बच्चों के लिए कांच की बोतल सबसे सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें कोई केमिकल नहीं होता और दूध का स्वाद भी बरकरार रहता है। कांच की बोतल को गर्म पानी या स्टीम से अच्छी तरह से स्टरलाइज किया जा सकता है, जिससे बैक्टीरिया का खतरा कम हो जाता है। हालांकि, कांच भारी होता है और टूटने का डर रहता है, जिससे छोटे बच्चों के हाथ में देने से पहले ध्यान रखना पड़ता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर कांच की बोतल का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उस पर सिलिकॉन कवर चढ़ा दें, जिससे टूटने की स्थिति में बच्चा चोटिल न हो। कांच की बोतल लंबे समय तक टिकाऊ रहती है और बार-बार इस्तेमाल की जा सकती है।
स्टील की बोतल का इस्तेमाल-क्यों है सुरक्षित विकल्प
स्टेनलेस स्टील की बोतल भी बच्चों के लिए एक अच्छा और सुरक्षित विकल्प है। इसमें दूध का तापमान जल्दी नियंत्रित होता है और यह टूटती भी नहीं है। स्टील की बोतल हल्की भी होती है, इसलिए बच्चे के लिए संभालना आसान रहता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें भी किसी प्रकार का हानिकारक केमिकल नहीं होता, जिससे दूध की गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ता। स्टील की बोतल की सफाई भी आसान होती है, बस सही समय पर गर्म पानी और ब्रश से अच्छी तरह धोना जरूरी है।
बोतल को साफ करने के सर्वोत्तम तरीके
बोतल को साफ रखना बच्चों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। सबसे पहले बोतल को गुनगुने पानी में डिटर्जेंट से धोएं और फिर ब्रश से अंदर तक साफ करें। इसके बाद उबालकर या स्टीमर में कम से कम 5 मिनट तक स्टरलाइज करें। कांच की बोतल को माइक्रोवेव स्टीम स्टरलाइजर में भी रख सकते हैं, जबकि स्टील की बोतल को सीधे उबाल सकते हैं। ध्यान रखें कि बोतल को सुखाने के लिए साफ कपड़े पर उल्टा रखें, ताकि पानी पूरी तरह निकल जाए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर इस्तेमाल के बाद बोतल की सफाई में लापरवाही न करें, क्योंकि गंदगी से इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
प्लास्टिक की बोतल क्यों नहीं चुननी चाहिए
हालांकि प्लास्टिक की बोतल हल्की और सस्ती होती है, लेकिन इसमें BPA और अन्य हानिकारक केमिकल हो सकते हैं जो दूध में घुलकर बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गर्म दूध डालने पर प्लास्टिक की बोतल से केमिकल रिलीज होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्लास्टिक की बोतल लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर बच्चों में हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर असर डाल सकती है। इसलिए बेहतर है कि प्लास्टिक की जगह कांच या स्टील की बोतल का ही इस्तेमाल किया जाए। अगर प्लास्टिक की बोतल का उपयोग करना ही पड़े, तो BPA Free और फूड ग्रेड प्लास्टिक का चयन करें, पर फिर भी इसे बार-बार बदलते रहें।
दूध की बोतल बदलने का सही समय
बोतल का लगातार इस्तेमाल करने पर उसमें स्क्रैच, दरार या रंग बदलने लगता है, जो बैक्टीरिया पनपने के संकेत हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जैसे ही बोतल में इस तरह के बदलाव दिखें, तुरंत नई बोतल ले लेनी चाहिए। कांच की बोतल टूटे या चटकने पर और स्टील की बोतल में जंग लगने पर तुरंत बदलें। प्लास्टिक की बोतल को 2-3 महीने में बदलना ही बेहतर है। बच्चों की सेहत के लिए बोतल की स्थिति को रोज देखना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।
दूध की बोतल का ढक्कन और निपल भी जरूरी है साफ रखना
अक्सर लोग सिर्फ बोतल को साफ करते हैं, लेकिन ढक्कन और निपल की सफाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। निपल में दूध के कण फंस सकते हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। इसलिए हर बार दूध देने के बाद निपल को भी अच्छे से धोएं और स्टरलाइज करें। ढक्कन को भी गर्म पानी में डालकर धोएं और सुखाएं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निपल को हर 2-3 महीने में बदलें, या जैसे ही उसमें दरार या रंग बदलने के लक्षण दिखें। इससे बच्चे को इंफेक्शन से सुरक्षित रखा जा सकता है।
विशेषज्ञ की राय-क्या सबसे सही विकल्प है?
बाल रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि सबसे सुरक्षित विकल्प कांच या स्टील की बोतल है, क्योंकि ये केमिकल मुक्त होती हैं और साफ रखना भी आसान होता है। अगर बच्चे बहुत छोटे हैं और बोतल गिराने का डर है, तो स्टील की बोतल हल्की और मजबूत होने से ज्यादा सुरक्षित रहती है। वहीं कांच की बोतल में दूध लंबे समय तक गर्म रहता है और स्वाद भी बेहतर रहता है। आखिरकार, सफाई सबसे जरूरी है-चाहे आप कोई भी बोतल इस्तेमाल करें, रोजाना स्टरलाइजेशन और समय पर बदलना ही बच्चे को सुरक्षित रखता है।
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