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Middle East News : ईरान डील का असली मास्टरमाइंड, न कतर, न पाकिस्तान, UAE के इस कारोबारी का जलवा

Middle East News

Middle East News : अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता और हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर कतर के अमीर तमीम बिन अल थानी और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नाम चर्चा में थे, लेकिन अब एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस डील को अंतिम रूप देने के पीछे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रभावशाली व्यवसायी शेख तहून बिन जायद अल नाहयान का सबसे बड़ा और निर्णायक हाथ है।

नाहयान की कूटनीतिक चालों के कारण ही यूएई ने क्षेत्रीय शांति की वकालत की, जिसके आगे अमेरिका को भी झुकना पड़ा। नाहयान, जो यूएई राजपरिवार के एक प्रमुख बिजनेस टाइकून हैं और लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं, ने इस डील के साथ मध्य-पूर्व की पूरी भू-राजनीतिक तस्वीर बदल दी है। उनकी इस सक्रियता ने इजराइल को इस पूरे इलाके में कूटनीतिक रूप से काफी हद तक अलग-थलग कर दिया है।

कूटनीतिक चक्रव्यूह: डील को कैसे मिली सफलता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते की राह आसान नहीं थी। अप्रैल में जब पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में बातचीत शुरू हुई थी, तो यूएई ने खुद को अलग कर लिया था। उस वक्त यूएई ने ईरान के साथ संघर्ष का कड़ा रुख अपनाया था, जिसके कारण अमेरिकी वार्ताकार जेडी वेंस को इस्लामाबाद से खाली हाथ लौटना पड़ा था। हालांकि, जब जिम्मेदारी शेख तहून बिन जायद को सौंपी गई, तो उन्होंने सबसे पहले ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से सीधा संवाद स्थापित किया।

उन्होंने न केवल ईरान के साथ संबंध सुधारे, बल्कि रॉयटर्स की खबरों के अनुसार, यूएई ने ईरान की 3 अरब डॉलर की जब्त राशि भी जारी कर दी, जिसके बदले में ईरान ने यूएई पर हमला न करने का आश्वासन दिया। इस आपसी मेल-मिलाप के बाद खाड़ी देशों ने एकजुट होकर डोनाल्ड ट्रंप पर डील के लिए दबाव बनाया। स्वयं ट्रंप ने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि वैश्विक पेट्रोलियम संकट के बीच उनके पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

इजराइल का अलग-थलग पड़ना और बदलती क्षेत्रीय राजनीति

यूएई अब्राहम समझौते के तहत इजराइल का सहयोगी रहा है, लेकिन ईरान के साथ डील के लिए उसने इजराइल का साथ छोड़ने में संकोच नहीं किया। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से लीक हुई वह रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान-इजराइल संघर्ष के दौरान नेतन्याहू ने यूएई की यात्रा की थी। इस रिपोर्ट से यूएई नेतृत्व बेहद नाराज था। नाहयान की कूटनीति ने क्षेत्र में इजराइल को कूटनीतिक घेरेबंदी में डाल दिया है।

भविष्य की चुनौतियां: परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य

अब जब अस्थाई डील पर सहमति बन गई है, तो अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण समझौते को लेकर बैठकें होनी हैं। अमेरिका का प्राथमिक लक्ष्य ईरान के संवर्धित (enriched) यूरेनियम को किसी तीसरे देश में सुरक्षित स्थानांतरित करना और ईरान की सेंट्रीफ्यूज इकाइयों को नष्ट करवाना है। दूसरी ओर, ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है; वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर आधिकारिक तौर पर ‘टोल’ प्रणाली लागू करना चाहता है और चाहता है कि अमेरिका इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दे। यह कूटनीतिक शतरंज का खेल अभी जारी है, जहां हर कदम मध्य-पूर्व की शांति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

India Pakistan Tension : ईरान-अमेरिका डील के बाद पाकिस्तान का बदला तेवर, भारत के खिलाफ फिर उगला जहर

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