Mohan Bhagwat On GenZ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि आंदोलन लोकतंत्र में बातचीत और अपनी बात रखने का एक माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की Gen Z पीढ़ी को एंटी नेशनल कहना गलत है। युवाओं के सवालों और उनकी चिंताओं को समझने की जरूरत है, क्योंकि लोकतंत्र में संवाद और विचार-विमर्श की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने Gen Z और Gen Alpha के युवाओं से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने नई पीढ़ी के सोचने के तरीके, उनके सवाल पूछने की आदत और लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर अपने विचार साझा किए।
Gen Z को चाहिए तर्कपूर्ण जवाब और अपनापन
RSS प्रमुख ने कहा कि जब उनकी पीढ़ी युवा थी, तब लोग अक्सर बड़ों की बातों को बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते थे। लेकिन आज की युवा पीढ़ी किसी भी विषय को समझने के लिए सवाल पूछती है और तार्किक जवाब चाहती है।उन्होंने कहा कि Gen Z और Gen Alpha केवल जवाब नहीं चाहते, बल्कि उन्हें अपनापन और संवाद का माहौल भी चाहिए। भागवत ने इसे लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा बताते हुए कहा कि सवाल करना और जवाब तलाशना समाज के विकास का हिस्सा है।
लोकतंत्र में बहस को बताया शास्त्रार्थ की परंपरा
मोहन भागवत ने लोकतांत्रिक चर्चा की तुलना भारतीय परंपरा के शास्त्रार्थ से की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में इसे डिबेट कहा जाता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में विचारों के आदान-प्रदान की पुरानी परंपरा रही है।उन्होंने बताया कि शास्त्रार्थ में केवल बहस नहीं होती, बल्कि दो पक्ष होते हैं—पूर्व पक्ष और उत्तर पक्ष। इसमें किसी विषय के अलग-अलग पहलुओं पर विचार किया जाता है। अलग-अलग मत और प्रतिमत मिलकर किसी मुद्दे की व्यापक तस्वीर सामने लाते हैं।
युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर भागवत का नजरिया
RSS प्रमुख ने कहा कि वह यह नहीं कहेंगे कि Gen Z को विरोध प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध का तरीका संवैधानिक और उचित होना चाहिए।उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं, विशेष रूप से डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों में भी लोकतांत्रिक तरीकों और जिम्मेदार नागरिक भागीदारी का उल्लेख मिलता है। युवाओं को इन विचारों को समझने की आवश्यकता है।
आंदोलन व्यवस्था सुधार के लिए होना चाहिए
मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z केवल विरोध करने के लिए आवाज नहीं उठा रही है, बल्कि उनके सामने वास्तविक समस्याएं हैं, जिनका समाधान जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ होना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना होना चाहिए।उन्होंने युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और समाधान निकालने पर जोर दिया। उनके अनुसार, जब युवा अपनी बात रखते हैं तो उसे विरोध के बजाय सुधार के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
शिक्षा सुधार के लिए बजट के साथ क्रियान्वयन जरूरी
शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा के लिए GDP का 6 प्रतिशत बजट देने की मांग उचित है और इसका समर्थन किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल बजट बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं होगी, बल्कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि शिक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है, बल्कि समाज और सरकार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्या भारती के माध्यम से संचालित हजारों विद्यालयों का उदाहरण देते हुए समाज की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
सोशल मीडिया पर कानून के साथ सोच बदलना जरूरी
RSS प्रमुख ने कहा कि सोशल मीडिया पर केवल कानून और प्रतिबंध लगाकर सभी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके लिए लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाना जरूरी है।उन्होंने कहा कि जब समाज शिक्षा, संवाद और जिम्मेदारी को लेकर जागरूक होगा, तो सरकारें भी जनता की अपेक्षाओं को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगी। मोहन भागवत के अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवाद, सहमति और सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए।
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