आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या के कारण थायराइड एक बेहद गंभीर और आम हेल्थ प्रॉब्लम बनकर उभरी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी को जरा सा भी हल्के में लेना सेहत पर बहुत भारी पड़ सकता है। दरअसल, हमारे गले के ठीक सामने हिस्से में तितली (Butterfly) के आकार की एक छोटी सी ग्रंथि (Gland) मौजूद होती है, जिसे थायराइड ग्रंथि कहा जाता है। इस ग्रंथि का मुख्य काम शरीर के लिए आवश्यक हार्मोनों का निर्माण और उन्हें रिलीज करना होता है। जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा (हाइपरथायरायडिज्म) या जरूरत से बहुत कम (हाइपोथायरायडिज्म) मात्रा में हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है। यह ग्रंटी मुख्य रूप से मानव शरीर के मेटाबॉलिज्म, शारीरिक वजन, ऊर्जा के स्तर और हमारे मूड को सीधे प्रभावित करती है।
महिलाओं में ही क्यों ज्यादा होती है थायराइड की बीमारी, डॉक्टर ने बताए मुख्य कारण
यह एक जगजाहिर तथ्य है कि थायराइड की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में काफी ज्यादा देखी जा रही है। इस विषय पर मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (पटपड़गंज) की प्रिंसिपल डायरेक्टर एंड हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर मीनाक्षी जैन ने विशेष बातचीत में विस्तार से प्रकाश डाला है। डॉ. मीनाक्षी के अनुसार, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों की सक्रियता और मात्रा अधिक होती है। महिलाओं के जीवन में कई ऐसे पड़ाव आते हैं जब इन हार्मोनों में भारी उतार-चढ़ाव होता है; जैसे कि मासिक धर्म (पीरियड्स), गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) और मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति)। इन शारीरिक बदलावों का सीधा और गहरा असर थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। इसके अलावा आनुवंशिकता, भोजन में आयोडीन की कमी, अत्यधिक मानसिक तनाव, ऑटोइम्यून बीमारियां, खराब जीवनशैली, नींद की कमी और धूम्रपान की आदत भी महिलाओं में इसे बढ़ाती है।
क्या थायराइड को जड़ से खत्म किया जा सकता है, जानिए चिकित्सा विज्ञान का सच
अक्सर आम लोगों के बीच यह भ्रांति या गलतफहमी फैली होती है कि थायराइड को कुछ दवाओं के सेवन से हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जा सकता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, अधिकांश मामलों में थायराइड एक दीर्घकालिक (लाइफटाइम) समस्या होती है। इसे पूरी तरह से समाप्त करने की कोई जादुई गारंटी नहीं होती है, लेकिन नियमित रूप से सही डॉक्टर की देखरेख में दवा लेने, संतुलित आहार का सेवन करने और एक अनुशासित व स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से इसे बहुत ही अच्छी तरह से नियंत्रित (कंट्रोल) किया जा सकता है। एक बार जब हार्मोन का स्तर सामान्य हो जाता है, तो इसके कष्टदायक लक्षण पूरी तरह गायब हो जाते हैं और पीड़ित व्यक्ति बिना किसी शारीरिक परेशानी के एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी सकता है। हालांकि, इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर जीवनभर दवा जारी रखनी पड़ सकती है।
थायराइड को कंट्रोल करने में एक्सरसाइज की भूमिका, डेली वॉक से मिलेगा फायदा
थायराइड के लक्षणों को नियंत्रित करने और शरीर के वजन को बढ़ने से रोकने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज करना रीढ़ की हड्डी के समान काम करता है। कसरत करने से शरीर का धीमा पड़ा मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है। शुरुआत में मरीजों को बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट करने के बजाय हल्की से मध्यम एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। प्रतिदिन सुबह या शाम के वक्त कम से कम 30 मिनट की तेज चाल से सैर (ब्रिस्क वॉक) करना, साइकिल चलाना, स्विमिंग करना या अपनी पसंद का डांस (नृत्य) करना इस बीमारी में बेहद फायदेमंद साबित होता है। इससे शरीर में हैप्पी हार्मोनों का स्राव होता है जो तनाव को भी कम करते हैं।
योगासनों और प्राणायाम का जादुई असर, गले की ग्रंथि को सक्रिय करेंगे ये ३ आसन
सनातन भारतीय योग पद्धति में थायराइड ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और सक्रिय बनाने के लिए बेहद प्रभावशाली आसन बताए गए हैं। नियमित रूप से ध्यान (मेडिटेशन) लगाने और गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम जैसे कि ‘नाड़ीशोधन’ और ‘भ्रामरी’ करने से मानसिक तनाव का स्तर तेजी से घटता है। इसके अलावा, जिन योगासनों से गले के हिस्से पर हल्का और सकारात्मक दबाव या खिंचाव पड़ता है, वे थायराइड हार्मोन के असंतुलन को ठीक करने में रामबाण माने जाते हैं। इनमें ‘सर्वांगासन’, ‘हलासन’ और ‘मत्स्यासन’ का नियमित अभ्यास थायराइड ग्रंथि को पुनर्जीवित कर सकता है। हालांकि, इन आसनों को शुरू करने से पहले किसी अनुभवी योग गुरु का मार्गदर्शन या अपने डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह लेना अत्यंत अनिवार्य है।
संतुलित जीवनशैली, सही पोषण और पर्याप्त नींद ही है बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी
कुल मिलाकर देखा जाए तो महिलाओं में थायराइड के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा संबंध उनके आंतरिक हार्मोनल उतार-चढ़ाव और आज की आधुनिक व तनावपूर्ण जीवनशैली से गहराई से जुड़ा हुआ है। यद्यपि इसे शरीर से हमेशा के लिए उखाड़ फेंकना संभव नहीं है, फिर भी सही समय पर ली गई दवा, फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर बैलेंस डाइट, नियमित योग और प्रतिदिन ७ से ८ घंटे की गहरी व सुकून भरी नींद के तालमेल से इसे पूरी तरह अपने काबू में रखा जा सकता है। स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी सी सतर्कता और सजगता बरतकर महिलाएं इस बीमारी के प्रभाव को पूरी तरह शून्य कर सकती हैं और एक स्वस्थ व ऊर्जावान जीवन का आनंद ले सकती हैं।
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