Diabetes Tips: डायबिटीज यानी मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए खानपान पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों में ही करेले (बिटर गॉर्ड) को ब्लड शुगर कम करने वाली एक बेहतरीन और अचूक सब्जी माना गया है। नियमित रूप से करेले का सेवन करने से शरीर की कोशिकाओं (सेल्स) को खून में मौजूद ग्लूकोज को अवशोषित करने में मदद मिलती है। यह ग्लूकोज को शरीर की मांसपेशियों, लिवर और फैट सेल्स तक आसानी से पहुंचाता है, जिससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है।
इसके अलावा, करेले में विशेष रूप से ‘लेक्टिन’ पाया जाता है, जो मस्तिष्क पर असर करके भूख को प्राकृतिक रूप से दबाता है और कैलोरी इनटेक को कम करता है। यही वजह है कि टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए करेला एक सुपरफूड की तरह काम करता है। कई वैज्ञानिक शोधों और रिसर्च में भी यह साबित हो चुका है कि करेले का सही इस्तेमाल इंसुलिन की निर्भरता को कम कर सकता है।
करेले में मौजूद वो जादुई यौगिक जो ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं
आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक, करेले के भीतर कुछ ऐसे प्राकृतिक और शक्तिशाली औषधीय यौगिक पाए जाते हैं, जो सीधे तौर पर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने का काम करते हैं। करेले में मुख्य रूप से तीन सक्रिय तत्व—चारेंटिन, पॉलीपेप्टाइड-पी और वाइसिन पाए जाते हैं। इन तीनों ही तत्वों में बेहतरीन ‘हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव’ होता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि ये शरीर में इंसुलिन की तरह काम करके ब्लड शुगर के लेवल को तेजी से कम कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, करेले का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बेहद कम, यानी मात्र 18 से 30 के बीच होता है। कम जीआई होने के कारण इसे खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज बहुत धीरे-धीरे रिलीज होता है, जिससे ब्लड शुगर स्पाइक का खतरा न के बराबर रहता है। करेला एक लो-कैलोरी और लो-कार्बोहाइड्रेट फूड है, जो न सिर्फ शुगर बल्कि बढ़ते वजन और मोटापे को भी नियंत्रित करता है। इसमें पाए जाने वाले विटामिन सी और फ्लेवोनोइड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स डायबिटीज के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और अंदरूनी सूजन को कम करने में भी मददगार हैं।
मधुमेह के रोगियों के लिए करेले के नियमित सेवन के मुख्य लाभ
विशेषज्ञों का निष्कर्ष: “मधुमेह के रोगियों द्वारा करेले का रोजाना और सही तरीके से सेवन करने पर उनका ग्लाइसेमिक कंट्रोल (शर्करा संतुलन) लंबे समय तक बेहतर बना रहता है। यह भोजन के तुरंत बाद होने वाले शुगर के घातक उतार-चढ़ाव को रोकता है।”
यह शरीर के भीतर प्राकृतिक रूप से पैंक्रियाज को सक्रिय करता है, जिससे इंसुलिन का स्राव सही मात्रा में होने लगता है। लंबे समय में यह डायबिटीज से होने वाली अन्य शारीरिक जटिलताओं, जैसे किडनी और आंखों की कमजोरी से भी शरीर की रक्षा करता है।
डायबिटीज में करेले के उपयोग के विभिन्न और प्रभावी तरीके
डायबिटीज के मरीज करेले को अपने स्वाद और सुविधानुसार निम्नलिखित पांच तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, जिससे उन्हें इसका भरपूर और पूरा पोषण मिले:
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करेले का ताजा जूस: ब्लड शुगर को तुरंत और तेजी से कम करने के लिए करेले का जूस सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है। इसके लिए कच्चे करेले को मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें और सूती कपड़े से छानकर उसका रस निकाल लें। रोज सुबह खाली पेट एक छोटा कप करेले का जूस पीना शुगर के मरीजों के लिए अमृत समान है।
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करेला स्टर-फ्राई: करेले को गोल या लंबे टुकड़ों में काट लें। यदि कड़वाहट कम करनी हो तो इसके बीज हटा सकते हैं। इसके बाद बेहद कम तेल में प्याज और हरी मिर्च डालकर इसे हल्की आंच पर स्टर फ्राई करें और बिना ढके पकाएं। इसे आप सादे गेहूं या मल्टीग्रेन आटे की रोटी के साथ खा सकते हैं।
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करेले की सूखी भुजिया: घर में बनने वाली पारंपरिक सूखी सब्जी या करेले की भुजिया को कम से कम तेल और बेहद सीमित मसालों के साथ तैयार किया जा सकता है। इसे आप दोपहर के भोजन में अरहर या मूंग की दाल के साथ एक साइड डिश के रूप में खा सकते हैं। ध्यान रहे कि सब्जी को ज्यादा डीप फ्राई न करें।
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भरवां करेला (सीमित मात्रा में): कभी-कभी स्वाद बदलने के लिए आप मसालेदार भरवां करेला खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि इसे पकाते समय तेल की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए। भरवां करेले को ज्यादा पकाने से उसके कुछ जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, इसलिए इसे कभी-कभार ही सीमित मात्रा में खाएं।
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करेला सूप और क्रिस्पी चिप्स: शाम के समय भूख लगने पर करेले के साथ टमाटर, लौकी और अन्य हरी सब्जियां मिलाकर एक हेल्दी सूप तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा, करेले को बिल्कुल पतला काटकर एयर फ्रायर में बिना तेल के या बहुत कम तेल में क्रिस्पी चिप्स की तरह भून सकते हैं, जो चाय के साथ एक बेहतरीन स्नैक बनता है।
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