Sabudana for Diabetes : भारतीय संस्कृति में साबूदाना फलाहार का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। विशेष रूप से उपवास या व्रत के दौरान साबूदाने की खिचड़ी, वड़ा, खीर और पापड़ बड़े चाव से खाए जाते हैं। बहुत से लोग साबूदाने को ‘व्रत वाले चावल’ की संज्ञा देते हैं और इसे अनाज न मानकर निर्भय होकर इसका सेवन करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से, विशेषकर यदि आप मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी हैं, तो साबूदाना आपकी सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। अक्सर लोगों को इस बात की सही जानकारी नहीं होती कि सफेद मोतियों जैसा दिखने वाला यह खाद्य पदार्थ शरीर में जाकर रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर को कितनी तेजी से प्रभावित करता है।
Sabudana for Diabetes : ग्लाइसेमिक इंडेक्स का गणित: साबूदाना क्यों है खतरनाक?
मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग के सीनियर डायरेक्टर (डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक डिजीज) डॉ. आलोक जोशी के अनुसार, किसी भी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) यह तय करता है कि वह शरीर में कितनी जल्दी शुगर बढ़ाएगा। साबूदाना का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी उच्च (High GI) होता है, जो लगभग 70 से 85 के बीच रहता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि साबूदाना खाते ही यह बहुत तेजी से ग्लूकोज में बदल जाता है और खून में शुगर के स्तर को अचानक बढ़ा (Spike) देता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए लो-जीआई (Low GI) वाले खाद्य पदार्थ बेहतर माने जाते हैं, जबकि साबूदाना इस पैमाने पर बिल्कुल विपरीत खड़ा है।
Sabudana for Diabetes : पोषक तत्वों का अभाव: कार्बोहाइड्रेट की अधिकता और फाइबर की कमी
साबूदाना मुख्य रूप से शुद्ध कार्बोहाइड्रेट यानी स्टार्च से बना होता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की मात्रा न के बराबर होती है। सबसे बड़ी कमी इसमें ‘फाइबर’ का न होना है। फाइबर वह तत्व है जो भोजन के पचने की गति को धीमा करता है और शुगर को धीरे-धीरे रक्त में छोड़ता है। चूंकि साबूदाने में फाइबर और प्रोटीन बहुत कम होते हैं, इसलिए इसे खाने के बाद पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस नहीं होता। परिणामस्वरूप, व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और वह अधिक कैलोरी का सेवन कर लेता है, जो शुगर के मरीजों के लिए वजन बढ़ने और अनियंत्रित डायबिटीज का कारण बनता है।
अगर साबूदाना खाना ही है, तो नुकसान कम करने के ये हैं तरीके
विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर के मरीजों को साबूदाना खाने से बचना चाहिए, लेकिन यदि कभी स्वाद के लिए या मजबूरी में इसे खाना ही पड़े, तो कुछ सावधानियां बरतकर इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है:
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प्रोटीन के साथ जुगलबंदी: साबूदाने को अकेले खाने के बजाय उसे प्रोटीन युक्त चीजों जैसे—दही, पनीर या मूंगफली के साथ मिलाकर खाएं। प्रोटीन शुगर के अवशोषण की गति को धीमा कर देता है।
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फाइबर का तड़का: साबूदाना खिचड़ी बनाते समय उसमें ढेर सारी हरी सब्जियां जैसे—बीन्स, गाजर और लौकी डालें। सब्जियों का फाइबर शुगर स्पाइक को रोकने में मदद करेगा।
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मात्रा का नियंत्रण: एक बार में बहुत अधिक मात्रा में साबूदाना न खाएं। छोटी कटोरी में सीमित सर्विंग ही लें।
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खाली पेट से बचें: कभी भी सुबह उठते ही या खाली पेट साबूदाने का सेवन न करें, क्योंकि इस समय शुगर स्पाइक का खतरा सबसे अधिक होता है।
किन लोगों के लिए साबूदाना है पूरी तरह वर्जित?
डायबिटीज की श्रेणी में भी कुछ खास स्थितियां ऐसी हैं जिनमें साबूदाना बिल्कुल जहर के समान काम कर सकता है। जिन लोगों की शुगर पहले से ही अनियंत्रित (Uncontrolled Sugar) रहती है, उन्हें साबूदाना भूलकर भी नहीं छूना चाहिए। इसके अलावा, जो मरीज इंसुलिन पर निर्भर हैं या जिनकी दवाइयां हाई डोज में चल रही हैं, उन्हें भी इसका त्याग करना चाहिए। मोटापे से ग्रस्त (Overweight) या ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ की समस्या झेल रहे लोगों के लिए साबूदाना वजन और शुगर दोनों को अनियंत्रित कर सकता है।
डॉक्टर की सलाह है सबसे जरूरी
साबूदाना भले ही स्वादिष्ट और पारंपरिक हो, लेकिन डायबिटीज मैनेजमेंट में यह एक बाधा है। व्रत के दौरान अक्सर लोग अधिक मात्रा में साबूदाना खा लेते हैं, जिससे अचानक तबीयत बिगड़ने का खतरा रहता है। बेहतर यही है कि आप साबूदाने के बजाय व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा या समा के चावल जैसे विकल्पों को चुनें, जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स साबूदाने की तुलना में कम होता है। किसी भी नए खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से परामर्श अवश्य लें।
