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Health Alert: ‘नेचुरल’ के नाम पर जहर? जानें कैसे सप्लीमेंट्स पहुंचा रहे हैं अंगों को चोट

Health Alert

Health Alert: अक्सर हम “नेचुरल” या “हर्बल” लेबल देखकर यह मान लेते हैं कि कोई भी सप्लीमेंट पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया शोधों के अनुसार, यह धारणा जानलेवा साबित हो सकती है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर्बल और डाइटरी सप्लीमेंट्स को अक्सर खाद्य उत्पादों की श्रेणी में रखा जाता है, जिसका मतलब है कि इन्हें दवाओं की तरह कड़े परीक्षणों से नहीं गुजरना पड़ता। यदि आपका लिवर या किडनी पहले से ही संवेदनशील है, तो ये सप्लीमेंट्स उन पर अतिरिक्त दबाव डालकर उन्हें फेलियर की कगार पर पहुंचा सकते हैं।

Health Alert. ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट: वजन घटाने की चाहत कहीं भारी न पड़ जाए

एक कप ताजी बनी ग्रीन टी पीना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन ‘ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट’ की गोलियां इसके बिल्कुल विपरीत काम कर सकती हैं। ‘क्लिनिकल लिवर डिजीज’ जर्नल के अनुसार, इन सप्लीमेंट्स में कैटेचिन्स (EGCG) की सांद्रता बहुत अधिक होती है। इतनी भारी मात्रा में कैटेचिन्स लिवर की कोशिकाओं में सूजन और गंभीर टॉक्सिसिटी पैदा कर सकते हैं, जिससे पीलिया या लिवर डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।

Health Alert. हाई-डोज प्रोटीन पाउडर: किडनी के फिल्ट्रेशन सिस्टम पर बोझ

जिम जाने वाले युवाओं में प्रोटीन सप्लीमेंट्स का चलन काफी बढ़ा है। हालांकि प्रोटीन मांसपेशियों के लिए जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन पाउडर किडनी के लिए आफत बन सकता है। जब शरीर में प्रोटीन की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, तो किडनी को नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। यह प्रक्रिया किडनी को थका देती है और क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों में स्थिति को बेकाबू कर सकती है।

3. फैट-सोल्यूबल विटामिन: शरीर में टॉक्सिन की तरह जमा होना

विटामिन A, D, E और K ‘फैट-सोल्यूबल’ होते हैं, यानी ये पानी में घुलकर पेशाब के जरिए बाहर नहीं निकलते, बल्कि लिवर और फैट टिश्यू में जमा हो जाते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के विटामिन A की हाई डोज लेना लिवर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर सकता है। इसी तरह, विटामिन D और E की अधिकता भी किडनी के कार्य को प्रभावित करती है और शरीर के भीतर विषाक्तता का कारण बनती है।

4. आयरन सप्लीमेंट और हेमोक्रोमैटोसिस का खतरा

बिना ब्लड टेस्ट कराए आयरन सप्लीमेंट लेना एक बड़ी गलती हो सकती है। ‘जर्नल स्टैटपर्ल्स’ के मुताबिक, शरीर में आयरन की अधिकता हेमोक्रोमैटोसिस जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। इसमें अतिरिक्त आयरन लिवर के टिश्यू में जमा होने लगता है, जिससे लिवर सिरोसिस और अन्य अंगों की विफलता का खतरा बढ़ जाता है।

5. हर्बल उपाय: “प्राकृतिक” होने का मतलब हमेशा सुरक्षित नहीं

कई लोग जड़ी-बूटियों को बिना किसी डर के इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ‘कॉम्फ्री’ और ‘ब्लैक कोहोश’ जैसी हर्ब लिवर टॉक्सिसिटी से सीधे तौर पर जुड़ी पाई गई हैं। वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ‘गार्सिनिया कंबोजिया’ भी लिवर इंजरी के कई मामलों में जिम्मेदार पाया गया है। इन जड़ी-बूटियों की शुद्धता और मात्रा पर कोई सख्त रेगुलेशन न होने के कारण ये और भी खतरनाक हो जाती हैं।

6. मुलेठी और डिटॉक्स पिल्स: ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म पर असर

मुलेठी की जड़ में मौजूद ग्लाइसिराइजिन ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है और शरीर में पोटैशियम का स्तर गिरा सकता है, जो किडनी और दिल के मरीजों के लिए घातक है। वहीं, बाजार में मिलने वाली ‘डिटॉक्स’ या ‘फैट-बर्निंग’ गोलियों में कई बार अज्ञात स्टिमुलेंट्स और डाययूरेटिक्स होते हैं। लिवर को इन रसायनों को तोड़ने के लिए भारी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से गुजरना पड़ता है, जो अंगों की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे खत्म कर देता है।सप्लीमेंट लेना हमेशा बुरा नहीं होता, लेकिन इन्हें अपनी मर्जी से लेना जोखिम भरा है। किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें और समय-समय पर अपने लिवर व किडनी फंक्शन की जांच करवाएं।

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