President Security Breach: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अगवानी के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला गरमा गया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस गंभीर चूक पर संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह रिपोर्ट आज शाम 5 बजे तक दिल्ली भेजी जाए। प्रोटोकॉल के अनुसार, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की अगवानी के लिए राज्य के मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री का मौजूद होना अनिवार्य है, लेकिन सिलीगुड़ी दौरे पर राष्ट्रपति के स्वागत में केवल मेयर ही उपस्थित थे।
President Security Breach: कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव: सुरक्षा कारणों पर उठे सवाल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 मार्च को आदिवासी समुदाय के प्रतिष्ठित ‘9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस’ में शामिल होने सिलीगुड़ी पहुंची थीं। मूल रूप से यह भव्य कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित होना तय था, जहाँ हजारों की संख्या में लोगों के आने की उम्मीद थी। हालांकि, अंतिम समय में राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और लॉजिस्टिक समस्याओं का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर (गोशाईपुर) में शिफ्ट कर दिया। इस बदलाव के कारण कार्यक्रम का स्वरूप छोटा हो गया और कई आदिवासी लोग कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित रह गए।
President Security Breach: राष्ट्रपति की नाराजगी: “ममता मेरी छोटी बहन, पर आदिवासियों के साथ ये व्यवहार क्यों?”
कार्यक्रम स्थल बदले जाने और अगवानी में मंत्रियों की अनुपस्थिति पर राष्ट्रपति मुर्मू ने मंच से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं और मैं खुद को बंगाल की बेटी मानती हूँ, लेकिन आज जो हुआ वह दुखद है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिधाननगर में पर्याप्त जगह थी, तो प्रशासन ने वहां मीटिंग की इजाजत क्यों नहीं दी? राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर कहा कि ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कुछ लोग नहीं चाहते कि संथाल समुदाय आगे बढ़े या यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हो।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: पीएम मोदी ने बताया ‘शर्मनाक’ कृत्य
जब राष्ट्रपति शनिवार दोपहर को बागडोगरा पहुंचीं, तो उन्हें रिसीव करने के लिए सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब अकेले प्रतिनिधि थे। न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही कोई राज्य मंत्री वहां मौजूद था। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पीएम मोदी ने इसे ‘शर्मनाक’ करार देते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में देश के राष्ट्रपति के साथ ऐसा व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ। प्रोटोकॉल की इस अनदेखी को केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की ओर से एक बड़ी कूटनीतिक और प्रशासनिक विफलता माना है।
आदिवासी समुदाय की अनदेखी का आरोप: छोटे मैदान पर हुआ विवाद
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में फांसिदेवा और गोशाईपुर के छोटे मैदानों का जिक्र करते हुए कहा कि जगह कम होने के कारण आदिवासी भाइयों को पहुंचने में कठिनाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम ऐसी जगह रखा गया जहां लोगों का पहुंचना मुश्किल था, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि समुदाय के लोगों को कार्यक्रम में आने से रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा, “मुझे नहीं पता कि ममता मुझसे नाराज हैं या नहीं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जरूरी यह है कि आदिवासी समुदाय का भला हो।”
Read More: Insulin Resistance: इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है? जानें इसके लक्षण, गंभीर खतरे और बचाव के सटीक उपाय
