अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए कई बार महिलाएं इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या अबॉर्शन पिल्स का सहारा लेती हैं। लेकिन बहुत-सी महिलाएं इनके सही समय और परिस्थितियों के बारे में भ्रमित रहती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों गोलियों का उपयोग अलग-अलग उद्देश्य और समय पर किया जाता है। इस ब्लॉग में जानिए कि कब लेनी चाहिए इमरजेंसी पिल और कब जरूरत पड़ती है अबॉर्शन पिल्स की।
इमरजेंसी पिल क्या होती है और यह कैसे काम करती है?
इमरजेंसी पिल को ‘Morning-After Pill’ भी कहा जाता है। इसका उपयोग असुरक्षित यौन संबंध या कॉन्ट्रासेप्टिव फेल होने की स्थिति में किया जाता है। यह गर्भधारण को रोकने के लिए अंडोत्सर्ग (Ovulation) को टालती है या गर्भाशय में निषेचित अंडाणु को चिपकने से रोकती है। इसे यौन संबंध के 72 घंटे के भीतर लेना अधिक प्रभावी होता है। यह नियमित गर्भनिरोधक नहीं है और बार-बार इसका इस्तेमाल शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। बाजार में ‘i-pill’, ‘Unwanted 72’ जैसे ब्रांड उपलब्ध हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना सुरक्षित रहता है।
किन स्थितियों में लेनी चाहिए इमरजेंसी पिल?
अगर आपने बिना किसी गर्भनिरोधक उपाय के यौन संबंध बनाए हैं। कंडोम फट गया हो, स्लिप हो गया हो या किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण गर्भनिरोधक उपाय असफल हुआ हो। अगर गर्भनिरोधक गोलियां समय पर नहीं ली गई हों। यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म जैसी स्थिति में भी डॉक्टर की सलाह के साथ इमरजेंसी पिल दी जाती है। ध्यान दें: यह पिल्स केवल संभावित गर्भधारण को रोकती हैं, पहले से मौजूद गर्भावस्था को नहीं। अगर निषेचन हो चुका है, तो इसका कोई असर नहीं होता।
अबॉर्शन पिल क्या है और यह कैसे काम करती है?
अबॉर्शन पिल का उपयोग गर्भधारण को समाप्त करने के लिए किया जाता है, जब प्रेगनेंसी कंफर्म हो चुकी हो। यह दो दवाओं-माइफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल-के कॉम्बिनेशन से बनाई जाती है। माइफेप्रिस्टोन प्रेगनेंसी-सपोर्टिंग हार्मोन प्रोजेस्टेरोन को ब्लॉक करता है, जबकि मिसोप्रोस्टोल गर्भाशय में संकुचन उत्पन्न कर भ्रूण को बाहर निकालता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 6 से 9 सप्ताह की गर्भावस्था तक प्रभावी होती है। अबॉर्शन पिल का प्रयोग डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए क्योंकि इससे भारी रक्तस्राव, दर्द और संक्रमण का खतरा हो सकता है।
अबॉर्शन पिल का इस्तेमाल कब करें और कब नहीं?
यदि प्रेगनेंसी की पुष्टि हो चुकी है और यह 9 सप्ताह से कम की है, तो अबॉर्शन पिल का विकल्प हो सकता है। इसका निर्णय स्वयं नहीं लेना चाहिए-हमेशा अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर की सलाह से यह प्रक्रिया अपनाएं। यदि गर्भावस्था अधिक सप्ताह की हो चुकी है या इंट्रा यूटेराइन डिवाइस (IUD) लगा है, तो यह पिल्स उपयुक्त नहीं होती। कुछ मेडिकल कंडीशन्स (जैसे खून की बीमारी, अस्थमा या पुरानी बीमारियां) में भी यह पिल्स नुकसान पहुंचा सकती हैं। मानसिक और भावनात्मक समर्थन के साथ ही यह निर्णय लेना बेहतर होता है।
क्या हैं सावधानियां और साइड इफेक्ट्स?
- इमरजेंसी पिल: इससे अनियमित पीरियड्स, उल्टी, सिरदर्द, या पेट दर्द हो सकता है। बार-बार इस्तेमाल से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।
- अबॉर्शन पिल: भारी ब्लीडिंग, पेट में तेज दर्द, बुखार या संक्रमण की आशंका रहती है। गलत तरीके से ली गई पिल्स जानलेवा भी हो सकती हैं।
बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी पिल का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। यदि पिल लेने के बाद लगातार ब्लीडिंग, बुखार या कमजोरी महसूस हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जागरूकता और मेडिकल गाइडेंस से ही इन दवाओं का सुरक्षित और असरदार उपयोग संभव है।
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