Acharya Pramod Krishnam : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के पूर्व नेता और कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब वह समय आ गया है जब राहुल गांधी को अपने नाम के आगे से ‘गांधी’ उपनाम हटा देना चाहिए। आचार्य का तर्क है कि राहुल गांधी के व्यक्तित्व और आचरण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों या उनके चरित्र की कोई भी झलक नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि केवल उपनाम लगा लेने से कोई गांधी नहीं बन जाता, इसके लिए त्याग और वैचारिक स्पष्टता की आवश्यकता होती है, जिसका राहुल गांधी में अभाव है।
Acharya Pramod Krishnam : विपक्ष की हताशा: ‘एक-एक करके हार रहे हैं कांग्रेस के सिपाही’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर के नेता भी इस कड़वी सच्चाई से वाकिफ हैं कि राहुल गांधी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसी अनुशासित और मजबूत मशीनरी का मुकाबला करना नामुमकिन है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यह जानते हैं कि वे अब और चुनावी संघर्ष झेलने की स्थिति में नहीं हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस एक-एक करके अपने मजबूत किलों को खो रही है और देश की जनता ने राहुल गांधी को उस ‘गांधी’ के रूप में कभी स्वीकार नहीं किया है, जिसकी छवि वे पेश करने की कोशिश करते हैं।
Acharya Pramod Krishnam : विपक्ष में फूट की आशंका: ‘जल्द छिन सकता है नेता प्रतिपक्ष का पद’
राजनीतिक भविष्यवाणियां करते हुए आचार्य ने कहा कि राहुल गांधी की विफलताओं और चुनावी रणनीतियों में अक्षमता के कारण जल्द ही समूचा विपक्ष उनके खिलाफ लामबंद हो सकता है। उन्होंने अंदेशा जताया कि विपक्षी दल मिलकर उन्हें ‘नेता प्रतिपक्ष’ के पद से हटा सकते हैं। प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब सत्ता के शीर्ष पर मोदी जैसा शक्तिशाली और दूरदर्शी नेता बैठा हो, तो विपक्ष के नेता का व्यवहार अत्यंत गंभीर होना चाहिए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वर्तमान में विपक्ष के नेता की भूमिका एक ‘जोकर’ जैसी बनकर रह गई है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
कांग्रेस से मोहभंग: कल्कि धाम के आचार्य का राजनीतिक सफर
आचार्य प्रमोद कृष्णम कभी कांग्रेस के सबसे मुखर चेहरों में से एक हुआ करते थे। संभल के प्रसिद्ध कल्कि धाम के प्रमुख होने के साथ-साथ वे एक प्रखर आध्यात्मिक गुरु भी हैं। अपनी बेबाक बयानबाजी के कारण वे हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। हालांकि, वर्ष 2024 में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पार्टी से किनारा कर लिया था। उनका मानना है कि कांग्रेस अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है और वर्तमान नेतृत्व पार्टी को रसातल की ओर ले जा रहा है।
मजबूत नेतृत्व बनाम कमजोर विपक्ष: भारतीय राजनीति का नया समीकरण
गाजियाबाद के अपने संबोधन के अंत में आचार्य ने साफ किया कि भारतीय राजनीति अब एक ऐसे दौर में है जहां जनता ठोस परिणाम और मजबूत नेतृत्व चाहती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति केवल विरोध तक सीमित रह गई है, जबकि देश निर्माण के लिए एक वैकल्पिक विजन की आवश्यकता होती है। उनके अनुसार, कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है, अन्यथा आने वाले समय में पार्टी का अस्तित्व पूरी तरह संकट में पड़ सकता है। आचार्य के इस बयान के बाद प्रदेश और केंद्र की राजनीति में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर शुरू होने की संभावना है।
