Keralam CM News 2026: कांग्रेस पार्टी ने लंबे विचार-विमर्श और मंथन के बाद गुरुवार को केरलम के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता वी. डी. सतीशन को विधायक दल का नया नेता चुना गया है। हालांकि इस दौड़ में वरिष्ठ नेता के. सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे कद्दावर नाम भी शामिल थे, लेकिन पार्टी आलाकमान ने अंततः सतीशन के नेतृत्व पर भरोसा जताया। कांग्रेस पर्यवेक्षकों दीपा दासमुंशी, मुकुल वासनिक और अजय माकन ने आधिकारिक तौर पर सतीशन को केरल विधायक दल (CLP) का नेता घोषित किया, जिससे उनके मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सहयोगियों का अटूट समर्थन: IUML और केरल कांग्रेस (जोसेफ) का साथ
सतीशन की उम्मीदवारी को न केवल पार्टी के भीतर बल्कि गठबंधन के सहयोगियों से भी भरपूर समर्थन मिला। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे प्रमुख सहयोगी दलों ने खुलकर उनके नाम की पैरवी की थी। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी जमीनी पकड़ और कार्यकर्ताओं के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें इस पद का सबसे प्रबल दावेदार बनाया। चुनाव परिणामों के बाद से ही यह स्पष्ट होने लगा था कि गठबंधन के साथी एक ऐसे चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं जो सबको साथ लेकर चलने में सक्षम हो, और सतीशन इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरे।
चुनावी रिकॉर्ड: परावुर सीट पर छठी बार जीत दर्ज कर बनाया इतिहास
एर्नाकुलम जिले की परावुर विधानसभा सीट वी. डी. सतीशन का अभेद्य किला रही है। पेशे से वकील सतीशन ने साल 2001 में पहली बार इस सीट से चुनावी राजनीति में कदम रखा और तब से वे लगातार विजयी होते आ रहे हैं। उन्होंने 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार पांच जीत दर्ज कर ‘जीत का पंजा’ लगाया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी छठी लगातार जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया। शुरुआत में यह क्षेत्र नॉर्थ परावुर के नाम से जाना जाता था, जहाँ सतीशन का राजनीतिक प्रभाव निर्विवाद बना हुआ है।
छात्र राजनीति और श्रमिक नेता: संघर्षों से भरा राजनीतिक सफर
वी. डी. सतीशन का राजनीति से जुड़ाव उनके स्कूली दिनों से ही शुरू हो गया था। वे एमजी यूनिवर्सिटी यूनियन के चेयरमैन रहे और कांग्रेस की छात्र शाखा ‘केरल स्टूडेंट्स यूनियन’ (KSU) का नेतृत्व किया। बाद में उन्होंने एनएसयूआई (NSUI) के सचिव के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सेवाएं दीं। सतीशन केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रभावी मजदूर नेता भी रहे हैं। उन्होंने कोचीन के औद्योगिक क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक श्रमिक संघों के अध्यक्ष के रूप में काम किया है। संगठन में वे केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य के रूप में भी सक्रिय रहे हैं।
शिक्षा और व्यक्तिगत जीवन: वकालत से लेकर किताबों और ट्रेकिंग का शौक
सतीशन की शैक्षिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। उन्होंने कोचीन के सेक्रेड हार्ट कॉलेज से डिग्री हासिल की और राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इसके बाद उन्होंने तिरुवनंतपुरम लॉ एकेडमी से एलएलबी और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलएम की डिग्री प्राप्त की। वे एक प्रखर वक्ता हैं और विधानसभा में जटिल मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए जाने जाते हैं। राजनीति की व्यस्तता के बीच उन्हें किताबें पढ़ने और प्रकृति के करीब रहने का शौक है। वे एक उत्साही ट्रेकर भी हैं और अक्सर पहाड़ों की सैर करना पसंद करते हैं।
वित्तीय स्थिति और कानूनी मामले: हलफनामे से हुआ खुलासा
चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, वी. डी. सतीशन के पास कुल 6.7 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि उन पर 41.5 लाख रुपये की देनदारी भी है। उन्होंने अपनी वार्षिक आय 2.8 लाख रुपये घोषित की है। हलफनामे में यह भी जानकारी दी गई है कि उनके खिलाफ 18 लंबित आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 7 मामले गंभीर प्रकृति के बताए गए हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, उनकी साफ छवि और कार्यशैली ने उन्हें आज केरल के सर्वोच्च पद तक पहुँचा दिया है। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में केरल की नई सरकार के सामने राज्य के विकास की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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