Richest Man in History: जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तब देश में राजसी ठाट-बाट की कोई कमी नहीं थी, लेकिन एक नाम ऐसा था जिसकी दौलत की चर्चा सात समंदर पार तक थी। यह नाम था मीर उस्मान अली खान, जो हैदराबाद रियासत के सातवें और अंतिम निज़ाम थे। उन्हें आधुनिक भारत का पहला अरबपति माना जाता है। उनकी अमीरी का आलम यह था कि साल 1937 में प्रतिष्ठित ‘टाइम मैगजीन’ ने उन्हें अपनी कवर फोटो पर जगह दी और दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया। उनकी रियासत उस दौर में भारत के सबसे संपन्न इलाकों में शुमार थी।
Richest Man in History : कितनी थी नेट वर्थ? अमेरिकी जीडीपी का 2 प्रतिशत हिस्सा
1940 के दशक में जब निज़ाम की दौलत अपने शिखर पर थी, तब उनकी कुल संपत्ति लगभग 2 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। सुनने में यह आंकड़ा आज छोटा लग सकता है, लेकिन उस समय यह अमेरिका की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) का लगभग 2 प्रतिशत था। यदि आज की मुद्रा वैल्यू और महंगाई के हिसाब से इसकी तुलना करें, तो यह संपत्ति लगभग 17 से 20 लाख करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। यह दौलत आज के दिग्गजों जैसे मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की कुल नेट वर्थ से भी कहीं अधिक है।
Richest Man in History: 50 रोल्स-रॉयस और कचरा उठाने वाली गाड़ियों का किस्सा
निज़ाम को लग्जरी गाड़ियों का बेहद शौक था और उनके पास लगभग 50 रोल्स-रॉयस कारों का बेड़ा था। उनके कलेक्शन में 1912 की मशहूर ‘सिल्वर घोस्ट’ भी शामिल थी। उनके बारे में एक दिलचस्प किस्सा मशहूर है कि एक बार लंदन में रोल्स-रॉयस के शोरूम में उन्हें साधारण वेशभूषा के कारण अपमानित किया गया था। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने एक साथ कई गाड़ियाँ खरीदीं और कथित तौर पर उनमें से कुछ का इस्तेमाल शहर का कचरा साफ करने के लिए करवा दिया, ताकि ब्रांड की वैल्यू कम हो सके।
जैकब डायमंड: 1000 करोड़ के हीरे का ‘पेपरवेट’ की तरह इस्तेमाल
निज़ाम के खजाने में दुनिया के सबसे दुर्लभ रत्न मौजूद थे, जिनमें गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरे प्रमुख थे। उनके पास 185 कैरेट का ‘जैकब डायमंड’ था, जो दुनिया के सबसे बड़े हीरों में से एक है। आज के समय में इस अकेले हीरे की कीमत लगभग 1000 करोड़ रुपये है। हैरानी की बात यह है कि निज़ाम इस बेशकीमती रत्न को अपनी मेज पर एक मामूली ‘पेपरवेट’ की तरह इस्तेमाल करते थे। उनके पास गहनों और हीरों का इतना बड़ा भंडार था कि उन्हें रखने के लिए महल में अलग से बड़े कमरों की जरूरत पड़ती थी।
ब्रिटिश राजघराने को तोहफे और आधुनिक हैदराबाद का निर्माण
निज़ाम का रसूख केवल भारत तक सीमित नहीं था। उन्होंने ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ II को उनकी शादी के अवसर पर 300 हीरों से जड़ा एक बेशकीमती ‘कार्टियर नेकलेस’ और टियारा उपहार में दिया था। व्यक्तिगत विलासिता के अलावा, उन्होंने हैदराबाद के विकास में भी अतुलनीय योगदान दिया। उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी, उस्मानिया जनरल अस्पताल और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद जैसे संस्थानों की नींव रखी। इतना ही नहीं, उन्होंने इस क्षेत्र में भारत के पहले बेगमपेट एयरपोर्ट के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाई थी।
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