TMC Internal Conflict : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर पिछले कुछ दिनों से जारी तीखी बयानबाजी और अंदरूनी खींचतान के बीच आखिरकार नरमी के संकेत मिले हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को एक बेहद संयमित और कूटनीतिक रुख अपनाते हुए वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के साथ चल रहे बड़े टकराव की अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया। अभिषेक बनर्जी ने राजनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए कल्याण बनर्जी को अपना मार्गदर्शक बताया और कहा कि वरिष्ठ होने के नाते उन्हें आलोचना करने का पूरा हक है। अभिषेक के इस कदम को पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को शांत करने और संगठन में सुलह व संतुलन का एक मजबूत संदेश देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे टीएमसी ने राहत की सांस ली है।
कल्याण बनर्जी का बदला रुख
अभिषेक बनर्जी द्वारा दिखाई गई इस सकारात्मक पहल का श्रीरामपुर के दिग्गज सांसद कल्याण बनर्जी ने भी तुरंत और गर्मजोशी से जवाब दिया। उन्होंने जूनियर बनर्जी के इस बयान का स्वागत करते हुए न सिर्फ अपने तीखे तेवर नरम किए, बल्कि अभिषेक को अपने ‘बेटे जैसा’ बताकर पुरानी बातों को भुलाने की कोशिश की। कल्याण बनर्जी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ बड़ी राजनीतिक लड़ाई जीतने के लिए तृणमूल कांग्रेस के सभी नेताओं का एकजुट रहना बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं के बीच अचानक बदले इस घटनाक्रम से पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी राहत महसूस की है।
24 घंटे पहले कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी के सामने रख दी थी बड़ी शर्त
दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह सुलह भरा बयान इसलिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है, क्योंकि इससे महज 24 घंटे पहले ही कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर सीधा और तीखा हमला बोला था। उन्होंने डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर अहंकारी रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी थी। इतना ही नहीं, कल्याण बनर्जी ने अभिषेक से जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को पूरी तरह अलग करने की घोषणा कर दी थी और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक तरह से अल्टीमेटम दे दिया था कि वह अपने भतीजे (अभिषेक) और उन जैसे वफादार वरिष्ठ नेताओं में से किसी एक को चुन लें।
वरिष्ठ नेताओं को है मार्गदर्शन और डांटने का पूरा अधिकार: अभिषेक बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक के बाद जब अभिषेक बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से बाहर निकले, तो उन्होंने पत्रकारों के सवालों का बेहद शांति से जवाब दिया। अभिषेक ने कहा, ‘कल्याण बनर्जी ने मुझे बचपन से देखा और बढ़ते हुए परखा है। वह हमारी पार्टी के बेहद सीनियर और सम्मानित नेता हैं। अगर वह मुझे दो-चार कड़ी बातें कह भी देते हैं, तो उन्हें इसका पूरा हक है। इस मामले पर किसी भी तरह का अनावश्यक विवाद खड़ा करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।’
पुरानी गलतियों को भूलकर भाजपा के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे चुनाव: कल्याण बनर्जी
अभिषेक बनर्जी के इस बड़प्पन भरे बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा, ‘मैं अभिषेक के इस परिपक्व बयान का दिल से स्वागत करता हूं। वह मेरे बेटे के समान हैं और यह अच्छी बात है कि उन्होंने स्थिति की गंभीरता तथा अपनी गलती को समय रहते समझा।’ उन्होंने आगे जोड़ा कि अब समय आंतरिक कलह का नहीं है, बल्कि हम सबको मिलकर विपक्षी पार्टी भाजपा के खिलाफ पूरी ताकत से काम करना है और आगामी चुनावों में एकजुट होकर बड़ी लड़ाई लड़नी है।
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद संकट टालने की बड़ी कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर यह सुलह ऐसे नाजुक समय में हुई है, जब सत्तारूढ़ पार्टी हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी अप्रत्याशित और करारी हार के बाद गहरे आत्ममंथन से गुजर रही है। पार्टी इस समय अपने विधायी और संसदीय दोनों ही धड़ों में बढ़ती उथल-पुथल तथा असंतोष से जूझ रही है। ऐसे में जानकारों ने अभिषेक बनर्जी की इस सधी हुई प्रतिक्रिया को एक और आंतरिक विवाद को बड़े संगठनात्मक संकट में तब्दील होने से रोकने की एक बेहद सोची-समझी और सफल कोशिश के रूप में देखा है।
