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एक्सपायर्ड मरहम लगाने से क्या होता है? जानें नुकसान और बचाव

एक्सपायर्ड मरहम लगाने से क्या होता है? जानें नुकसान और बचाव

मरहम पर लिखी हुई एक्सपायरी डेट सिर्फ कानूनन जरूरी नहीं है, बल्कि आपके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी अहम है। एक्सपायर्ड मरहम का केमिकल कंपोजि‍शन बदल सकता है। इससे मरहम में मौजूद दवाइयां, एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड अपना असर खो सकते हैं या हानिकारक रूप ले सकते हैं। कभी-कभी मरहम का रंग, गंध या टेक्सचर भी बदलने लगता है, जो संकेत है कि वह अब इस्तेमाल के योग्य नहीं है। ऐसा मरहम लगाने से त्वचा पर जलन, रैश या एलर्जी हो सकती है, और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए पुरानी दवाओं को हमेशा समय रहते बदलना चाहिए।

क्या एक्सपायरी डेट के बाद मरहम का असर खत्म हो जाता है?

अक्सर दवाओं में एक्सपायरी डेट के बाद उनका सक्रिय तत्व (Active Ingredient) अपनी क्षमता खोने लगता है। मरहम में मौजूद दवाइयां जैसे एंटीबैक्टीरियल एजेंट या एंटीफंगल घटक भी एक्सपायर होने के बाद उतने प्रभावी नहीं रहते। इसका मतलब है कि अगर आप घाव, फुंसी या संक्रमण पर एक्सपायर्ड मरहम लगाते हैं, तो वह असर नहीं दिखा पाएगा, जिससे घाव जल्दी ठीक नहीं होगा और संक्रमण बढ़ सकता है। हालांकि असर पूरी तरह से तुरंत खत्म नहीं होता, पर धीरे-धीरे घटता है, और जोखिम बढ़ता जाता है। इसलिए एक्सपायरी डेट देखते रहना जरूरी है।

एक्सपायर्ड मरहम लगाने से क्या होता है?

एक्सपायर्ड मरहम लगाने से सबसे बड़ा खतरा त्वचा में एलर्जिक रिएक्शन का होता है। जैसे जलन, लालिमा, खुजली, या दाने निकल आना। कुछ मामलों में संक्रमण फैल सकता है, क्योंकि मरहम में मौजूद प्रिजरवेटिव खत्म हो चुके होते हैं, जिससे उसमें बैक्टीरिया या फंगस पनपने लगते हैं। इससे घाव जल्दी भरने के बजाय और बढ़ सकता है। स्टेरॉयड वाले मरहम के मामले में, एक्सपायरी के बाद लगाने से दुष्प्रभाव भी बढ़ सकते हैं। इसलिए, एक्सपायर्ड मरहम को फेंक देना ही समझदारी है।

इसके क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?

  • त्वचा पर रैश, जलन, खुजली और लाल धब्बे।
  • घाव या संक्रमण का और बिगड़ जाना।
  • बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन का खतरा।
  • स्किन पर पिग्मेंटेशन या निशान बनना।
  • कुछ मामलों में, गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (Contact Dermatitis) ।

इन सब कारणों से, डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि एक्सपायर्ड मरहम, लोशन या किसी भी दवा को कभी भी इस्तेमाल न करें। यह एक साधारण सी सावधानी है, पर आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

मरहम का एक्सपायरी डेट कैसे देखें?

हर मरहम या दवा की पैकिंग पर “EXP”, “Expiry Date” या “Use Before” लिखा होता है। यह डेट बताती है कि उस तारीख तक दवा का असर और सुरक्षा गारंटी की जाती है। इसे ध्यान से पढ़ना चाहिए और दवा खरीदते समय भी जांचें कि डेट नजदीक न हो। अगर पैकिंग पर डेट साफ न दिखे या मिट गई हो, तो ऐसी मरहम को इस्तेमाल न करें। इसके अलावा, मरहम की गंध, रंग और बनावट बदल गई हो, तो भी उसे फेंक दें, चाहे डेट सही क्यों न हो।

एक्सपायर्ड मरहम को कैसे फेंके?

