समस्या पैदा कर सकती है। जोड़ों में सूजन और दर्द की स्थिति में ऑक्जालेट युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करना उपयोगी माना जाता है। भिंडी में मौजूद श्लेष्म (mucilage) तत्व भी कुछ लोगों में एलर्जी या असहजता का कारण बन सकता है। इसलिए रूमेटॉइड आर्थराइटिस या ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों को भिंडी खाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को कब और कैसे खानी चाहिए भिंडी?
गर्भावस्था में भिंडी का सेवन आमतौर पर सुरक्षित होता है क्योंकि इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है, जो भ्रूण विकास के लिए आवश्यक है। लेकिन अगर किसी महिला को गैस, पाचन या ब्लड शुगर संबंधित समस्या हो, तो भिंडी का अत्यधिक सेवन परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर पहली तिमाही में, जब पाचन तंत्र संवेदनशील होता है, भिंडी को अच्छी तरह पकाकर ही खाया जाए और मात्रा सीमित होनी चाहिए। किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में डॉक्टर की राय जरूरी है।
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