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Ekadashi Vrat Story : आखिर क्यों रखा जाता है एकादशी का व्रत? जानें देवी एकादशी के जन्म की कहानी

Ekadashi Vrat Story

Ekadashi Vrat Story :  हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह केवल भोजन त्यागने का उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मन पर नियंत्रण और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष साधन है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में 11 जून को पड़ने वाली परम एकादशी का विशेष महत्व बताया जा रहा है, जिसे भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

मुरासुर के अत्याचारों से परेशान हुए देवता

पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में मुरासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। उसने अपने बल, पराक्रम और मायावी शक्तियों के बल पर देवताओं को पराजित कर दिया था। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। देवताओं की विनती सुनकर भगवान विष्णु ने मुरासुर का सामना करने का निर्णय लिया और उसके साथ भीषण युद्ध आरंभ हुआ।

भगवान विष्णु के तेज से हुआ देवी का प्राकट्य

कथा के अनुसार भगवान विष्णु और मुरासुर के बीच यह युद्ध लंबे समय तक चलता रहा। युद्ध से कुछ समय के लिए विश्राम लेने हेतु भगवान विष्णु एक गुफा में चले गए। इसी दौरान मुरासुर ने अवसर देखकर उन पर आक्रमण करने का प्रयास किया। तभी भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति और तेज से एक अद्भुत देवी प्रकट हुईं। उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली था। देवी ने मुरासुर को युद्ध के लिए चुनौती दी और शीघ्र ही उसका संहार कर दिया।

कैसे पड़ा एकादशी देवी का नाम?

जब भगवान विष्णु की निद्रा समाप्त हुई तो उन्होंने देवी के पराक्रम को देखा और प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। देवी ने प्रार्थना की कि जिस तिथि पर उनका जन्म हुआ है, वह संसार में सबसे पवित्र मानी जाए। साथ ही जो भी व्यक्ति उस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत एवं पूजा करे, उसे विशेष पुण्य प्राप्त हो। भगवान विष्णु ने उनकी यह इच्छा स्वीकार कर ली। चूंकि देवी का प्राकट्य चंद्र मास की एकादशी तिथि को हुआ था, इसलिए उनका नाम ‘एकादशी’ रखा गया।

एकादशी व्रत की परंपरा कैसे शुरू हुई?

भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि एकादशी तिथि उन्हें अत्यंत प्रिय होगी। इस दिन व्रत और पूजा करने वाले भक्तों के पाप नष्ट होंगे तथा उन्हें आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होगा। तभी से एकादशी व्रत की परंपरा प्रारंभ हुई और यह भगवान विष्णु की उपासना के प्रमुख पर्वों में शामिल हो गया।

क्यों रखा जाता है एकादशी का व्रत?

शास्त्रों में एकादशी का अर्थ ‘ग्यारह’ बताया गया है। मानव शरीर में पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच कर्मेंद्रियां और एक मन होता है। इन ग्यारहों को सांसारिक विकारों से हटाकर ईश्वर की भक्ति में लगाना ही एकादशी व्रत का मुख्य उद्देश्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उपवास और पूजा करने से मानसिक शांति, आत्मिक बल और पुण्य की प्राप्ति होती है।

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