Election 2026: भारत के दो महत्वपूर्ण राज्यों, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार को विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। चुनाव आयोग द्वारा रात 8 बजे जारी किए गए प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पहले चरण के मतदान में 92.10% की भारी वोटिंग दर्ज की गई है। वहीं, दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में 84.95% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह भारी मतदान न केवल जनता की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है, बल्कि दोनों ही राज्यों में सत्ता परिवर्तन या सत्ता वापसी की गहरी छटपटाहट का भी संकेत दे रहा है।
Election 2026: पश्चिम बंगाल का पहला चरण: 152 सीटों पर दांव पर लगी दिग्गजों की साख
पश्चिम बंगाल में चुनावी समर के पहले फेज के तहत कुल 294 विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े शाम 8 बजे तक के हैं और अंतिम मिलान के बाद इनमें मामूली वृद्धि संभव है। बंगाल में इतनी अधिक वोटिंग का होना अक्सर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव या वर्तमान सरकार के पक्ष में जबरदस्त लहर का परिचायक माना जाता है, जिसने विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।
Election 2026: तृणमूल कांग्रेस का बड़ा दावा: “152 में से 125 से ज्यादा सीटें जीतेगी ममता सरकार”
भारी मतदान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने पार्टी की ओर से बड़ी जीत की भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा कि वोटों का यह बढ़ा हुआ प्रतिशत स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के पक्ष में ‘प्रो-इन्कंबेंसी’ लहर को दर्शाता है। घोष ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि पहले चरण की 152 सीटों में से टीएमसी कम से कम 125 सीटें जीतने जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जमीनी रुझान सही रहे, तो यह आंकड़ा 133 से 135 सीटों तक भी पहुंच सकता है। कुणाल घोष के अनुसार, जनता ने भाजपा की ‘बंगाल-विरोधी’ नीतियों को सिरे से नकार दिया है।
चुनावी धांधली के आरोप: कुणाल घोष ने मतदाता सूची पर उठाए सवाल
अपनी जीत का दावा करने के साथ-साथ कुणाल घोष ने निर्वाचन प्रक्रिया की खामियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में जानबूझकर असली मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए या उन्हें मतदान से बाहर कर दिया गया। घोष ने इसे एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि इन तमाम बाधाओं के बावजूद बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास दिखाया है। टीएमसी नेता का मानना है कि यह चुनाव केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति और अस्मिता को बचाने की लड़ाई है, जिसमें उनकी जीत सुनिश्चित है।
तमिलनाडु का सियासी भविष्य: 234 सीटों पर जनता ने ईवीएम में कैद किया फैसला
तमिलनाडु में एक ही दिन में पूरी चुनावी प्रक्रिया समाप्त कर दी गई। राज्य की सभी 234 सीटों पर हुआ 84.95% मतदान यह बताता है कि वहां भी जनता किसी स्पष्ट जनादेश की ओर बढ़ रही है। डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन और एआईएडीएमके-भाजपा (AIADMK-BJP) गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य में मतदान का इतना ऊंचा स्तर युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की सक्रियता के कारण संभव हुआ है। अब सभी की नजरें परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी।
