US Iran Tension: आधिकारिक भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सोमवार (25 मई, 2026) को दुनिया के अजूबों में शुमार ऐतिहासिक ताजमहल का दीदार करने पहुंचे। उनकी इस यात्रा को लेकर राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में अचानक उस समय हलचल तेज हो गई, जब हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। ईरानी दूतावास ने सीधे तौर पर अमेरिकी विदेश मंत्री को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस भव्य स्मारक की सुंदरता की सराहना आज अमेरिका कर रहा है, उसके निर्माण में ईरान के बेहद प्रतिभावान और कुशल वास्तुकारों (आर्किटेक्ट्स) की सबसे अहम भूमिका थी।
इसके साथ ही दूतावास ने अमेरिकी नीतियों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो अमेरिका ऐसी अनूठी कलाकृतियों की तारीफ करता है, और दूसरी तरफ आज वही अमेरिका ‘ईरानी सभ्यता को पूरी तरह से मिटाने’ की खुलेआम धमकियां दे रहा है।
मार्को रुबियो ने पत्नी संग किया दीदार और ताजमहल को बताया प्रेम की अद्भुत निशानी
अपनी चार दिवसीय बेहद महत्वपूर्ण भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सोमवार को उत्तर प्रदेश के आगरा शहर पहुंचे। वहां बेहद कड़ी और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्होंने अपनी पत्नी जेनेट रुबियो के साथ संगमरमर से बने इस भव्य ताजमहल का करीब से दीदार किया। इस प्रसिद्ध मुगलकालीन ऐतिहासिक स्मारक की नक्काशी और सुंदरता से प्रभावित होकर रुबियो ने इसकी जमकर सराहना की।
उन्होंने ताजमहल को ‘पूरी दुनिया भर में आपसी प्रेम की सबसे खूबसूरत और बेमिसाल निशानियों में से एक’ के रूप में परिभाषित किया। इस दौरान ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने ताजमहल के मुख्य गुंबद के सामने खड़े होकर तस्वीर खिंचवा रहे मार्को रुबियो और उनकी पत्नी की उस चर्चित फोटो को भी अटैच किया और उनके इस कदम को कूटनीतिक रूप से विरोधाभासी बताया।
इतिहास और वास्तुकला को लेकर ईरानी वाणिज्य दूतावास का सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार
हैदराबाद में स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए लिखा, ‘यदि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इतिहास, कला या प्राचीन वास्तुकला की थोड़ी भी समझ या सही जानकारी होती, तो वे आज गर्व से यहां खड़े होकर तस्वीर खिंचवाने की हिम्मत नहीं करते।’ दूतावास ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए आगे लिखा कि यह विश्व प्रसिद्ध स्मारक असल में तत्कालीन मुगल बादशाह की ईरानी मूल की पत्नी के प्रति अगाध प्रेम की याद में बनाया गया था, जो पूरी तरह से ईरानी वास्तुकारों की अद्वितीय प्रतिभा, कलात्मकता और दूरदर्शिता की एक महान मिसाल है।
दूतावास ने अमेरिकी प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बेहद हास्यास्पद है कि रूबियो के देश यानी अमेरिका की वर्तमान सरकार आज उसी समृद्ध ईरानी सभ्यता को नेस्तनाबूद करने की धमकी दे रही है और लगातार विश्व की दूसरी प्राचीन सभ्यताओं का खुलेआम अपमान कर रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच गहराता कूटनीतिक संकट और डोनाल्ड ट्रंप की विवादित टिप्पणी
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव लगातार एक संवेदनशील स्तर पर बना हुआ है। गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी दोनों देशों पर पलटवार करते हुए मिसाइलें दागी थीं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद दोनों पक्षों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) पर औपचारिक सहमति बन चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वाशिंगटन और तेहरान के बीच जमीनी तनाव अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा और विवादास्पद बयान जारी करते हुए कहा था कि ‘यदि दोनों देशों के बीच कोई ठोस परमाणु समझौता नहीं हुआ, तो आज रात एक पूरी की पूरी प्राचीन सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा।’ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सीधे तौर पर ट्रंप के इसी आक्रामक बयान की ओर इशारा करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री के ताजमहल दौरे पर यह तीखी टिप्पणी की है।
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