Headline
Jantar Mantar Terror Plot
Jantar Mantar Terror Plot: जंतर-मंतर आतंकी हमले की साजिश नाकाम, ISI मॉड्यूल का खुलासा, 9 आरोपी गिरफ्तार
RBI Repo Rate Update
RBI Repo Rate Update: RBI ने Repo Rate 5.25% पर रखा स्थिर, लोन EMI में राहत नहीं
Article 370
Article 370: आर्टिकल 370 हटाने से पहले का सीक्रेट मिशन, इन 7 चेहरों ने निभाई अहम भूमिका
Food Cravings
Food Cravings: चॉकलेट और मीठा खाने का मन क्यों करता है? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
Shravan Amavasya 2026
Shravan Amavasya 2026: सावन अमावस्या कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा के नियम
Mangal Milan Meeting
BJP Mangal Milan Meeting: मांडविया ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, UPA पर साधा निशाना
Amit Shah Big Statement
Amit Shah Big Statement: 7 साल में 36 देशों से लौटे 275 भगोड़े अपराधी, शाह ने गिनाईं उपलब्धियां
Lok Sabha
Lok Sabha: ध्वनिमत से पास हुआ विनियोग विधेयक 2026, विपक्ष ने चर्चा का किया बहिष्कार
Bypoll Results
Bypoll Results : उपचुनाव नतीजों पर BJP में मंथन, नितिन नवीन बोले- नई ऊर्जा और संकल्प के साथ जनता के बीच जाएंगे

ADR Report 2024-25: राष्ट्रीय दलों के चंदे में 161% की भारी बढ़ोतरी, BJP को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

ADR Report 2024-25

ADR Report 2024-25:  एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति के वित्तीय परिदृश्य को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में 161% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। 20 हजार रुपये से अधिक के कुल चंदे की राशि 6,648.563 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है, जो कुल 11,343 अलग-अलग दानों के माध्यम से प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा भारतीय चुनाव प्रक्रिया में धनबल के बढ़ते प्रभाव और राजनीतिक फंडिंग के बदलते स्वरूप को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

ADR Report 2024-25: BJP का वर्चस्व: अन्य सभी राष्ट्रीय दलों के कुल योग से 10 गुना अधिक चंदा

पार्टी-वार विश्लेषण करने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पलड़ा सबसे भारी नजर आता है। रिपोर्ट बताती है कि अकेले बीजेपी को 6,074.015 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जो अन्य सभी राष्ट्रीय दलों (कांग्रेस, आप, सीपीआई-एम और एनपीईपी) को मिले कुल चंदे से 10 गुना से भी ज्यादा है। तुलनात्मक रूप से देखें तो कांग्रेस को 517.394 करोड़ रुपये मिले हैं। रोचक बात यह है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने पिछले 19 वर्षों की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए इस बार भी घोषित किया है कि उन्हें 20 हजार रुपये से अधिक का कोई चंदा प्राप्त नहीं हुआ है।

ADR Report 2024-25:  प्रतिशत में भारी वृद्धि: आम आदमी पार्टी और एनपीईपी ने भी दर्ज की बढ़त

वित्त वर्ष 2024-25 राजनीतिक दलों के खजाने के लिए काफी लाभदायक रहा है। बीजेपी के चंदे में 171% की वृद्धि हुई है (2,243 करोड़ से बढ़कर 6,074 करोड़)। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के चंदे में 84% का इजाफा देखा गया है। प्रतिशत के मामले में सबसे अधिक उछाल नेशनल पीपल्स पार्टी (NPEP) में दिखा, जिसकी फंडिंग में 1,313% की अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज की गई। आम आदमी पार्टी (AAP) को भी 244% की बढ़ोतरी के साथ 27.044 करोड़ रुपये मिले। कुल मिलाकर, राजनीतिक चंदे के बाजार में पिछले वर्ष की तुलना में 4,104 करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि हुई है।

कॉर्पोरेट जगत का दबदबा: 92% से अधिक चंदा कंपनियों की ओर से आया

राजनीतिक दलों को मिलने वाले पैसे का सबसे बड़ा स्रोत आम जनता नहीं, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट घराने और इलेक्टोरल ट्रस्ट रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, कुल चंदे का 92.18% हिस्सा (6,128.787 करोड़ रुपये) कॉर्पोरेट दान से आया है, जबकि व्यक्तिगत दानदाताओं की हिस्सेदारी महज 7.61% (505.66 करोड़ रुपये) रही है। बीजेपी को कॉर्पोरेट सेक्टर से 5,717 करोड़ रुपये मिले, जो बाकी सभी दलों के सामूहिक कॉर्पोरेट चंदे से 13 गुना अधिक है। कांग्रेस को कंपनियों से 383.86 करोड़ और व्यक्तिगत रूप से 132.39 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

इलेक्टोरल ट्रस्ट और बड़े दानदाता: प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट सबसे आगे

राजनीतिक चंदे के वितरण में इलेक्टोरल ट्रस्ट की भूमिका निर्णायक रही है। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट सबसे बड़े दानदाता के रूप में उभरा है, जिसने कुल 2,413.465 करोड़ रुपये वितरित किए। इसमें से शेर का हिस्सा (2,180.71 करोड़) बीजेपी के खाते में गया, जबकि कांग्रेस को 216 करोड़ और आप को 16 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा, प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट (834.97 करोड़) और एबी जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट (621 करोड़) भी प्रमुख रहे। कंपनियों में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने 100 करोड़ और रुंगटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड ने 95 करोड़ रुपये का भारी-भरकम दान दिया।

पारदर्शिता और लोकतांत्रिक चुनौतियां: एडीआर की रिपोर्ट के मायने

एडीआर की यह विस्तृत रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र में वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। चंदे में इतनी भारी बढ़ोतरी और एक ही दल के पक्ष में संसाधनों का संकेंद्रण चुनाव के दौरान ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (समान अवसर) की अवधारणा को प्रभावित कर सकता है। जिस तरह से कॉर्पोरेट घराने राजनीतिक दलों में निवेश कर रहे हैं, उससे नीति निर्माण में उनके प्रभाव की संभावनाओं पर बहस फिर से तेज हो गई है।

Read More:  Typhoid India: भारत में टाइफाइड का खौफनाक सच,एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से 12,300 करोड़ का नुकसान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
घर की सूनी दीवार को बनाएं हराभरा ग्रीन साड़ी में रॉयल और ट्रेंडी दिखने के लिए अपनाएं ये तरीके पिंपल्स वाली स्किन के लिए मेकअप के आसान टिप्स पहले सावन सोमवार की पूजा ऐसे करें सफल कहां से आया फ्रेंडशिप डे का विचार?