Ayodhya Ram Navami 2026: उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को रामनवमी के पावन अवसर पर एक बार फिर इतिहास रचा गया। प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव पर अयोध्या के भव्य राम मंदिर में ‘सूर्य तिलक’ का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा अवसर था जब भगवान रामलला का सूर्य की किरणों से अभिषेक किया गया। ठीक दोपहर 12 बजे, जब पूरा देश राम जन्मोत्सव की खुशियों में डूबा था, तब अभिजीत मुहूर्त के दौरान सूर्य की नीली और सुनहरी किरणों ने प्रभु के ललाट को आलोकित कर दिया। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा।
Ayodhya Ram Navami 2026: विज्ञान और तकनीक का चमत्कार
रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणों को सटीक रूप से पहुंचाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक और प्राचीन खगोल विज्ञान का बेहतरीन समन्वय किया है। इस विशेष ‘सूर्य तिलक’ प्रक्रिया के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों का उपयोग कर लगभग 65 फीट लंबा एक जटिल सिस्टम तैयार किया गया था। इस प्रणाली में 4 उच्च गुणवत्ता वाले लेंस और 4 विशेष दर्पण (मिरर) लगाए गए थे। जैसे ही सूर्य दोपहर के शिखर पर पहुंचा, पाइप के भीतर लगे दर्पणों ने किरणों को परावर्तित किया और लेंस के माध्यम से उन्हें केंद्रित करते हुए सीधे गर्भगृह में विराजमान रामलला के मस्तक के मध्य भाग तक पहुंचाया।
Ayodhya Ram Navami 2026: धार्मिक अनुष्ठान और 56 भोग
सूर्य तिलक के साथ ही प्रतीकात्मक रूप से रामलला का जन्म हुआ, जिसके बाद गर्भगृह में आध्यात्मिक वातावरण और गहरा हो गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर 14 मुख्य पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ प्रभु की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। दिव्य तिलक के तुरंत बाद भगवान की भव्य आरती की गई। परंपरा के अनुसार, सूर्य तिलक की प्रक्रिया के पश्चात कुछ समय के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए ताकि भगवान को विश्राम और भोग अर्पित किया जा सके। इस विशेष अवसर पर रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग लगाया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के मिष्ठान और पकवान शामिल थे।
भक्तों का जनसैलाब: 10 लाख श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन
रामनवमी के इस महापर्व पर अयोध्या में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 10 लाख श्रद्धालु राम जन्मभूमि परिसर में दर्शन के लिए पहुंचे हैं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की है। जगह-जगह एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि जो लोग मुख्य मंदिर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे बाहर से ही सूर्य तिलक के इस अलौकिक दृश्य का दर्शन कर सकें।
दर्शन के समय में बदलाव: 18 घंटे खुला रहेगा राम मंदिर का द्वार
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। आम दिनों के मुकाबले भक्तों को आज 3 घंटे अतिरिक्त दर्शन करने का अवसर मिल रहा है। रामलला के दर्शन अब सुबह 5 बजे से शुरू होकर रात 11 बजे तक, यानी कुल 18 घंटे लगातार चल रहे हैं। सामान्य दिनों में यह समय सुबह 6:30 से रात 9:30 बजे तक रहता था। शुक्रवार की सुबह 5:30 बजे ही भगवान की मंगल आरती की गई, जिसमें प्रभु को विशेष रूप से पीतांबर (पीले वस्त्र) धारण कराए गए थे, जो उनके तेज को और बढ़ा रहे थे।
अयोध्या में त्रेतायुग जैसी भव्यता और हर्षोल्लास
अयोध्या में हुआ यह सूर्य तिलक न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक भी है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह दूसरी रामनवमी है जो त्रेतायुग की याद दिला रही है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह ‘सूर्य तिलक’ प्रणाली हर साल रामनवमी पर इसी तरह सूर्य देव के माध्यम से प्रभु का अभिषेक करेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह एक ऐसा क्षण है जिसे वे जन्म-जन्मांतर तक अपनी स्मृतियों में संजोकर रखना चाहते हैं।
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