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Knee Pain Causes : युवाओं में तेजी से बढ़ रहा घुटनों का दर्द, जानिए कारण और बचाव के उपाय

Knee Pain Causes

Knee Pain Causes : एक दौर था जब घुटनों में दर्द, जोड़ों में असहनीय जकड़न और चलने-फिरने में होने वाली असमर्थता को केवल ढलती उम्र या बुजुर्गों की समस्या मानकर देखा जाता था। सामान्यतः यह माना जाता था कि ये शारीरिक परेशानियां 55 से 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद ही शुरू होती हैं, लेकिन आधुनिक दौर में यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है। आज हड्डियों के डॉक्टरों (ऑर्थोपेडिक्स) के पास घुटनों के दर्द से पीड़ित युवाओं की एक बहुत बड़ी तादाद पहुंच रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश युवाओं की उम्र महज 25 से 35 साल के बीच है, जिन्हें बैठने के बाद उठने में जकड़न और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

खराब जीवनशैली और सिटिंग रूटीन: समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं युवाओं के जोड़

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि आज की आधुनिक ‘सिटिंग लाइफस्टाइल’ यानी लगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत, शारीरिक निष्क्रियता, तेजी से बढ़ता वजन और अनियंत्रित फिटनेस रूटीन इसके मुख्य जिम्मेदार हैं। ये कारक युवाओं के घुटनों के जोड़ों को समय से पहले ही बेहद कमजोर और जर्जर बना रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय शोध भी इस बढ़ते खतरे की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं।

फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में पाया गया कि 30 साल की शुरुआती उम्र के आधे से अधिक लोगों के एमआरआई स्कैन में कार्टिलेज डैमेज और हड्डियों में बदलाव के शुरुआती लक्षण देखे गए, भले ही उनमें बाहर से कोई गंभीर दर्द दिखाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़े भी बताते हैं कि 30 से 44 वर्ष के युवाओं में ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

क्यों कमजोर हो रहे हैं युवाओं के घुटने: डॉ. नवल भाटिया का विशेषज्ञ विश्लेषण

पैसिफिक वनहेल्थ में इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नवल भाटिया इस विषय पर गहन प्रकाश डालते हैं। उनके अनुसार, घुटना हमारे मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और पूरे शरीर का भार सहने वाला एक जटिल जोड़ है। दैनिक जीवन की हर गतिविधि जैसे चलना, उठना, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना और वजन उठाना पूरी तरह घुटनों पर ही निर्भर करता है, लेकिन जब आज के युवाओं के शरीर को पर्याप्त मूवमेंट या व्यायाम नहीं मिलता, तो घुटनों के आसपास की मांसपेशियां निष्क्रिय और कमजोर होने लगती हैं। मांसपेशियों की कमजोरी के कारण पूरा वजन सीधे घुटनों के जोड़ों पर आने लगता है, जो अंततः सुरक्षात्मक कार्टिलेज को नष्ट कर देता है और कम उम्र में ही पुराने दर्द की शुरुआत हो जाती है।

डेस्क जॉब और मोटापा: कम उम्र में जोड़ों के घिसाव के सबसे बड़े विलेन

युवाओं में जोड़ों की इस खराबी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण छिपे हुए हैं। पहला कारण है लगातार कई घंटों की डेस्क जॉब, जिससे घुटनों की प्राकृतिक गतिशीलता समाप्त हो जाती है और वहां रक्त का संचार (ब्लड सर्कुलेशन) बुरी तरह प्रभावित होता है। इसी वजह से युवाओं को मीटिंग्स के बाद उठने में, लंबे समय तक ड्राइविंग करने में दर्द, जकड़न और घुटनों से कट-कट की आवाज आने जैसी शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दूसरा और सबसे घातक कारण है मोटापा। बढ़ा हुआ वजन सीधे घुटनों पर अतिरिक्त यांत्रिक दबाव डालता है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा आम लोगों की तुलना में 4 गुना और पुरुषों में लगभग 5 गुना तक बढ़ जाता है, जो आगे चलकर कार्टिलेज को पूरी तरह घिसा देता है।

इन अलार्मिंग संकेतों को न करें नजरअंदाज: समय रहते पहचानना है जरूरी

हड्डियों के डॉक्टरों के अनुसार, घुटनों के भीतर होने वाला नुकसान हमेशा अचानक या तेज दर्द के रूप में सामने नहीं आता, बल्कि यह धीरे-धीरे पनपता है। इसलिए शरीर द्वारा दिए जाने वाले कुछ शुरुआती अलार्मिंग संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे कि सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटने में अचानक दर्द होना, ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने के बाद घुटनों का पूरी तरह जकड़ जाना, जोड़ों में अचानक हल्की सूजन या अस्थिरता महसूस होना, चलते या मुड़ते समय घुटनों से किसी प्रकार की आवाज आना, और जिम या सामान्य एक्सरसाइज करने के बाद भी जोड़ों का दर्द न जाना। ये तमाम संकेत बताते हैं कि आपके जोड़ों को तुरंत डॉक्टरी परामर्श और देखभाल की सख्त जरूरत है।

घुटनों की सेहत सुधारने के अचूक उपाय: कैसे रखें जोड़ों को हमेशा फिट

क्या कम उम्र में घुटनों की इस गंभीर समस्या को समय रहते रोका जा सकता है? इसका जवाब है- हाँ, बिल्कुल। इसके लिए युवाओं को अपनी दिनचर्या में कुछ बेहद आसान परंतु महत्वपूर्ण सुधार करने होंगे। सबसे पहले अपने शरीर के वजन को लंबाई के अनुसार संतुलित (बीएमआई के तहत) रखें। ऑफिस में काम के दौरान हर 40 से 45 मिनट के बाद अपनी सीट से उठकर कम से कम दो मिनट की वॉक जरूर करें।

अपने दैनिक रूटीन में जोड़ों पर कम दबाव डालने वाले व्यायाम (लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज) जैसे नियमित वॉक, साइक्लिंग या स्विमिंग को अनिवार्य रूप से शामिल करें। पैरों की मुख्य मांसपेशियों जैसे क्वाड्रिसेप्स और हिप मसल्स को मजबूत करने वाले व्यायाम करें और किसी भी वर्कआउट से पहले वार्म-अप करना कभी न भूलें। इसके साथ ही अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त संतुलित भोजन शामिल करें तथा प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें।

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