Headline
Bomb Threat
Maharashtra Bomb Threat : RSS मुख्यालय और महाराष्ट्र CM ऑफिस को बम धमकी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
TMC Rebels
TMC Rebels : ममता बनर्जी को तगड़ा झटका! टीएमसी के बागी सांसदों की लिस्ट जारी, संसद में बढ़ी हलचल
NDA Meeting
NDA Meeting : NDA बैठक में पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी का झालमुरी मोमेंट, भारत मंडपम में अनोखा राजनीतिक दृश्य
PM Modi Speech
PM Modi Speech : पीएम मोदी ने कांग्रेस ग्रोथ रेट बयान दिया, कहा- 2014 से पहले अस्थिरता का दौर, जनता ने एनडीए पर जताया भरोसा
UPSC Preparation
UPSC Preparation : यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तैयारी, सामान्य अध्ययन के 50 महत्वपूर्ण प्रश्न और सटीक उत्तर
Share Market Today
Share Market Today: हरे निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स 370 अंक उछला, रिलायंस-HUL चमके
Modi Cabinet Reshuffle
Modi Cabinet Reshuffle : मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज, राज्यसभा चुनाव के बाद होगा बदलाव
Prime Minister Modi
Prime Minister Modi : नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ने पर बोले पीएम मोदी, कहा- सबसे बड़ी कसौटी जनता का विश्वास
US Iran Conflict
US Iran Conflict : अमेरिका और ईरान में छिड़ा महायुद्ध, ईरानी विदेश मंत्री ने दी फारस की खाड़ी छोड़ने की खुली चेतावनी

Heart Disease : माइग्रेन से बढ़ सकता है दिल की बीमारियों का खतरा, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Heart Disease

Heart Disease : माइग्रेन को सामान्यतः लोग केवल सिरदर्द की एक गंभीर और कष्टदायक समस्या के रूप में देखते हैं, लेकिन इसके शारीरिक प्रभाव सिर्फ सिर तक ही सीमित नहीं होते हैं। हालिया वर्षों में चिकित्सा वैज्ञानिकों ने माइग्रेन और शरीर की अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के बीच छिपे गहरे संबंधों को समझने के लिए कई महत्वपूर्ण शोध किए हैं। इसी कड़ी में स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) के प्रतिष्ठित जर्नल ‘द जर्नल ऑफ हेडेक एंड पेन’ (The Journal of Headache and Pain) में एक नया अध्ययन प्रकाशित हुआ है।

इस स्टडी के चौंकाने वाले निष्कर्षों के मुताबिक, बार-बार माइग्रेन के दौरों से जूझने वाले मरीजों और गंभीर हार्ट डिजीज (दिल की बीमारियों) के जोखिम के बीच एक गहरा संबंध हो सकता है। हालांकि, यह अध्ययन यह दावा नहीं करता कि माइग्रेन ही सीधे तौर पर दिल की बीमारियों को पैदा करता है, बल्कि यह दोनों समस्याओं के बीच एक मजबूत कड़ियों की तरफ इशारा करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का दृढ़ता से मानना है कि अब माइग्रेन को महज एक सामान्य सिरदर्द मानकर नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

माइग्रेन के प्रमुख लक्षण और दैनिक जीवन पर इसका नकारात्मक प्रभाव

माइग्रेन वास्तव में एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मरीज को सिर के एक हिस्से में अत्यधिक तेज और असहनीय टीस मारने वाला सिरदर्द होता है। इस तेज दर्द के साथ-साथ पीड़ित व्यक्ति को मतली (जी मिचलाना), उल्टी होना, तेज रोशनी (फोटोफोबिया) या तीखी आवाजों (फोनोफोबिया) के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।

यह बीमारी इतनी कष्टदायक होती है कि यह व्यक्ति की रोजमर्रा की सामान्य जिंदगी, कामकाजी क्षमता और मानसिक सुकून को पूरी तरह से तहस-नहस कर सकती है। जहां कुछ लोगों को समय-समय पर या महीनों में एक-आध बार इसके दौरे पड़ते हैं, वहीं कई मरीजों में यह समस्या बेहद कम अंतरालों पर बार-बार देखी जाती है। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि इस नई स्टडी में क्या तथ्य सामने आए हैं और दिल की सेहत को लेकर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

नई रिसर्च के अनुसार माइग्रेन और कार्डियोवैस्कुलर जोखिमों के बीच संबंध

इस विशेष शोध कार्य में शोधकर्ताओं ने माइग्रेन की पुनरावृत्ति और दिल की विभिन्न बीमारियों के बीच मौजूद वैज्ञानिक संबंधों का बहुत ही बारीकी से विश्लेषण किया है। इस व्यापक अध्ययन के परिणामों में पाया गया कि जो लोग माइग्रेन की पुरानी समस्या से पीड़ित हैं, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD), कोरोनरी हार्ट डिजीज और इस्केमिक स्ट्रोक (दिमाग का दौरा) होने का खतरा काफी ज्यादा देखा गया। रिसर्चर्स के स्पष्ट शब्दों के मुताबिक, माइग्रेन केवल तंत्रिका तंत्र या सिरदर्द का एक विकार मात्र नहीं हो सकता, बल्कि इसके तार सीधे तौर पर हमारे हृदय और रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) के स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़े हो सकते हैं।

