Digital Census 2026 : भारत में आधुनिक और तकनीक आधारित शासन की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश में आगामी 1 अप्रैल 2026 से 16वीं जनगणना की औपचारिक शुरुआत होने वाली है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ होगी, जिसमें कागज और पेन के बजाय मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें पहली बार आधिकारिक रूप से जातिगत जनगणना का कॉलम भी जोड़ा गया है। केंद्र सरकार ने इस महाभियान के लिए 33 महत्वपूर्ण सवालों की एक विस्तृत सूची (Questionnaire) तैयार की है, जो हर भारतीय परिवार के रहन-सहन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आईना बनेगी।
Digital Census 2026 : जनगणना नहीं, यह होगी हर भारतीय की ‘डिजिटल कुंडली’
16वीं जनगणना केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक-एक भारतीय की विस्तृत ‘कुंडली’ की तरह होगी। इसमें पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और युवाओं के डेटा के साथ-साथ उनके जन्म-मृत्यु, शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और जीवन स्तर का पूरा लेखा-जोखा होगा। सरकार इस डेटा का उपयोग भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं के निर्माण के लिए आधार के रूप में करेगी। घर, ऑफिस, राशन, पानी से लेकर परिवार के पास उपलब्ध कार, बाइक और साइकिल तक की जानकारी एक डिजिटल बुकलेट में दर्ज की जाएगी।
Digital Census 2026 : सेल्फ-एन्युमरेशन: खुद पोर्टल पर भर सकेंगे अपनी जानकारी
डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने इस बार नागरिकों को ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ (Self-Enumeration) का विकल्प दिया है। लोग आधिकारिक पोर्टल पर जाकर खुद अपनी और अपने परिवार की डिटेल्स भर सकेंगे। इसके लिए नागरिकों को 11 अंकों की एक विशिष्ट आईडी (ID) बनानी होगी, जिसे बाद में घर आने वाले जनगणना अधिकारी को बताना होगा। जो लोग ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाएंगे, उनके लिए स्कूल शिक्षक, तहसीलदार और एसडीएम जैसे सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा कलेक्ट करेंगे। यह मोबाइल ऐप कुल 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप पर विशेष सवाल और सामाजिक बदलाव
इस बार की जनगणना के प्रश्नावली में कुछ आधुनिक सामाजिक बदलावों को भी शामिल किया गया है। 33 सवालों की सूची में एक सवाल ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ को लेकर भी है। जनगणना अधिकारी पूछेंगे कि बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों का रिश्ता कैसा है और वे अपने संबंध को किस श्रेणी में रखते हैं। यदि कोई जोड़ा बिना विवाह किए लंबे समय से साथ रह रहा है, तो उनके रिश्ते को ‘स्थिर संबंध’ माना जाएगा और उन्हें जनगणना के रिकॉर्ड में विवाहित जोड़े के समान दर्जा दिया जा सकता है। यह डेटा देश की बदलती सामाजिक संरचना को समझने में मदद करेगा।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया: अप्रैल से सितंबर तक का समय
महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी—पहला चरण ‘हाउसलिस्टिंग’ (HLO) और दूसरा ‘व्यक्तिगत जानकारी’। 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच राज्यों में चरणबद्ध तरीके से फील्ड वर्क किया जाएगा। इस दौरान मकान नंबर, घर के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति जैसे बुनियादी प्रश्न पूछे जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र किए गए व्यक्तिगत आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे।
प्रश्नावली के कुछ प्रमुख सवाल: क्या-क्या बताना होगा?
जनगणना के दौरान आपसे निम्नलिखित श्रेणियों में प्रश्न पूछे जा सकते हैं:
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घर की स्थिति: घर पक्का है या कच्चा? फर्श और छत बनाने में किस सामग्री का उपयोग हुआ है?
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परिवार का विवरण: परिवार का मुखिया कौन है? सदस्यों की संख्या, उनकी उम्र, लिंग और जाति क्या है?
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आजीविका: परिवार में कौन नौकरी करता है और कौन बिजनेस? आय के मुख्य साधन क्या हैं?
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सुविधाएं: घर में बिजली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय की क्या व्यवस्था है?
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संपत्ति: परिवार के पास कितने वाहन (साइकिल, बाइक, कार) हैं और इंटरनेट/डिजिटल डिवाइस की क्या स्थिति है?
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