Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। इस बार चर्चा के केंद्र में कोई पुराना दिग्गज नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय हैं। विजय की नई नवेली पार्टी ‘तमिलगा वेट्टी कड़गम’ (TVK) के चुनावी मैदान में उतरने के ऐलान ने द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसे स्थापित दलों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या विजय अकेले चुनाव लड़ेंगे या फिर दिल्ली की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ हाथ मिलाकर कोई नया चमत्कार करेंगे।
Tamil Nadu Election 2026: बीजेपी का ‘मेगा ऑफर’ और उपमुख्यमंत्री पद की चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स और सियासी हलकों में यह खबर आग की तरह फैली है कि बीजेपी ने विजय को अपने पाले में लाने के लिए एक बहुत बड़ा दांव खेला है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने TVK को आगामी चुनाव में 80 सीटें देने का आकर्षक प्रस्ताव दिया है। इतना ही नहीं, चर्चा यहाँ तक है कि विजय को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाने और केंद्र में भी उचित भागीदारी देने का वादा किया गया है। बीजेपी की इस गहरी रुचि के पीछे विजय की वह विशाल फैन फॉलोइंग है, जो तमिलनाडु के युवाओं और ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त प्रभाव रखती है। कहा जा रहा है कि इस बातचीत को सफल बनाने के लिए बीजेपी एक अन्य राज्य के उपमुख्यमंत्री के माध्यम से मध्यस्थता भी करवा रही है।
Tamil Nadu Election 2026: टीवीके का कड़ा रुख: ‘वैचारिक दुश्मन’ के साथ कोई समझौता नहीं
एक तरफ जहाँ गठबंधन और सीटों के बंटवारे की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ थलापति विजय की पार्टी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। TVK के संयुक्त महासचिव सी टी आर निर्मल कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बीजेपी के साथ किसी भी तरह के चुनावी समझौते का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने इन खबरों को महज अफवाह करार देते हुए बीजेपी को अपनी ‘वैचारिक दुश्मन’ बताया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस तरह की खबरें केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए फैलाई जा रही हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर कुछ जमीनी नेताओं का मानना है कि गठबंधन से जीत की राह आसान हो सकती है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व फिलहाल ‘एकला चलो’ की नीति पर अडिग है।
मुख्यमंत्री की कुर्सी और स्वतंत्र छवि का सवाल
इस संभावित गठबंधन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा नेतृत्व को लेकर फंसा है। रिपोर्ट्स की मानें तो थलापति विजय उपमुख्यमंत्री के पद से संतुष्ट नहीं हैं; उनकी नजर सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। इसके अलावा, विजय के करीबी सलाहकारों को डर है कि इतनी जल्दी एनडीए (NDA) जैसे राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनने से उनकी पार्टी की ‘स्वतंत्र और क्षेत्रीय छवि’ को नुकसान पहुंच सकता है। विजय खुद को द्रविड़ राजनीति में एक ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में पेश करना चाहते हैं। उनका मानना है कि किसी बड़ी पार्टी के साथ जाने से उनका वह मौलिक नैरेटिव कमजोर हो जाएगा, जिसके दम पर उन्होंने फिल्मी करियर छोड़कर राजनीति में कदम रखा है।
चुनाव आयोग का ऐलान और भविष्य की रणनीति
तमिलनाडु की इस खींचतान के बीच आज का दिन निर्णायक साबित होने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग आज शाम 5 राज्यों के साथ तमिलनाडु में भी चुनाव की तारीखों की घोषणा करने जा रहा है। तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक दलों के पास मोलतोल करने का समय कम बचेगा। जहाँ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन फिलहाल गठबंधन के सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं जनता की नजरें थलापति विजय के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या विजय अपने स्वतंत्र विकल्प वाले रुख पर अड़े रहकर इतिहास रचेंगे, या फिर सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए किसी नए गठबंधन का हिस्सा बनेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
