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World Breastfeeding Week: स्तनपान से मां और बच्चे दोनों को फायदे, जानें मिथक और सच

World Breastfeeding Week

World Breastfeeding Week:  हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है। इसका उद्देश्य स्तनपान के महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और नई माताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना है। नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे बेहतर पोषण स्रोत माना जाता है। इसमें बच्चे के विकास, मानसिक वृद्धि और मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग केवल बच्चे ही नहीं, मां के लिए भी फायदेमंद

अक्सर लोगों के बीच यह धारणा होती है कि स्तनपान का लाभ सिर्फ बच्चे को मिलता है, लेकिन वास्तव में इसका सकारात्मक प्रभाव मां की सेहत पर भी पड़ता है। डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। ऐसे समय में ब्रेस्टफीडिंग मां को रिकवरी में मदद कर सकती है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, स्तनपान कराने से महिलाओं को कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और भविष्य में कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है।

मिथक: ब्रेस्टफीडिंग से मां का शरीर कमजोर हो जाता है

कई लोगों का मानना है कि लंबे समय तक स्तनपान कराने से मां कमजोर हो जाती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। ब्रेस्टफीडिंग शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यदि मां संतुलित आहार लेती है, पर्याप्त मात्रा में पानी पीती है और शरीर को पर्याप्त आराम देती है, तो स्तनपान से कमजोरी होना जरूरी नहीं है। बल्कि सही खान-पान और देखभाल के साथ मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकते हैं।

मिथक: कुछ महीनों बाद स्तनपान का फायदा नहीं रहता

कुछ लोगों के बीच यह गलत धारणा भी है कि कुछ महीने बाद मां का दूध बच्चे के लिए उपयोगी नहीं रहता। विशेषज्ञों के अनुसार यह बात सही नहीं है। मां और बच्चे की जरूरत के अनुसार लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग जारी रखी जा सकती है। इससे बच्चे को पोषण और रोगों से लड़ने की क्षमता मिलती रहती है, वहीं मां और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता भी मजबूत होता है।

मिथक: दूध कम होने पर तुरंत फॉर्मूला मिल्क देना चाहिए

कई नई माताओं को शुरुआत में लगता है कि उनका दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं बन रहा है। ऐसी स्थिति में तुरंत फॉर्मूला मिल्क शुरू करने के बजाय डॉक्टर या लैक्टेशन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है। कई बार सही तकनीक, बच्चे के सही तरीके से दूध पीने और उचित मार्गदर्शन से दूध की समस्या को दूर किया जा सकता है।

ब्रेस्टफीडिंग से मां की सेहत को मिलते हैं कई लाभ

ACOG के अनुसार, स्तनपान कराने से डिलीवरी के बाद मां के शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में मदद मिल सकती है। यह गर्भाशय को पहले के आकार में वापस आने में सहायता करता है और प्रसव के बाद होने वाली ब्लीडिंग को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

इसके अलावा, शोधों के अनुसार जो महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कुछ बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। स्तनपान मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है।

बच्चे को कितने समय तक करानी चाहिए ब्रेस्टफीडिंग

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध देने की सलाह दी जाती है। छह महीने के बाद बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार अन्य पौष्टिक आहार शुरू किए जा सकते हैं, लेकिन इसके साथ ब्रेस्टफीडिंग भी जारी रखी जा सकती है। स्तनपान कितने समय तक जारी रखना है, इसका फैसला मां और बच्चे की जरूरत तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।

स्तनपान कराने वाली मां को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां को अपने खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी का सेवन और पूरी नींद लेना जरूरी है। यदि मां किसी बीमारी के कारण दवा ले रही है तो डॉक्टर से यह जरूर पूछना चाहिए कि वह दवा स्तनपान के दौरान सुरक्षित है या नहीं।

अगर दूध पिलाते समय दर्द हो, बच्चे को दूध पीने में परेशानी आए या कोई अन्य समस्या महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर या लैक्टेशन विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सही जानकारी और उचित देखभाल से ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है।

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