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सीढ़ियां चढ़ते ही क्यों फूलने लगती है सांस? जानिए 7 मुख्य कारण

सीढ़ियां चढ़ते ही क्यों फूलने लगती है सांस? जानिए 7 मुख्य कारण

सीढ़ियां चढ़ते ही अगर आपकी सांस फूलने लगे, सीना भारी लगे और थकावट महसूस हो तो यह सिर्फ थकान नहीं, बल्कि शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। यह समस्या आजकल युवाओं में भी देखने को मिल रही है। इसका कारण सिर्फ मोटापा नहीं, बल्कि विटामिन, खून की गुणवत्ता और फेफड़ों की कार्यक्षमता से भी जुड़ा हो सकता है। आइए जानें, कौन-कौन सी कमी इस समस्या के पीछे जिम्मेदार हो सकती है।

शरीर में आयरन की कमी

जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर घटने लगता है। हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब यह पर्याप्त नहीं होता, तो शरीर को जरूरत से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है और नतीजा होता है-जल्दी सांस फूलना। सीढ़ियां चढ़ते समय चक्कर आना, थकान और दिल की धड़कन तेज हो जाना इसके लक्षण हैं। खासतौर पर महिलाओं में आयरन की कमी अधिक पाई जाती है। आयरन युक्त भोजन जैसे हरी सब्जि‍यां, चुकंदर, अनार और गुड़ को डाइट में शामिल करना चाहिए।

विटामिन B12 की कमी

विटामिन B12 हमारे शरीर में ऊर्जा उत्पादन और नसों की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक होता है। इसकी कमी से मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं और शरीर में थकावट बनी रहती है। सीढ़ियां चढ़ते समय जब शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए होती है, तब B12 की कमी बाधा बनती है, जिससे सांस फूलने लगती है। इस विटामिन की कमी से याददाश्त कमजोर होना, झनझनाहट और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखते हैं। विटामिन B12 पाने के लिए दूध, पनीर, अंडे, मछली और सप्लीमेंट्स का सहारा लेना चाहिए।

विटामिन D की कमी

विटामिन D की कमी से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। इससे हल्की-सी शारीरिक गतिविधि भी थका देती है और सांस फूलने लगती है। यह विटामिन मांसपेशियों के ऊर्जा उपयोग को संतुलित करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाता है। लंबे समय तक इसकी कमी से व्यक्ति सुस्ती, डिप्रेशन और सांस की तकलीफ महसूस करता है। धूप में रोज 20-30 मिनट तक बैठना, विटामिन D युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अंडा, मशरूम और सप्लीमेंट लेना जरूरी होता है।

फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी

अगर फेफड़ों की क्षमता कमजोर हो गई है, तो थोड़ी सी भी मेहनत में सांस फूलने लगती है। धूम्रपान, प्रदूषण या अस्थमा जैसे रोग फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। इससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बाधित होता है और शरीर को जरूरत के अनुसार ऊर्जा नहीं मिल पाती। फेफड़ों को मजबूत बनाए रखने के लिए प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करने चाहिए। नियमित एक्सरसाइज और साफ वातावरण में रहना भी जरूरी है।

एनीमिया (रक्ताल्पता)

एनीमिया, यानी खून की कमी, सांस फूलने की सबसे आम वजहों में से एक है। इसमें शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बनतीं या उनका आकार और कार्यक्षमता घट जाती है। इससे शरीर तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और सीढ़ियां चढ़ने जैसे साधारण कार्य में भी दम फूलने लगता है। थकावट, चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाना और नींद में बेचैनी इसके अन्य लक्षण हैं। आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12 और प्रोटीन से भरपूर भोजन इस स्थिति को सुधार सकता है।

अधिक वजन और शारीरिक निष्क्रियता

अगर शरीर का वजन ज्‍यादा है और फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम होती है, तो थोड़ी सी मेहनत में भी शरीर जवाब देने लगता है। मोटापा फेफड़ों और हृदय पर दबाव डालता है जिससे सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में परेशानी होती है। साथ ही, निष्क्रिय जीवनशैली मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति को कम कर देती है। रोजाना हल्का व्यायाम, ब्रिस्क वॉक और स्ट्रेचिंग से धीरे-धीरे स्टैमिना बढ़ाया जा सकता है, जिससे यह समस्या दूर हो सकती है।

थायरॉइड या हॉर्मोनल असंतुलन

थायरॉइड ग्रंथि का असंतुलन शरीर की ऊर्जा प्रणाली को प्रभावित करता है। हाइपोथायरॉइडिज्‍म की स्थिति में शरीर सुस्त पड़ जाता है और शारीरिक मेहनत करने पर जल्दी थकान व सांस फूलना होने लगता है। वहीं, हाइपरथायरॉइडिज्‍म में भी दिल की धड़कन बढ़ जाती है जिससे दम फूलने लगता है। हॉर्मोन की नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा बताए अनुसार उपचार बहुत जरूरी होता है। संतुलित आहार और तनाव रहित जीवनशैली थायरॉइड को कंट्रोल में रखने में मदद करती है।

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