Headline
Ram Mandir Controversy :
Ram Mandir Controversy : राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई, ट्रस्ट की मांग पर SIT गठित
PoK Protest
PoK Protest : पीओके में भड़की आजादी की चिंगारी, शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को बताया आतंकवादी
TMC Rebel MP
TMC Rebel MP : टीएमसी में बगावत तेज! Sudip Bandyopadhyay पहुंचे Bhupender Yadav से मिलने
Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief
Lt Gen Dhiraj Seth Army Chief होंगे नए सेना प्रमुख, 30 जून से संभालेंगे भारतीय सेना की कमान
INDIA Alliance Rift
INDIA Alliance Rift : INDIA गठबंधन की फूट उजागर, लेफ्ट ने पूछा- राहुल गांधी केरल सीएम को गले क्यों नहीं लगाते?
Demographic Change
Demographic Change : देश में डेमोग्राफी बदलाव के अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय समिति बनेगी, अमित शाह ने दिए सख्त निर्देश
Vikram 1 Rocket Launch
Vikram 1 Rocket Launch : भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम-I’ तैयार, श्रीहरिकोटा से रचा जाएगा इतिहास
PM Modi France Visit
PM Modi France Visit : फ्रांस में मैक्रों संग मुलाकात और जी7 समिट, पीएम मोदी के एजेंडे में क्या?
US Iran Conflict
US Iran Conflict : डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों पर भड़का ईरान, अमेरिका पर लगाया भारतीय नाविकों की हत्या का आरोप

Natanz Strike: नतांज हमले पर भड़का रूस, मारिया जखारोवा ने इजरायल-अमेरिका को चेताया- ‘आग से न खेलें’!

Natanz Strike

Natanz Strike:  मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, और इसी के साथ क्षेत्रीय तनाव नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। शनिवार, 21 मार्च 2026 को ईरान के सबसे महत्वपूर्ण यूरेनियम संवर्धन स्थल ‘नतांज परमाणु केंद्र’ पर हुए हमले ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस घटना पर रूस ने अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इस हमले को न केवल एक सैन्य आक्रामकता बताया है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मानदंडों का खुला अपमान भी करार दिया है।

Natanz Strike:  मारिया जखारोवा का कड़ा प्रहार: अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रभावशाली प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए नतांज पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन’ बताते हुए चेतावनी दी कि परमाणु प्रतिष्ठानों को युद्ध का हिस्सा बनाना पूरी दुनिया के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। जखारोवा ने जोर देकर कहा कि परमाणु स्थलों को निशाना बनाना न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करता है, बल्कि यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक अपूरणीय खतरा है। रूस का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह इस मुद्दे पर ईरान के साथ मजबूती से खड़ा है।

Natanz Strike:  ईरान के परमाणु कार्यक्रम और रूस की कूटनीतिक प्रतिबद्धता

रूस ऐतिहासिक रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करता रहा है और इसे हमेशा ‘शांतिपूर्ण’ उद्देश्यों के लिए बताता आया है। मॉस्को लंबे समय से ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ (JCPOA) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों का प्रबल पैरोकार रहा है, जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है। इतना ही नहीं, ईरान के कई परमाणु केंद्रों पर रूसी तकनीक और विशेषज्ञों का सीधा सहयोग रहा है। नतांज पर हमला सीधे तौर पर रूस के तकनीकी और कूटनीतिक हितों पर भी प्रहार माना जा रहा है। यही कारण है कि रूस इस हमले को अपनी विदेश नीति और क्षेत्रीय प्रभाव के खिलाफ एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहा है।

क्षेत्रीय युद्ध के विस्तार का खतरा और विशेषज्ञों की चिंता

रक्षा विशेषज्ञों और सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि नतांज जैसे संवेदनशील और सामरिक महत्व के स्थलों पर हमले पूरे मध्य-पूर्व को एक ऐसी आग में झोंक सकते हैं जिससे निकलना नामुमकिन होगा। परमाणु केंद्र पर हमले का अर्थ है कि अब युद्ध की कोई ‘रेड लाइन’ शेष नहीं रह गई है। विशेषज्ञों को डर है कि इसके बाद मिसाइल हमलों और आत्मघाती जवाबी कार्रवाइयों का एक अंतहीन सिलसिला शुरू हो सकता है, जिसमें लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देश भी पूरी तरह से खिंचे चले आएंगे। यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए भी विनाशकारी हो सकती है।

रूस की शांति की अपील: ‘अधिकतम संयम’ बरतने की जरूरत

वर्तमान स्थिति की गंभीरता और परमाणु आपदा की आशंका को देखते हुए, रूस ने युद्ध में शामिल सभी पक्षों से ‘अधिकतम संयम’ (Maximum Restraint) बरतने की पुरजोर अपील की है। रूसी कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यदि इस समय हिंसा को नहीं रोका गया, तो मध्य-पूर्व की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया है कि वे इस तरह की उत्तेजक कार्रवाइयों को रोकने के लिए दबाव बनाएं। मॉस्को का मानना है कि केवल बातचीत और कूटनीतिक मेज पर वापसी ही इस महाविनाश को टालने का एकमात्र रास्ता है।

परमाणु सुरक्षा पर वैश्विक संकट

नतांज परमाणु केंद्र पर हमला केवल दो देशों का झगड़ा नहीं रह गया है, बल्कि इसने परमाणु सुरक्षा के वैश्विक सिद्धांतों को हिलाकर रख दिया है। रूस की कड़ी प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि वह इस क्षेत्र में किसी भी बड़े शक्ति संतुलन के बदलाव को चुपचाप नहीं देखेगा।

Read More:  USCIRF vs India: आरएसएस पर बैन की अमेरिकी सिफारिश पर ‘महा-संग्राम’, 275 पूर्व जजों और सैन्य अधिकारियों ने खोली पोल!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
कामाख्या मंदिर दर्शन के लिए बेहतरीन बजट ऑफर ढाबे जैसा पनीर पराठा घर पर कैसे बनाएं राजस्थान में आज भी राबड़ी है पहली पसंद गर्मी में Hot Coffee से मिलती है ठंडक? स्किन ऑयली है?