45 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में दिल की बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा

शोध के महत्वपूर्ण निष्कर्ष: इस वैज्ञानिक अध्ययन में एक और बेहद चिंताजनक बात सामने आई है कि माइग्रेन और दिल की बीमारी का यह खतरनाक संबंध 45 वर्ष से कम उम्र की युवा महिलाओं में सबसे ज्यादा मजबूत और स्पष्ट दिखाई दिया।

इसके अलावा, जिन माइग्रेन रोगियों में पहले से ही कुछ पारंपरिक स्वास्थ्य जोखिम मौजूद थे—जैसे कि धूम्रपान की लत, अत्यधिक मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) या अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल—उनमें हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना अधिक पाया गया। इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि जिन लोगों को बार-बार माइग्रेन के तीव्र दौरे पड़ते हैं, उन्हें अपने न्यूरोलॉजिस्ट के साथ-साथ अपने दिल की सेहत की नियमित जांच पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यह केवल दोनों के सह-संबंधों को उजागर करता है, इसे सीधे तौर पर कारण और प्रभाव के रूप में प्रमाणित करने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।

माइग्रेन के इन गंभीर लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज, तुरंत लें डॉक्टरी सलाह

यदि आपको होने वाला सिरदर्द अचानक से असहनीय रूप से तेज हो जाए, या इसका पैटर्न आपके पहले होने वाले माइग्रेन के दर्द की तुलना में बिल्कुल अलग और नया महसूस होने लगे, तो इसे खतरे की घंटी समझना चाहिए। इसके अलावा, यदि सिरदर्द बार-बार होने लगे और उसके साथ ही मरीज को बोलने या शब्दों को समझने में परेशानी हो, शरीर के किसी विशेष हिस्से या हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो, चक्कर आने लगें, आंखों के सामने धुंधलापन छा जाए या मरीज बेहोश होने लगे, तो बिना एक पल की भी देरी किए तुरंत नजदीकी डॉक्टर या आपातकालीन चिकित्सा कक्ष से संपर्क स्थापित करना चाहिए।

इसी तरह, यदि माइग्रेन के बार-बार आने वाले दौरों के कारण आपकी दैनिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो रही हों और सामान्य पेनकिलर दवाओं के नियमित सेवन के बावजूद दर्द में कोई राहत न मिल रही हो, तब भी किसी योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेकर उचित न्यूरोलॉजिकल और कार्डियक जांच करवाना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।

बार-बार होने वाले माइग्रेन के दौरों को नियंत्रित करने के जरूरी और आसान उपाय

यदि आप या आपके परिवार में कोई भी सदस्य बार-बार होने वाले माइग्रेन की इस पुरानी समस्या से ग्रसित है, तो उन्हें अपनी जीवनशैली में कुछ बेहद जरूरी और सकारात्मक सुधार करने चाहिए। इसके लिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त और गहरी नींद लेना, ध्यान या योग के माध्यम से मानसिक तनाव को पूरी तरह से नियंत्रित रखना और एक अनुशासित व नियमित दिनचर्या अपनाना बेहद फायदेमंद माना जाता है।

इसके अलावा, मरीजों को उन व्यक्तिगत ट्रिगर्स (कारणों) की पहचान करने की कोशिश करनी चाहिए जो उनके माइग्रेन के दर्द को अचानक भड़का देते हैं, जैसे कि कुछ विशेष प्रकार की खाद्य सामग्रियां, तेज धूप, कड़क रोशनी, अत्यधिक शोर या लंबे समय तक भूखे रहना और नींद की कमी होना। शरीर में पानी की कमी न होने दें, इसके लिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, एक संतुलित व पौष्टिक डाइट लें और हमेशा डॉक्टर की लिखित सलाह के अनुसार ही माइग्रेन की विशिष्ट दवाओं का सेवन करें। यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो विशेषज्ञ से मिलकर अपनी मुकम्मल जांच कराएं।

Read More :  INDIA Bloc Meeting : केरल में हार के बाद INDIA ब्लॉक की मीटिंग में शामिल होगी CPIM? घमासान के बीच सामने आया बयान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
स्किन ऑयली है? कलाई पर उंगली रखकर पहचानें हार्ट रिदम की समस्या सेहत के लिए कितना फायदेमंद है दलिया? नींबू पानी में भूलकर भी न डालें ये चीज क्या डायबिटीज में रोज जामुन खाना सही है?