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Chandranath Rath Murder Case : सीबीआई जांच में 70 लाख की सुपारी का खुलासा, सिग्नल ऐप से रची गई साजिश

Chandranath Rath Murder Case

Chandranath Rath Murder Case :  पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल लाने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। राज्य के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या, विधानसभा चुनाव के ठीक बाद कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को औपचारिक रूप से जांच की कमान अपने हाथ में ले ली है। जांच एजेंसी ने इस सिलसिले में नई एफआईआर दर्ज की है और मामले की तह तक जाने के लिए सात सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जिसमें अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

तीन राज्यों तक फैले तार: उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरफ्तारियां

सीबीआई की शुरुआती कार्रवाई में अंतरराज्यीय अपराधियों के शामिल होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस हत्याकांड के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के बक्सर से तीन संदिग्धों—मयंक मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह—को गिरफ्तार किया गया है। इन गिरफ्तारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हत्याकांड की साजिश केवल बंगाल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे अंजाम देने के लिए पेशेवर अपराधियों को बाहर से बुलाया गया था। फिलहाल, सीबीआई इन तीनों आरोपियों को 23 मई तक अपनी कस्टडी में लेकर सघन पूछताछ कर रही है ताकि पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।

70 लाख की सुपारी और हाई-टेक प्लानिंग: सिग्नल ऐप का इस्तेमाल

जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि चंद्रनाथ रथ की जान लेने के लिए 70 लाख रुपये की मोटी सुपारी दी गई थी। साजिशकर्ताओं ने पकड़े जाने के डर से सुरक्षित संचार के लिए ‘सिग्नक ऐप’ (Signal App) का सहारा लिया था। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डेटा से पता चला है कि उन्हें इसी ऐप पर चंद्रनाथ रथ की तस्वीरें और उनकी हत्या के स्पष्ट आदेश भेजे गए थे। इसके साथ ही, उनके घर और आने-जाने के रास्तों की रेकी की गई थी।

मध्यमग्राम बना साजिश का केंद्र: लाइव लोकेशन से मिली मदद

सीबीआई के हाथ लगे सबूतों के अनुसार, पूरी हत्या की पटकथा पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में ही रची गई थी। बक्सर से पकड़े गए मयंक और विक्की ने पूछताछ में कबूला है कि मध्यमग्राम का एक प्रभावशाली व्यक्ति लगातार उनके संपर्क में था। वह व्यक्ति न केवल उन्हें रसद और हथियार उपलब्ध करा रहा था, बल्कि चंद्रनाथ रथ की एक-एक गतिविधि की ‘लाइव लोकेशन’ शूटर्स के साथ साझा कर रहा था। जांच टीम अब उस मुख्य सूत्रधार की तलाश में मध्यमग्राम के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद ही हत्या के असली मकसद का पता चलेगा।

चुनाव से पहले ही रची गई थी मौत की साजिश: सुरक्षा के कारण टला था हमला

सूत्रों का दावा है कि चंद्रनाथ रथ काफी समय से निशाने पर थे। उनकी हत्या की योजना दूसरे चरण के मतदान से पहले ही बना ली गई थी। हालांकि, उस समय चुनाव के कारण भारी पुलिस बल की तैनाती और चंद्रनाथ के आसपास समर्थकों की भारी भीड़ के चलते हमलावर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके थे। हमलावरों ने करीब एक महीने तक मध्यमग्राम स्थित उनके आवास के पास रहकर उनकी दैनिक गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया और सही मौके का इंतजार किया।

राजनीतिक प्रतिशोध या पुरानी रंजिश: हर एंगल पर सीबीआई की नजर

फिलहाल सीबीआई दो मुख्य पहलुओं पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पहला पहलू ‘पॉलिटिकल राइवलरी’ यानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का है, क्योंकि चंद्रनाथ रथ एक बड़े नेता से जुड़े हुए थे। दूसरा पहलू किसी पुरानी निजी रंजिश का हो सकता है। हालांकि, बलिया से गिरफ्तार राज सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, जिससे गुत्थी और उलझ गई है। सीबीआई को उम्मीद है कि कुछ और साजिशकर्ताओं तक पहुंचने के बाद ही इस जघन्य हत्याकांड के पीछे के असली मास्टरमाइंड और उसके इरादों का पूर्ण खुलासा हो पाएगा। एसआईटी की टीम अभी बंगाल में ही डेरा डाले हुए है और क्राइम सीन का पुनरुद्धार (Recreation) कर रही है।

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