मिट्टी, चूना या दीवार की पपड़ी जैसी चीजें यदि बच्चों में खाने की आदत है तो इसे मेडिकल साइंस में ‘पिका डिसऑर्डर’ कहा जाता है। यह आदत अक्सर शरीर में जरूरी मिनरल्स जैसे आयरन, जिंक या कैल्शियम की कमी की वजह से होती है। जब शरीर में इन तत्वों की कमी होती है, तो बच्चों को अनजाने में मिट्टी जैसी चीजें खाने की इच्छा होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, इस समस्या को हल्के में न लें और तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
इम्यूनिटी पर असर और इंफेक्शन का खतरा
मिट्टी में तरह-तरह के कीड़े, बैक्टीरिया और परजीवी हो सकते हैं, जो बच्चों के शरीर में पहुंचकर इंफेक्शन फैला सकते हैं। इससे पेट दर्द, दस्त, उल्टी और यहां तक कि गंभीर परजीवी संक्रमण भी हो सकता है। लंबे समय तक मिट्टी खाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है, जिससे बार-बार बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
शरीर में जहर फैलने का डर
मिट्टी में कई बार हानिकारक केमिकल, भारी धातुएं जैसे सीसा या पारा भी होते हैं। अगर बच्चा बार-बार मिट्टी खाता है, तो ये धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर जहर का काम कर सकते हैं। इससे दिमागी विकास पर असर पड़ सकता है, सीखने की क्षमता घट सकती है और ध्यान लगाने में भी मुश्किल हो सकती है। इसलिए इस आदत को जितना जल्दी छुड़ाया जाए, उतना बेहतर है।
दांतों और पाचन तंत्र को नुकसान
मिट्टी में मौजूद कण दांतों की परत को घिस देते हैं, जिससे दांत कमजोर और जल्दी खराब हो सकते हैं। साथ ही मिट्टी खाना पाचन तंत्र पर भी असर डालता है। बच्चों को कब्ज, पेट में दर्द और गैस की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा चलने पर पाचन संबंधी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।
आदत छुड़ाने के लिए संतुलित आहार जरूरी
एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चों को मिट्टी खाने से रोकने का सबसे कारगर तरीका है-उनके भोजन में पौष्टिक चीजें शामिल करना। आयरन, जिंक और कैल्शियम से भरपूर चीजें जैसे पालक, मेथी, अंडे, दूध, फल और ड्राई फ्रूट्स देने से शरीर की जरूरत पूरी होगी और मिट्टी खाने की इच्छा कम होगी। बच्चों को रंग-बिरंगे फल और सब्जियां देकर भी खाने में दिलचस्पी बढ़ाई जा सकती है।
प्यार से समझाएं, डांटे नहीं
बच्चों को बार-बार डांटने या डराने से उनकी आदत बदलने के बजाय जिद बढ़ सकती है। बेहतर है कि प्यार से उन्हें समझाएं कि मिट्टी खाने से क्या नुकसान हो सकता है। कहानियों, चित्रों या वीडियो के जरिए भी यह समझाया जा सकता है। अगर बच्चा मिट्टी खाने लगे तो उसका ध्यान दूसरी चीजों में लगाएं, जैसे खेल, किताब या कुछ क्रिएटिव काम।
डॉक्टर से सलाह लें और टेस्ट कराएं
अगर मिट्टी खाने की आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से मिलकर बच्चे का हेल्थ चेकअप कराएं। जरूरी खून और मल के टेस्ट कराकर यह पता किया जा सकता है कि शरीर में किस मिनरल की कमी है या कहीं परजीवी संक्रमण तो नहीं। सही समय पर इलाज से बच्चों का विकास प्रभावित नहीं होगा और आदत भी छूट जाएगी।
मानसिक विकास पर असर
मिट्टी खाने की आदत सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकती है। मिट्टी में मौजूद हानिकारक रसायन और कीटाणु दिमाग की नसों पर असर डाल सकते हैं, जिससे बच्चा चिड़चिड़ा, सुस्त या एकाग्रता में कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, बार-बार बीमार पड़ने के कारण स्कूल की पढ़ाई भी प्रभावित होती है और बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इस आदत पर शुरुआती दौर में ही ध्यान दें, ताकि बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास सही दिशा में हो सके।
घर के माहौल की भूमिका
बच्चों की आदतों पर घर के माहौल का भी गहरा असर पड़ता है। अगर घर में सफाई का ध्यान न रखा जाए या मिट्टी खुले में पड़ी हो, तो बच्चों में इसे खाने की इच्छा बढ़ सकती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों के खेलने की जगह साफ रखें और घर के कोनों, गमलों या आंगन की मिट्टी को ढककर रखें। इसके साथ ही बच्चों के साथ समय बिताएं और उन्हें स्वस्थ आदतें सिखाएं, ताकि वे गलत चीजों की ओर आकर्षित न हों।
हेल्दी स्नैक्स से ध्यान हटाएं
कई बार बच्चों को मिट्टी खाने की आदत इसलिए भी पड़ती है क्योंकि उन्हें खेलने या कुछ चबाने की आदत होती है। ऐसे में हेल्दी स्नैक्स जैसे गाजर, खीरा, ड्राई फ्रूट्स या रोस्टेड चने बच्चों को दें। इससे उनकी चबाने की आदत भी बनी रहेगी और शरीर को पौष्टिक तत्व भी मिलेंगे। साथ ही बच्चे को पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाएं, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन भी मिट्टी खाने की इच्छा बढ़ा सकता है।
खेल और एक्टिविटी से रखें व्यस्त
बच्चों को खाली बैठने से भी ऐसी आदतें जल्दी लगती हैं। उन्हें खेल, पेंटिंग, डांस या अन्य रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें। जब बच्चे का दिमाग और शरीर दोनों सक्रिय रहते हैं, तो उनका ध्यान मिट्टी खाने जैसी आदतों से हट जाता है। साथ ही बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता भी बढ़ती है, जिससे उनका संपूर्ण विकास होता है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से समाधान
आयुर्वेद के अनुसार, मिट्टी खाने की आदत शरीर में कुछ दोषों के असंतुलन से भी जुड़ी हो सकती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक बच्चों के लिए विशेष हर्बल टॉनिक या चूर्ण की सलाह दे सकते हैं, जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। त्रिफला, शतावरी और आंवला जैसे हर्ब बच्चों की पाचन शक्ति भी बढ़ाते हैं। हालांकि, कोई भी उपाय शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की राय अवश्य लें।
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