सीटी कैल्शियम स्कोर टेस्ट यानी “कॉरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग” हृदय की धमनियों में जमा कैल्शियम की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है। यह टेस्ट विशेषकर उन लोगों के लिए जरूरी है जिनमें हृदय रोग का जोखिम अधिक होता है।
सीटी कैल्शियम स्कोर टेस्ट क्या है?
सीटी कैल्शियम स्कोर टेस्ट एक नॉन-इनवेसिव इमेजिंग टेस्ट है, जो कार्डियक सीटी स्कैन मशीन द्वारा किया जाता है। यह आपके दिल की कोरोनरी आर्टरीज़ (हृदय की धमनियों) में कैल्शियम के जमाव की मात्रा को मापता है। कैल्शियम का जमाव प्लाक (Plaque) बनने की शुरुआत होती है, जो भविष्य में दिल का दौरा (Heart Attack) या धमनी अवरोध (Artery Blockage) का कारण बन सकता है। यह टेस्ट हृदय रोग के शुरुआती संकेतों को पकड़ने का एक वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीका है।
यह टेस्ट किन लोगों के लिए जरूरी होता है?
यह टेस्ट खासतौर पर उन लोगों को कराया जाना चाहिए जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या पारिवारिक हृदय रोग का इतिहास हो। जिन लोगों की उम्र 40 साल से ऊपर है और जीवनशैली निष्क्रिय है, उनके लिए यह टेस्ट और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। धूम्रपान करने वालों और पुरुषों में यह जोखिम और अधिक होता है। यह टेस्ट न केवल जोखिम का आकलन करता है, बल्कि भविष्य में उठाए जाने वाले उपचार और जीवनशैली परिवर्तनों की दिशा भी तय करता है।
टेस्ट कैसे किया जाता है?
यह टेस्ट एक मल्टी-डिटेक्टर सीटी स्कैन मशीन से किया जाता है जिसमें मरीज को मशीन पर पीठ के बल लेटाया जाता है और बिना किसी दर्द या चुभन के पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। इस दौरान हार्ट के आसपास की इमेजिंग की जाती है जिससे धमनियों में जमा कैल्शियम की गणना की जा सके। रेडियोलॉजिस्ट इस स्कैन को पढ़कर स्कोर तय करते हैं। टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक होता है।
कैल्शियम स्कोर कैसे मापा जाता है?
सीटी कैल्शियम स्कोर को एक संख्यात्मक स्कोर के रूप में दर्शाया जाता है।
- स्कोर 0 है तो धमनियों में कोई कैल्शियम नहीं है।
- 1 से 99 तक स्कोर – कम जोखिम
- 100 से 399 – मध्यम जोखिम
- 400 या उससे ऊपर – उच्च जोखिम
यह स्कोर जितना अधिक होता है, कोरोनरी आर्टरीज में अवरोध (blockage) की संभावना उतनी अधिक होती है। यह स्कोर कार्डियोलॉजिस्ट को यह निर्णय लेने में मदद करता है कि भविष्य में कौन सी दवा या जीवनशैली बदलाव आवश्यक हैं।

टेस्ट की रिपोर्ट से क्या पता चलता है?
इस टेस्ट की रिपोर्ट में हृदय की कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम जमा होने की सटीक मात्रा बताई जाती है। रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह निर्णय ले सकते हैं कि किसी मरीज को स्टेंटिंग या बायपास सर्जरी की आवश्यकता है या नहीं। इसके साथ ही यह भी पता चलता है कि रोगी को हार्ट अटैक का खतरा कितना है। समय रहते सही कदम उठाकर बड़े हृदय रोगों से बचा जा सकता है।
यह टेस्ट कितना सुरक्षित है?
सीटी कैल्शियम स्कोर टेस्ट बिल्कुल सुरक्षित और दर्द रहित होता है। इसमें कोई सुई नहीं लगाई जाती और रेडिएशन की मात्रा भी बहुत कम होती है। गर्भवती महिलाओं को छोड़कर यह लगभग सभी लोगों के लिए सुरक्षित है। टेस्ट के बाद मरीज तुरंत सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है। यदि आपको एलर्जी, हृदय रोग या अन्य कोई समस्या है तो डॉक्टर को पहले सूचित करना चाहिए।
इस टेस्ट के बाद क्या सावधानियां जरूरी हैं?
यदि कैल्शियम स्कोर अधिक आता है, तो डॉक्टर आपको हृदय संबंधी दवाएं, लाइफस्टाइल बदलाव जैसे एक्सरसाइज, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी और नियमित चेकअप की सलाह दे सकते हैं। टेस्ट केवल जोखिम को बताता है, उपचार उसके बाद की प्रक्रिया है। समय पर यह टेस्ट कराने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
सीटी कैल्शियम स्कोर और जीवनशैली के बीच संबंध
कैल्शियम स्कोर यह संकेत देता है कि व्यक्ति को दिल की बीमारी होने की कितनी संभावना है, लेकिन यह अंतिम निर्णय नहीं होता। अगर स्कोर मध्यम या अधिक आता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि दिल की बीमारी निश्चित है, बल्कि यह संकेत है कि जीवनशैली में सुधार करने की आवश्यकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव नियंत्रण, और धूम्रपान व शराब से दूरी जैसी आदतें कैल्शियम जमा को बढ़ने से रोक सकती हैं। साथ ही, इन बदलावों से भविष्य में हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी स्थितियों का खतरा भी कम किया जा सकता है। इसलिए सीटी स्कोर एक चेतावनी की तरह काम करता है, जिससे हम समय रहते अपने स्वास्थ्य को बेहतर दिशा में मोड़ सकते हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए टेस्ट की अहमियत
महिलाओं में आमतौर पर दिल की बीमारियों के लक्षण पुरुषों की तुलना में कम स्पष्ट होते हैं। ऐसे में सीटी कैल्शियम स्कोर टेस्ट महिलाओं के लिए एक प्रभावी जांच साबित हो सकता है, जिससे उनकी कोरोनरी आर्टरी में जमा कैल्शियम का स्तर समय पर जांचा जा सकता है। वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में यह टेस्ट यह निर्धारित करने में मदद करता है कि उन्हें हृदय रोग का कितना खतरा है और क्या कोई गंभीर उपचार की आवश्यकता है। अक्सर बुजुर्ग लोग थकान, सांस फूलना या छाती में हल्की सी जलन को नजरअंदाज कर देते हैं, जो कि दिल की समस्या के संकेत हो सकते हैं। इस टेस्ट से बिना किसी दर्द या जोखिम के स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बीमा और स्वास्थ्य प्लान में टेस्ट की भूमिका
आजकल कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां सीटी कैल्शियम स्कोर टेस्ट को हेल्थ चेकअप पैकेज में शामिल कर रही हैं। इसका कारण यह है कि यह टेस्ट भविष्य में किसी गंभीर हृदय रोग के जोखिम को आंकने में मदद करता है। यदि किसी व्यक्ति का स्कोर अधिक आता है तो बीमा कंपनियां उस आधार पर स्वास्थ्य प्लान का आकलन कर सकती हैं। वहीं, आम आदमी के लिए यह भी लाभ है कि समय रहते परीक्षण से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बन सकती है। कुछ कंपनियां इस टेस्ट को रुटीन हेल्थ स्क्रीनिंग के रूप में शामिल करने पर विचार कर रही हैं ताकि कार्यरत प्रोफेशनल्स या हाई रिस्क कैटेगरी में आने वाले लोग समय रहते सचेत हो सकें।
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