Census 2027 Portal : भारत की आगामी डिजिटल जनगणना 2027 की प्रक्रिया के बीच एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर अरुणाचल प्रदेश के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शहर ‘पासीघाट’ को चीनी नाम ‘मेडोग’ के रूप में दर्शाया गया। इस तकनीकी खामी ने न केवल सुरक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया, बल्कि डिजिटल सिस्टम की सटीकता और डेटा सुरक्षा पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। यद्यपि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस त्रुटि को सुधार लिया है, लेकिन सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र के साथ ऐसी गलती ने हड़कंप मचा दिया।
Census 2027 Portal : पूर्व वायुसेना अधिकारी ने किया गंभीर चूक का पर्दाफाश
इस गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ जब भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन मोहंतो पांगिंग पाओ जनगणना 2027 के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर अपना पंजीकरण (Registration) कर रहे थे। पोर्टल का उपयोग करते समय उनकी नजर मैप और स्थान चयन की सूची पर पड़ी, जहाँ पासीघाट का नाम चीनी शहर ‘मेडोग’ (Medog) दिखाई दे रहा था। ग्रुप कैप्टन पाओ ने तुरंत इस विसंगति को राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर साझा किया। उनकी सतर्कता के कारण यह मुद्दा तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद सरकार और संबंधित विभाग हरकत में आए।
Census 2027 Portal : प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी सुधार
विवाद बढ़ते ही रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Census Commissioner) के कार्यालय ने तत्काल संज्ञान लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर मानचित्र की सुविधा प्रदान करने वाले ‘मैप सर्विस प्रोवाइडर’ की ओर से यह तकनीकी त्रुटि हुई थी। सर्विस प्रोवाइडर को निर्देश जारी कर कुछ ही घंटों के भीतर पोर्टल से चीनी नाम हटाकर उसे पुनः ‘पासीघाट’ कर दिया गया। सरकार ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी भौगोलिक त्रुटि को रोकने के लिए डेटा का पुनः सत्यापन किया जा रहा है ताकि किसी भी क्षेत्र की पहचान के साथ कोई गलत छेड़छाड़ न हो।
जनगणना 2027: डिजिटल डेटा संग्रह का पहला चरण जारी
ज्ञात हो कि जनगणना 2027 का पहला चरण 16 अप्रैल 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। इस चरण के तहत वर्तमान में देश के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘हाउस लिस्टिंग’ (मकानों की सूची बनाना) और ‘हाउसिंग सेंसस’ का कार्य किया जा रहा है। यह भारत के इतिहास की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है, जिसमें कागज के बजाय मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य देश की जनसांख्यिकी का सटीक और वास्तविक डेटा तैयार करना है।
सेल्फ-एन्यूमरेशन सुविधा और नागरिक भागीदारी
गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल माध्यमों के प्रति जनता का उत्साह बढ़ रहा है। अब तक लगभग 12 लाख परिवारों ने ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (स्वयं गणना) की सुविधा का सफलतापूर्वक उपयोग किया है। इस प्रक्रिया में नागरिक पोर्टल पर जाकर अपना विवरण खुद दर्ज कर सकते हैं, जिसे बाद में फील्ड एन्यूमरेटर्स (गणना कर्मियों) के साथ एक विशिष्ट आईडी साझा करके सत्यापित किया जाता है। मंत्रालय का मानना है कि डिजिटल पद्धति से डेटा कलेक्शन की गति तेज होगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी, बशर्ते पोर्टल की तकनीकी खामियों पर नियंत्रण रखा जाए।
सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता और भविष्य की चुनौतियां
पासीघाट जैसे संवेदनशील क्षेत्र का नाम गलत दिखना केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से एक बड़ी चिंता है। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने के दावों के बीच, भारतीय सरकारी पोर्टल पर ऐसी गलती सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल जनगणना के लिए उपयोग किए जा रहे ‘मैप लेयर्स’ का गहन ऑडिट होना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और भारतीय भूभागों का चित्रण पूरी तरह सटीक और त्रुटिहीन रहे। प्रशासन अब डेटा सिक्योरिटी और सटीकता को लेकर अत्यधिक सावधानी बरत रहा है।
