Iran Nuclear Deal 2026 : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान में हालिया ‘एपिक फ्यूरी’ ऑपरेशन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ओबामा ने अपने हालिया इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका या तो पुरानी स्थिति में लौट आया है या फिर उसकी हालत पहले से कहीं ज्यादा खराब हो गई है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि हमने एक ऐसे युद्ध में अरबों डॉलर खर्च किए और अपनी सेना पर अत्यधिक दबाव डाला, जिसमें कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी। ओबामा के अनुसार, ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ की गई नई डील और उससे पहले के सैन्य हस्तक्षेप का कोई ठोस तार्किक आधार नहीं है।
2015 की परमाणु डील और ट्रंप का एकतरफा फैसला
ओबामा ने अपने प्रशासन के दौरान 2015 में चीन और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर ईरान के साथ किए गए ऐतिहासिक परमाणु समझौते को याद किया। उन्होंने बताया कि वह समझौता 150 पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज था, जिसे मोसाद और CIA जैसी शीर्ष वैश्विक खुफिया एजेंसियों ने भी बेहद प्रभावी माना था। ओबामा के अनुसार, उस समझौते के जरिए बिना किसी युद्ध के ईरान के 97% यूरेनियम भंडार को हटा लिया गया था। हालांकि, 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को एकतरफा तरीके से रद्द कर दिया था। ओबामा का मानना है कि उस समझौते से पीछे हटने का कोई भी वाजिब कारण नहीं था, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को और अधिक बढ़ा लिया।
ट्रंप का पलटवार: ओबामा डील को बताया विनाशकारी
दूसरी ओर, G7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने दावा किया कि ओबामा का समझौता ईरान को परमाणु हथियार बनाने की सुविधा देता। उन्होंने कहा कि ईरान ने लंबे समय तक दुनिया और मध्य पूर्व का नाजायज फायदा उठाया है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर उन्होंने ओबामा वाली डील को नहीं रोका होता, तो यह इजरायल और पूरे मध्य पूर्व के विनाश का कारण बनती। उन्होंने अपने नए समझौते का बचाव करते हुए कहा कि उनका कदम तेहरान को परमाणु संपन्न होने से रोकेगा और यह किसी दबाव में नहीं, बल्कि रणनीतिक मजबूती के तहत लिया गया है।
युद्धविराम पर ओबामा की उम्मीद और चिंताएं
ओबामा ने लेबनान में हाल ही में हुए युद्धविराम पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन साथ ही फरवरी में शुरू हुए सैन्य संघर्ष के औचित्य पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “युद्धविराम देखकर मुझे खुशी हुई है और मुझे उम्मीद है कि यह कायम रहेगा।” पूर्व राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि देश वर्तमान में गहरे ध्रुवीकरण और उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा महसूस हो रहा है जैसे अमेरिका का लोकतंत्र और नागरिकों के आपसी व्यवहार के गुण बिखर रहे हैं। ओबामा के अनुसार, जनता को अपने चुने हुए अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने के लिए नागरिक जिम्मेदारी का अहसास करना चाहिए।
लोकतंत्र और जवाबदेही की गिरती स्थिति पर चिंता
इंटरव्यू के अंत में ओबामा ने अमेरिकी लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि समाज में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और नागरिक जिम्मेदारियों का स्तर लगातार गिर रहा है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे यह न मानें कि राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर अपने आप पीछे छूट जाएगा। ओबामा का स्पष्ट मानना है कि सरकार की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके शब्द अमेरिका की घरेलू राजनीति और उसकी विदेश नीति—दोनों के प्रति एक गहरी निराशा और भविष्य के लिए आगाह करने वाले संकेत देते हैं।
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