एक्सपायर्ड दवाइयों को कूड़े में सीधे फेंकना पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हो सकता है। मरहम या दवाइयों को ऐसी जगह फेंकें, जहां बच्चे या पालतू जानवर न पहुंच सकें। अगर स्थानीय फार्मेसी या हेल्थ सेंटर में मेडिसिन डिस्पोजल बॉक्स है, तो वहां दें। प्लास्टिक कंटेनर में बंद करके, ढक्कन लगा कर फेंकना भी सुरक्षित तरीका है। साथ ही, पानी में बहाना या जलाना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे रसायन पर्यावरण में मिल सकते हैं।

एक्सपायर्ड मरहम से बचने के आसान उपाय

  • हर दवा पर डेट लिखकर रखें।
  • जरूरत से ज्‍यादा दवाइया न खरीदें।
  • मरहम को धूप या नमी वाली जगह न रखें, इससे एक्सपायरी जल्दी हो सकती है।
  • परिवार के बाकी सदस्यों को भी एक्सपायरी चेक करने की आदत डालें।
  • हर 6-12 महीने में दवाओं की अलमारी की सफाई करें।
  • छोटी सी आदत से बड़ा नुकसान रोका जा सकता है।

क्या सभी मरहम की एक्सपायरी एक जैसी होती है?

हर मरहम की एक्सपायरी डेट अलग-अलग हो सकती है, क्योंकि यह उसकी सामग्री, बनाने के तरीके और पैकिंग पर निर्भर करता है। कुछ एंटीबायोटिक या एंटीफंगल मरहम की एक्सपायरी 1–2 साल में हो सकती है, जबकि साधारण मॉइश्चराइजिंग मरहम 2–3 साल तक ठीक रहते हैं। मरहम की ट्यूब खोलने के बाद भी उसकी शेल्फ लाइफ घट सकती है, क्योंकि हवा और बैक्टीरिया के संपर्क से दवा जल्दी खराब हो सकती है। इसलिए सिर्फ पैक पर लिखी डेट ही नहीं, बल्कि खोलने की तारीख भी ध्यान में रखें। कुछ मरहम पर ‘PAO’ (Period After Opening) का निशान होता है, जैसे 6M या 12M, जिसका मतलब है खोलने के 6 या 12 महीने बाद तक इस्तेमाल करें।

क्या एक्सपायर्ड मरहम से इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है?

जी हां, एक्सपायर्ड मरहम सिर्फ असरहीन ही नहीं होती, बल्कि संक्रमण का बड़ा कारण भी बन सकती है। मरहम में प्रिजरवेटिव्स होते हैं, जो बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोकते हैं। एक्सपायर होने के बाद ये प्रिजरवेटिव कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे मरहम में सूक्ष्म जीवाणु या फंगस बढ़ सकते हैं। जब ऐसी मरहम घाव, कट या फोड़े पर लगाई जाती है, तो संक्रमण फैल सकता है, घाव और बढ़ सकता है, और गंभीर मामलों में पस भी बन सकता है। इसलिए एक्सपायर्ड मरहम ‘चल जाएगा’ सोचकर इस्तेमाल करना जोखिम भरा है।

एक्सपायरी डेट के बाद भी असरदार दिखे तो क्या करें?

कई बार मरहम दिखने में सही लगती है, रंग, गंध और बनावट भी ठीक रहती है। ऐसे में लगता है कि इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन याद रखें, दवा के अंदर का सक्रिय तत्व (Active Ingredient) समय के साथ धीरे-धीरे टूटने लगता है, जो आंखों से नहीं दिखता। असरदार दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह सुरक्षित है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों पर जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए एक्सपायरी डेट के बाद मरहम का इस्तेमाल नहीं करना ही समझदारी है, चाहे वह बाहर से ठीक ही क्यों न लगे।

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