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Tax Bill 2026 : हंगामे के बीच लोकसभा से टैक्स बिल 2026 पास, विपक्ष को चर्चा का मौका नहीं

Tax Bill 2026

Tax Bill 2026 :  लोकसभा ने गुरुवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दलों के सांसद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन में सामान्य चर्चा नहीं हो सकी। इसी दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक को सदन के समक्ष पेश किया और उसे पारित कराने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष के विरोध के बावजूद विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के मंजूर कर लिया गया।

विधेयक का उद्देश्य विदेशी निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा देना

सरकार के अनुसार इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करना और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती प्रदान करना है। इसके साथ ही सरकार विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता उपलब्ध कराकर निवेशकों का विश्वास बढ़ाना चाहती है। सरकार का मानना है कि स्पष्ट कर व्यवस्था और सरल प्रक्रियाओं से भारत में निवेश का माहौल बेहतर होगा तथा वैश्विक कंपनियां यहां उत्पादन गतिविधियों का विस्तार करने के लिए अधिक उत्साहित होंगी।

विपक्ष के संशोधन और सांविधिक प्रस्ताव हुए खारिज

सदन में हंगामे के कारण विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाई। इस दौरान जून 2026 में लागू अध्यादेश को अस्वीकार करने से संबंधित आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा प्रस्तुत सांविधिक संकल्प को भी लोकसभा ने खारिज कर दिया। इसके अलावा विपक्षी सांसद के. राधाकृष्णन, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा पेश किए गए संशोधन प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं किए गए। अंत में सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।

फंड मैनेजरों और विदेशी कंपनियों के लिए नए प्रावधान

संशोधन विधेयक में भारत में कार्य करने वाले विदेशी फंड मैनेजरों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुछ परिस्थितियों में विदेशी निवेश को भारत में प्रत्यक्ष कारोबार के रूप में नहीं माना जाएगा। सरकार ने उन विदेशी कंपनियों के लिए कर राहत की अवधि बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा है, जो भारतीय फैक्ट्रियों को मशीनरी और उपकरण उपलब्ध कराती हैं तथा अनुबंध विनिर्माण के तहत उनके लिए विशेष इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद तैयार कराती हैं। यह कर छूट वित्त वर्ष 2040-41 तक जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र और डेटा सेंटर को मिलेगा लाभ

विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कई विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर तथा उनके प्रमुख पुर्जों और एक्सेसरीज के निर्माण से जुड़ी विदेशी कंपनियों को कर संबंधी राहत देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा भारत में अनुबंध विनिर्माण इकाइयों को पुर्जों की आपूर्ति के लिए कस्टम्स वेयरहाउस में सामान रखने वाली विदेशी कंपनियों को भी 15 वर्षों तक कर छूट देने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। साथ ही भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए कुछ स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डेटा सेंटर को पट्टे (लीज) के आधार पर संचालित करने का भी प्रावधान किया गया है।

डिजिटल भुगतान और कर कानूनों में होंगे बदलाव

विधेयक में संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 तथा आयकर अधिनियम की कुछ धाराओं में संशोधन का भी प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार करने वाले बड़े व्यवसायों के लिए रुपे डेबिट कार्ड, भीम-यूपीआई (BHIM-UPI) क्यूआर कोड और अन्य निर्धारित डिजिटल माध्यमों से भुगतान स्वीकार करना अनिवार्य है। नए संशोधनों के जरिए इन प्रावधानों को और स्पष्ट तथा प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा, कारोबार करना आसान होगा और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार होगा।

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